बंबई हाईकोर्ट ने बंद कमरे में कार्यवाही की मांग वाली तेजपाल की याचिका खारिज की

बंबई हाईकोर्ट ने बंद कमरे में कार्यवाही की मांग वाली तेजपाल की याचिका खारिज की
बंबई हाईकोर्ट ने बंद कमरे में कार्यवाही की मांग वाली तेजपाल की याचिका खारिज की पणजी, 24 नवंबर (आईएएनएस)। तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ 2013 के दुष्कर्म मामले में बंबई उच्च न्यायालय ने वह याचिका बुधवार को खारिज कर दी, जिसमें अपील की कार्यवाही बंद कमरे में करने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति रेवती डेरे और न्यायमूर्ति एम.एस. जावलकर ने एक आदेश में कहा, तेजपाल के वकील अमित देसाई द्वारा दायर आवेदन को इस कारण से खारिज कर दिया गया कि हम कार्यवाही की अलग से लिखित रूप में रिकॉर्डिग करेंगे।

तेजपाल ने उच्च न्यायालय से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 327(2) के तहत राहत मांगी थी। उनकी याचिका में कहा गया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376ए, 376बी, 376सी या 376डी के तहत दुष्कर्म के मामले में पूछताछ और मुकदमे की कार्यवाही बंद कमरे में की जाए।

गोवा सरकार ने इस साल की शुरुआत में एक निचली अदालत द्वारा तेजपाल को उनके कनिष्ठ सहयोगी द्वारा दायर दुष्कर्म मामले में बरी करने के खिलाफ अपील की थी, जिसने पूर्व संपादक पर 2013 में गोवा में एक पांच सितारा रिसॉर्ट में दो बार कथित रूप से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।

मामले को बंद कमरे तक सीमित रखने का आग्रह करते हुए तेजपाल के वकील देसाई ने कहा कि गोवा सरकार द्वारा दायर अपील को एक जांच माना जा सकता है और इसलिए यह सीआरपीसी की धारा 327 के दायरे में आती है।

देसाई ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया, क्योंकि धारा 327 का उद्देश्य शिकायतकर्ता और आरोपी की प्रतिष्ठा की रक्षा करना है। प्रतिष्ठा एक मौलिक अधिकार है और अब (न्यायसंगत) वैधानिक दायित्व नहीं है।

राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि बंद कमरे में सुनवाई की याचिका सीआरपीसी धारा के तहत कवर नहीं की जा सकती।

मेहता ने कहा, अपील न तो जांच है और न ही मुकदमा। फैसला सुनाए जाने के बाद सुनवाई खत्म हो जाती है। धारा 327 जांच और मुकदमे तक सीमित है।

हाईकोर्ट ने अपील मामले की सुनवाई 6 दिसंबर को निर्धारित की है। तेजपाल ने बुधवार को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए समय मांगा।

--आईएएनएस

एसजीके/एएनएम

Share this story