दिल्ली बनाम केंद्र : एससी ने संविधान पीठ को भेजा मामला

दिल्ली बनाम केंद्र : एससी ने संविधान पीठ को भेजा मामला
दिल्ली बनाम केंद्र : एससी ने संविधान पीठ को भेजा मामला नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच शक्तियों और सेवाओं पर नियंत्रण का मामला सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संविधान पीठ के पास भेज दिया।

मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल सेवाओं से संबंधित है, और इसका फैसला संविधान पीठ करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 11 मई को 5 न्यायाधीशों की पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया, जो इस बात पर विचार करेगी कि सेवाओं को नियंत्रित कौन करेगा।

2018 में, एक संविधान पीठ ने फैसला सुनाया था कि पुलिस, भूमि और सार्वजनिक व्यवस्था पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है, और बाकी दिल्ली सरकार के अधीन है।

केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 239अअ की व्याख्या के लिए मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की मांग करते हुए एक याचिका लगाई थी।

केंद्र की याचिका में कहा गया, आवेदक ने कानून का एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है और फिलहाल इस मामले में शामिल प्रमुख मुद्दों को तब तक डिफाइन नहीं किया जा सकता जब तक कि संविधान के अनुच्छेद 145 (3) के संदर्भ में एक संविधान पीठ इसे तय नहीं कर देती।

दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि एक बार जब संविधान पीठ इस मामले का फैसला कर चुकी है, तो इसे वापस भेजने का कोई मतलब नहीं है।

सिंघवी ने जोर देकर कहा कि इंगित की गई हर छोटी सी बात को बड़ी पीठ को नहीं भेजा जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि मुद्दा यह है कि संविधान के प्रावधान के दो हिस्से हैं, समस्या तब पैदा होती है जब वे किसी प्रावधान का उल्लेख करते हैं लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकलता है, ऐसे में मामले को एक बड़ी पीठ के पास भेजना आवश्यक हो जाता है।

सिंघवी ने जवाब दिया कि इस मुद्दे को बड़ी बेंच को रेफर करना जरूरी नहीं है और मौजूदा तीन जजों की बेंच भी इस पर फैसला ले सकती है।

पीठ ने पूछा, क्या होगा..यदि रेफर किया जाता है? सिंघवी ने कहा, सवाल यह है कि इसे क्यों रेफर किया जाना चाहिए?

उन्होंने कहा कि एक संविधान पीठ से दूसरे संविधान पीठ को भेजना दुर्लभ है। उन्होंने कहा, मैं इसे रेफर करने के लिए आपकी शक्ति पर सवाल नहीं उठा रहा हूं ..

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जजों ने मामले को रेफर करने के लिए कहा। मेहता ने जोर देकर कहा कि इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने की जरूरत है।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने कहा कि यदि संविधान पीठ का गठन किया जाता है, तो वह चाहेगी कि सुनवाई 15 मई तक समाप्त हो जाए। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि मामले में सुनवाई गर्मी की छुट्टी शुरू होने से पहले समाप्त की जा सकती है।

--आईएएनएस

एसकेपी

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