ज्यादातर लोगों का कहना है कि कृषि कानूनों पर विरोध राजनीति से प्रेरित

ज्यादातर लोगों का कहना है कि कृषि कानूनों पर विरोध राजनीति से प्रेरित
ज्यादातर लोगों का कहना है कि कृषि कानूनों पर विरोध राजनीति से प्रेरित नई दिल्ली, 21 नवंबर (आईएएनएस)। भारत में सब कुछ राजनीति के लिए होता है। संसद में कृषि कानूनों का विवादास्पद पारित होना या उसके बाद उनका निरस्त होना। इन कृषि कानूनों को निरस्त करने के तुरंत बाद आईएएनएस-सीवोटर द्वारा किए गए एक राष्ट्रव्यापी स्नैप पोल के दौरान, यह पूछे जाने पर कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के पीछे का मकसद क्या है, इस पर 56 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि ये विरोध प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित थे। दिलचस्प बात यह है कि लगभग 48 प्रतिशत विपक्षी मतदाताओं ने ऐसा ही सोचा।

एक सवाल का जवाब और अधिक स्पष्ट था जिसमें पूछा गया था कि क्या तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने से 2022 की शुरूआत में होने वाले विधानसभा चुनावों पर असर पड़ेगा? 55.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं का स्पष्ट जवाब था कि इसका असर पड़ेगा, जबकि सिर्फ 30.8 फीसदी का मानना है कि इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

एक बार फिर एनडीए और विपक्षी समर्थकों के विचारों में एकरूपता नजर आई। एनडीए के लगभग 53 प्रतिशत मतदाताओं ने बताया कि चुनावों पर असर पड़ेगा, जबकि 56 प्रतिशत से अधिक विपक्षी मतदाताओं ने ऐसा ही महसूस किया।

यह पूछे जाने पर कि क्या मोदी, जैसा कि उन्होंने 2015 में भूमि अधिग्रहण विधेयक के साथ किया था, दबाव के आगे झुक जाते हैं, जब उन पर व्यवसाय समर्थक होने का आरोप लगाया जाता है, तो एनडीए के 36.3 प्रतिशत समर्थक असहमत थे, जबकि 43 प्रतिशत ने हां कहा।

यह पूछे जाने पर कि निरस्त करने का श्रेय किसे जाता है, एनडीए के 47 प्रतिशत मतदाताओं ने मोदी सरकार का सुझाव दिया, जबकि 36 प्रतिशत विपक्षी समर्थकों ने इससे असहमति जताई।

आईएएनएस-सीवोटर पोल यह स्पष्ट करता है कि कृषि कानून और इसको लेकर होने वाली राजनीति आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

--आईीएनएस

एचके/आरजेएस

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