छठी स्कॉर्पीन पनडुब्बी वागशीर मुंबई में नौसैनिक बेड़े में हुई शामिल

छठी स्कॉर्पीन पनडुब्बी वागशीर मुंबई में नौसैनिक बेड़े में हुई शामिल
छठी स्कॉर्पीन पनडुब्बी वागशीर मुंबई में नौसैनिक बेड़े में हुई शामिल मुंबई, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के रक्षा नौसैनिक बेड़े में बुधवार को स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी वागशीर शामिल की गई। प्रोजेक्ट-75 की छठी स्कॉर्पीन श्रेणी की इस पनडुब्बी, आईएनएस वागशीर को मुंबई में लॉन्च किया गया।

अत्याधुनिक स्कॉर्पीन पनडुब्बी वागशीर को मेक इन इंडिया पहल के तहत बुधवार को मझगांव डॉक्स में लॉन्च किया गया।

पनडुब्बी को मुख्य अतिथि और रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, उनकी पत्नी वीना ए. कुमार, मुंबई दक्षिण से सांसद अरविंद सावंत, पश्चिमी नौसेना कमान प्रमुख, वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह, वाइस एडमिरल एस. एन. घोरमडे, मझगांव डॉक्स लिमिटेड अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक वाइस एडमिरल नारायण प्रसाद (सेवानिवृत्त) और अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति और अधिकारियों की उपस्थिति में लॉन्च किया गया।

मीडिया को संबोधित करते हुए, रक्षा सचिव अजय कुमार ने कहा कि अब इस स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन का करीब 1 वर्ष तक समुद्री परीक्षण होगा, जिसे सफलता पूर्वक पूरा करने के बाद भारतीय नौसेना में इसे शामिल किया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि इसका नाम हिंद महासागर के घातक गहरे समुद्र में रहने वाली सैंड फिश के नाम पर रखा गया है।

रूस की पहली पनडुब्बी वागशीर को दिसंबर 1974 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था और इसने अप्रैल 1997 तक सेवा दी।

नई वागशीर पनडुब्बी अपने पुराने संस्करण या वर्जन का नवीनतम अवतार है, क्योंकि नौसेना की परिभाषा के अनुसार एक जहाज का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं होता है। इसलिए भारत की विशाल समुद्री सीमाओं और हितों की रक्षा के लिए बनाई गई नई पनडुब्बी का नाम भी इसी नाम से प्रेरित है।

स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ है और साथ ही इनमें उन्नत ध्वनिक साइलेंसिंग तकनीक, कम विकिरण वाले शोर स्तर, हाइड्रो-डायनामिक रूप से अनुकूलित आकार और दुश्मन पर सटीक हथियारों से अचूक हमला करने की क्षमता जैसी बेहतर सुविधाएं हैं।

इससे पानी के भीतर या सतह पर, टॉरपीडो और ट्यूब लॉन्च एंटी-शिप मिसाइल दोनों के साथ दुश्मन पर हमला किया जा सकता है। स्कॉर्पीन पनडुब्बियां कई तरह के बड़े मिशन को अंजाम दे सकती हैं, जैसे एंटी-सर्फेस वॉर (सतह-रोधी युद्ध), एंटी-सबमरीन्स वॉर (पनडुब्बी रोधी युद्ध), खुफिया जानकारी एकत्र करना, माइंस बिछाना, क्षेत्र की निगरानी आदि।

इसे ऑपरेशन के सभी थिएटरों में संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

प्रोजेक्ट-75 के तहत स्कॉर्पीन श्रेणी की 4 अति-आधुनिक पनडुब्बियां आईएनएस कलवरी, आईएनएस खंडेरी, आईएनएस करंज और आईएनएस वेला इस समय भारतीय नौसेना को अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा आईएनएस वागीर समुद्री परीक्षण के दौर से गुजर रही है।

--आईएएनएस

एकेके/एएनएम

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