पाक के नए सीओएएस नियुक्ति को लेकर सब कुछ ठीक नहीं

पाक के नए सीओएएस नियुक्ति को लेकर सब कुछ ठीक नहीं
पाक के नए सीओएएस नियुक्ति को लेकर सब कुछ ठीक नहीं इस्लामाबाद, 22 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में, सबसे महत्वपूर्ण फैसला जो सभी राजनीतिक, विश्लेषणात्मक और संबंधित हलकों (घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों) का केंद्र बिंदु बन गया है, वह नए सेनाध्यक्ष (सीओएएस) की नियुक्ति है।

भले ही नियुक्ति की पूरी प्रक्रियास्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) है और देश के संविधान के माध्यम से कानूनी तौर पर होती है। लेकिन मौजूदा सरकार, इमरान खान का कड़ा विरोध और उनकी स्ट्रीट पावर (सड़क पर मार्च) को लेकर परेशान है। इमरान नए सेना प्रमुख की नियुक्ति को लेकर लगातार हमलावर हैं, नियुक्ति को लेकर खुली सार्वजनिक बहस, आलोचना और सोशल मीडिया भरा हुआ है।

वर्तमान स्थिति के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री, जिन्हें संसद में संयुक्त विपक्ष द्वारा अविश्वास मत के माध्यम से सत्ता से बेदखल कर दिया गया था, देश में जल्द चुनाव की मांग करते हुए लाहौर से इस्लामाबाद की ओर एक सरकार विरोधी लंबे मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं। इमरान खान लगातार वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा नए सेना प्रमुख की नियुक्ति पर सवाल उठा रहे हैं और मौजूदा गठबंधन सरकार को हटाने के लिए शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

पंजाब के वजीराबाद में लंबे मार्च के दौरान इमरान खान पर हमला हुआ था, इस हमलें में इमरान खान के पैर में गोली लग गई थी और उनकी जिंदगी बाल-बाल बच गई थी, इसके बाद खान लाहौर में अपने आवास पर रह रहे हैं और वीडियो लिंक के माध्यम से अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे हैं। उनका मार्च इस्लामाबाद की ओर लगातार बढ़ रहा है। पीटीआई के अध्यक्ष ने अपने समर्थकों से शनिवार तक रावलपिंडी पहुंचने का आह्वान किया है, वह रावलपिंडी में मार्च में शामिल होंगे।

दिलचस्प बात यह है कि रावलपिंडी में उनके आगमन का समय नए सेना प्रमुख की नियुक्ति के साथ मेल खा रहा है, जिनके चयन की प्रक्रिया सोमवार से ही शुरू हो चुकी है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पुष्टि की कि नए सीओएएस की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है, यह कहते हुए कि घोषणा 26 या 27 नवंबर तक की जाएगी, उसी तारीख को जब रावलपिंडी में खान का लॉन्ग मार्च आयोजित किया जाएगा।

नए सीओएएस की नियुक्ति के लिए एसओपी के अनुसार, रावलपिंडी में जनरल मुख्यालय (जीएचक्यू) रक्षा मंत्रालय को सभी उम्मीदवारों (थ्री स्टार जनरल) के विवरण के साथ एक डोजियर भेजता है। डोजियर संदर्भ के लिए उम्मीदवार के सभी विवरण, इतिहास, साख और सभी रिकॉर्ड रखता है। इसके बाद मंत्रालय सारांश के रूप में डोजियर को प्रधानमंत्री हाउस को भेजता है। इसके बाद देश का अगला सेना प्रमुख कौन होगा, यह तय करना प्रधानमंत्री का एकतरफा फैसला होता है। हालांकि, प्रक्रिया पहले से ही लचकी दिख रही है क्योंकि नियुक्ति के लिए पहला कदम अभी भी लंबित है क्योंकि जीएचक्यू ने अभी तक रक्षा मंत्रालय को डोजियर नहीं भेजा है।

और भ्रम को और बढ़ाने के लिए, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को अपने बयान से पीछे हटना पड़ा कि नए सीओएएस के लिए सारांश प्रधानमंत्री के पास विचार के लिए भेजा गया था, सोमवार सुबह दिए गए बयान का आसिफ ने खंडन किया था, उन्होंने कहा कि प्रक्रिया शुरू हो गई, हालांकि सारांश अभी तक स्थानांतरित नहीं किया गया। यह भी माना जा रहा है कि लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर के नाम पर खान लगातार और निरंतर चिंता जता रहे हैं, जो न केवल सम्मान धारक तलवार हैं बल्कि अपनी वरिष्ठता के कारण सीओएएस के उम्मीदवारों के बीच शीर्ष स्थान रखते हैं, पूर्व प्रधानमंत्री नहीं चाहते कि उन्हें नया सेना प्रमुख बनाया जाए, उन्हें डीजीआईएसआई के रूप में अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था।

कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि क्योंकि लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर 27 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, इसलिए सेना के रैंकों के भीतर इस बात पर विचार चल रहा है कि मुनीर को सेना प्रमुख नहीं बनाया जाना चाहिए। अन्य सूत्रों का कहना है कि मुनीर वर्तमान में एक तीन सितारा जनरल हैं, लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति से पहले, उन्हें च्पदोन्नत किया जाएगा और फिर सीओएएस बनाया जाएगा।

आलोचनात्मक नियुक्ति से जुड़े राजनीतिक नेताओं की संवेदनशीलता पर किए जा रहे कयासों और विश्लेषणों के साथ ये सभी अटकलें अधिक से अधिक गति प्राप्त कर रही हैं। यही वजह है कि यह कहना गलत नहीं होगा कि जब देश के सबसे ताकतवर व्यक्ति- सेना प्रमुख- की नियुक्ति की बात आती है, तो पाकिस्तान में सब कुछ ठीक नहीं है।

--आईएएनएस

केसी/एएनएम

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