दो सौ सिविल सर्वेट्स के लिए सेंकड फैमिली है जामिया आरसीए

दो सौ सिविल सर्वेट्स के लिए सेंकड फैमिली है जामिया आरसीए
दो सौ सिविल सर्वेट्स के लिए सेंकड फैमिली है जामिया आरसीए दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली में एक ऐसी कोचिंग एकेडमी है जहां से बीते 10 वर्षों में 220 छात्र सिविल सर्विसेस में चुने गए हैं। यह जामिया मिलिया इस्लामिया स्थित रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (आरसीए) है।

इस एकेडमी से 220 छात्र सिविल सर्विसेस के अलावा 376 अन्य छात्र पीसीएस, बैंक पीओ, आरबीआई जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के लिए भी चुने जा चुके हैं। बड़ी बात यह है छात्रों के लिए यह कोचिंग निशुल्क हैं। यहां दाखिला प्रवेश परीक्षा के आधार पर दिया जाता है।

पिछले साल आरसीए के 44 उम्मीदवारों ने यूपीएससी परीक्षा पास की थी जिसमें थर्ड टॉपर जुनैद अहमद शामिल हैं। 2020 में आरसीए जामिया की संचिता शर्मा यूपीपीएससी परीक्षा के सफल उम्मीदवारों की सूची में शीर्ष पर थी। वह दो वर्षों से आरसीए हॉस्टल में रह रहकर परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं।

2010 में अपनी स्थापना के बाद से, जामिया की आरसीए ने यूपीएससी की परीक्षाओं के जरिए से 200 से अधिक सिविल सेवक बनाने में योगदान किया है। इनमें आईएएस, आईएफएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस, आईआरटीएस सेवाओं के लिए चुने गए छात्र आदि शामिल हैं।

इसके अलावा, (एसडीएम और डीएसपी के रूप में), आरबीआई (ग्रेड- बी), सहायक कमांडेंट (सीएपीएफ), आईबी, सहायक आयुक्त (भविष्य निधि) और बैंक पीओ आदि के लिए आरसीए के 245 छात्रों ने प्रांतीय सिविल सेवाओं में कामयाबी पाई है।

जामिया आरसीए से निकले सैकड़ों छात्र अब देश के अलग-अलग राज्यों में आईएएस आईपीएस पर पीसीएस अधिकारियों के रूप में तैनात हैं।

आंध्र प्रदेश स्थित नेल्लोर में बतौर असिस्टेंट कलेक्टर कार्य कर रहे आईएएस अधिकारी फरमान खान, जामिया आरसीए को याद करते हुए कहते हैं, जामिया आरसीए मेरे लिए कोई कोचिंग एकेडमी नहीं बल्कि सेकंड फैमिली है।

फरमान ने आईएएनएस से कहा, मैंने सब कुछ जामिया जामिया से ही सीखा है। मेरे सारे फेलीयर्स और मेरी सारी कामयाबियां जामिया से जुड़ी है। फरमान 2019 में आईएएस अधिकारी बने हैं।

कुछ ऐसा ही पंजाब के मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात आईपीएस अधिकारी हरीश ध्यामा का भी कहना है। उनका कहना है, मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि आरसीए जुड़ सका। 2011 में एक ऑनलाइन विज्ञापन देखकर मैंने आरसीए को ईमेल किया था। आरसीए की तरफ से मेरे ईमेल का जवाब आया। मैं वहां सिर्फ स्टडी मटेरियल मांगने पहुंचा था। आरसीए के अधिकारियों ने मुझे स्टडी मैटेरियल तो नहीं दिया लेकिन मुझे आरसीए में दाखिला लेने के लिए मोटिवेशन दिया।

उन्होंने कहा, इसके बाद मैंने आरसीए की परीक्षा दी और यहां एडमिशन लिया। मैं पहली बार इंटरव्यू में पास नहीं कर सका। इसके बाद मैंने दोबारा तैयारी की और 2013 में आईपीएस के लिए सिलेक्ट हुआ। मेरी इस कामयाबी में आरसीए की कभी ना भुलाई जा सकने वाली भूमिका है। यहां छात्रों को आधुनिक लाइब्रेरी पीर लनिर्ंग ग्रुप, अनुभवी शिक्षको और एवं उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध हैं।

ऐसी ही कहानी मध्य प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी प्रियंका शुक्ला की है। मंहगी कोचिंग के बाद भी जब वह सफल नहीं हो सकी तो उन्होंने जामिया आरसीए का रुख किया। आरसीए में आने के बाद वर्ष 2018 में वह कामयाब हुईं और सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 109 रैंक हासिल किया।

जामिया की कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर ने कहा कि वह सभी सफल उम्मीदवारों को उनकी सफलता के लिए बधाई देती हैं।

जामिया आरसीए का एक छात्र ऐसा भी है जिसने अपनी स्कूली शिक्षा मदरसे से शुरू की। आज वह पूर्व छात्र शिक्षा के क्षेत्र में एक शानदार स्टार्टअप चला रहे हैं। शमशाद आलम नामक यह छात्र मूलत छपरा बिहार से हैं। इन्होंने भी जामिया आरसीए से पढ़ाई की। जामिया से ही ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की। लेकिन इनका रुझान नौकरी की बजाय लोगों को शिक्षित करने और रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर रहा।

शमशाद बताते हैं कि उन्होंने अरुणाचल में एडुआंचल नाम से अपना एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन शुरू किया है। अरुणाचल के अलग-अलग हिस्सों में फिलहाल इसकी तीन शाखाएं हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के साथ समन्वय के जरिए इन इंस्टीट्यूशंस में स्किल डेवलपमेंट, वर्कशॉप, कम्युनिकेशन स्किल की ट्रेनिंग दी जा रही है।

--आईएएनएस

जीसीबी/आरजेएस

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