कर्मचारियों ने दिल्ली के 3 नगर निकायों के एकीकरण की मांग की

कर्मचारियों ने दिल्ली के 3 नगर निकायों के एकीकरण की मांग की
कर्मचारियों ने दिल्ली के 3 नगर निकायों के एकीकरण की मांग की नई दिल्ली, 12 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली के तीनों नगर निगमों-उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम की स्थिति का हवाला देते हुए एमसीडी कर्मचारी संघ परिसंघ ने त्रिविभाजन को समाप्त करने और तीनों निकायों को फिर से मिलाने की मांग उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है।

इस यूनियन का गठन अन्य 18 यूनियनों को मिलाकर किया गया है। संघ के मुताबिक, तीनों निगमों में करीब 1.5 लाख कर्मचारी हैं, जबकि 55,000 पेंशनभोगी हैं। यानी फिलहाल दो लाख परिवार निगमों से जुड़े हुए हैं। निगम दिल्ली के निवासियों को लगभग 50 प्रकार की सुविधाएं प्रदान करता है।

उनके अनुसार जब निगम के कर्मचारियों को उनका वेतन या बकाया नहीं मिल रहा है तो लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की दक्षता भी प्रभावित होगी।

एमसीडी कर्मचारी संघ के कन्फेडरेशन के संयोजक एपी खान ने आईएएनएस को बताया, कभी चार महीने का वेतन, कभी छह महीने की पेंशन और कभी कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे है तो उसे शेष बकाया नहीं मिलता है। इसके बजाय, हमारी प्रमुख मांग वेतन प्रदान करने की है जो समय पर पूरी नहीं हुई है।

2012 में, निगम को तीन भागों में विभाजित किया गया था। तब से खर्च एक स्तर तक बढ़ गया है जिससे केवल नुकसान हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा, हमने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है और उनसे 2012 की तरह निगम को फिर से मिलाने का अनुरोध किया है ताकि दिल्ली के लोगों को कोई समस्या न हो।

दरअसल संघ ने पहले भी इस मांग को उठाते हुए एक पत्र लिखा था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है।

यूनियन के अन्य सदस्यों के अनुसार, कर्मचारियों के वेतन को लेकर पहले कभी समस्या नहीं हुई, लेकिन निगमों के बंटवारे के बाद से ये समस्याएं सामने आने लगीं।

इसके अलावा, निगमों के विभाजन के कारण, विभिन्न कार्यालय बनाए गए, काम विभाजित हो गए, महापौर अलग हो गए और खर्च कई गुना बढ़ गए।

संघ के सदस्य दीपक कुमार ने कहा, 2018 में सेवानिवृत्त हुए पेंशनभोगी को अब तक सेवानिवृत्ति का लाभ नहीं मिला है। लगभग 30 वर्षों से लगातार समय पर वेतन पाने वाले कर्मचारी को अचानक वेतन मिलना बंद हो जाता है, उसका परिवार कैसे चलेगा।

प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्रालय, दिल्ली के मुख्यमंत्री और दिल्ली उच्च न्यायालय को भी पत्र लिखे गए हैं।

--आईएएनएस

एसएस/आरएचए

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