विधानसभा स्थगन के बाद सपा के सदस्य करते रहे प्रदर्शन, आश्वासन के बाद किया समापन

विधानसभा स्थगन के बाद सपा के सदस्य करते रहे प्रदर्शन, आश्वासन के बाद किया समापन
विधानसभा स्थगन के बाद सपा के सदस्य करते रहे प्रदर्शन, आश्वासन के बाद किया समापन लखनऊ, 20 सितंबर (आईएएनएस)। यूपी विधानसभा सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को स्थागन के बाद भी विशेषाधिकार के हनन हवाला देकर धरने पर बैठ गए। काफी देर तक नारेबाजी चलती रही। इसके बाद ससंदीय कार्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के आश्वासन के बाद धरने को समाप्त कर दिया।

सपा विधायकों की मांग थी कि सोमवार को विधायकों को विधानसभा में आने से रोकने वाले पुलिस अधिकारियों को सदन में बुलाकर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों द्वारा विधायकों को रोका जाना उनके विशेषाधिकार का हनन है।

गौरतलब हो कि सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अगुवाई में सपा के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने पैदल मार्च निकाला था। उन्हें पुलिस ने यह कहते हुए रोक दिया था कि प्रशासन से इसकी इजाजत नहीं ली गई थी। इसे लेकर मंगलवार को समाजवादी पार्टी ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया और कहा कि विधायकों को रोके जाने के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को सदन में बुलाकर कार्रवाई की जाए। जब उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह वेल में आ गए और प्रदर्शन करने लगे।

मुख्य सचेतक सपा के मनोज पांडेय ने बताया कि समाजवादी पार्टी ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था, जिस पर सरकार ने कोई करवाई नहीं हुई। इसे लेकर विधायकों ने प्रदर्शन किया गई। बाद में विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्यमंत्री के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हो गया।

इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होते नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव सहित सपा रालोद के सदस्य सदन की सारी कार्यवाही रोककर प्रदेश की ध्वस्त स्वास्थ्य सेवाओं के मुददे पर चर्चा कराए जाने की मांग को लेकर वेल में आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सपा के सदस्य सदन की कार्यवाही रोककर इसी मु²दे पर चर्चा कराए जाने की मांग कर रहे थे। विधानसभाध्यक्ष सतीश महाना द्वारा प्रश्नकाल के पश्चात इस मुद्दे पर चर्चा कराने का आश्वासन देने के बाद सपा के सदस्य शांत हुए और अपने स्थान पर गए। प्रश्नकाल के बाद इसी मु²दे पर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के किए जा रहे सारे दावे हवाहवाई है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री तो छापामार मंत्री बनते जा रहे हैं। मंत्री के छापे का भी असर नहीं हो रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सभी जांचें महंगी कर दी गई है। भाजपा ने कहा था कि कई एम्स बनाएंगे लेकिन अपना घोषणा पत्र भी पलट कर नहीं देखा।

इसके जवाब में मुख्यमत्री ने कहा कि 2012-2017 से बीच सपा सरकार के दौरान सबसे ज्यादा इंसेफलाटिस से सबसे बच्चों की मौते हुई। मरने वाले बच्चों में अधिकांश अल्पसंख्यक दलित और पिछडे वर्ग के बच्चे थे। सपा सरकार के दौरान कोई पीडित परिवार में किसी के आंसू पोछने नहीं गया। जिस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेता प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब दे रहे थे उस समय सदन में डिप्टीसीएम ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे।

--आईएएनएस

विकेटी/एएनएम

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