केंद्र अरुणाचल में 2,880 मेगावाट बिजली परियोजना के लिए 32,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी देगा

केंद्र अरुणाचल में 2,880 मेगावाट बिजली परियोजना के लिए 32,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी देगा
केंद्र अरुणाचल में 2,880 मेगावाट बिजली परियोजना के लिए 32,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी देगा ईटानगर, 23 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चाउना मीन को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार राज्य में जल्द ही 2,880 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली दिबांग पनबिजली परियोजना के लिए 32,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी देगी। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

अरुणाचल प्रदेश बिजली विभाग के एक अधिकारी ने उपमुख्यमंत्री के हवाले से कहा कि नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के साथ बैठक के दौरान पूर्वोत्तर राज्य में समृद्ध जलविद्युत क्षमता का दोहन करने के तरीकों पर चर्चा की गई।

सिंह ने मीन को यह भी बताया कि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम सक्रिय रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले, आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए काम करेंगे और स्थानीय ठेकेदारों को भी विकसित करेंगे, ताकि ऐसी परियोजनाओं का लाभ स्थानीय समुदायों द्वारा उठाया जा सके।

स्थानीय क्षेत्र के विकास, संबद्ध आर्थिक गतिविधियों और उदार राहत और पुनर्वास नीतियों जैसे हस्तक्षेपों के माध्यम से, ये परियोजनाएं क्षेत्र के चहुंमुखी विकास में लाएंगी।

ये परियोजनाएं अरुणाचल प्रदेश में बड़ी बाढ़ नियंत्रण भी सुनिश्चित करेंगी, जिससे सैकड़ों करोड़ रुपये के नुकसान से बचा जा सकेगा।

उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में सुधार किया है और भूमि मालिकों को वैध भूमि मुआवजे का तत्काल वितरण सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने अवगत कराया कि अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध पनबिजली परियोजना का विकास ग्लासगो सीओपी-26 में प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता में मदद करने वाला है, जिससे 500 जीडब्ल्यू गैर-जीवाश्म ईंधन शक्ति को जोड़कर भारत को शुद्ध शून्य उत्सर्जन वाला देश बनाया जा सके।

चाउना मीन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में पनबिजली क्षमता के माध्यम से इस लक्ष्य का 10 प्रतिशत योगदान करने की क्षमता है। उपमुख्यमंत्री ने 600 मेगावाट कामेंग परियोजना से आने वाले राज्य को बिजली की मुफ्त आपूर्ति सहित लाभों का उल्लेख किया, जिसे 19 नवंबर को प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि 2000 मेगावाट की निचली सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना जल्द ही शुरू की जाएगी, जिसके माध्यम से राज्य को प्रति वर्ष 400 करोड़ रुपये और स्थानीय क्षेत्र के विकास में 70 करोड़ रुपये मिलेंगे।

उपमुख्यमंत्री ने निजी क्षेत्र और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा समयबद्ध तरीके से 32,000 मेगावाट क्षमता वाली प्रस्तावित 29 परियोजनाओं के बारे में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के साथ चर्चा की। इन परियोजनाओं से लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ने सहित इन परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को हल करने में राज्य की सक्रिय भूमिका की सराहना की।

इन परियोजनाओं को विकसित करने के लिए एक स्पष्ट समयरेखा तय की गई थी। 2820 मेगावाट क्षमता वाली पांच परियोजनाओं के लिए केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के साथ समझौता ज्ञापन एक महीने के भीतर हस्ताक्षर के लिए तैयार हो जाएगा।

इसके अलावा, 6063 मेगावाट क्षमता वाली छह परियोजनाएं अगले एक साल में निवेश के लिए तैयार होंगी।

--आईएएनएस

एसजीके/एएनएम

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