शिवसेना सांसद संजय राउत को गुरुवार तक ईडी की हिरासत में भेजा गया (लीड-1)

शिवसेना सांसद संजय राउत को गुरुवार तक ईडी की हिरासत में भेजा गया (लीड-1)
शिवसेना सांसद संजय राउत को गुरुवार तक ईडी की हिरासत में भेजा गया (लीड-1) मुंबई, 1 अगस्त (आईएएनएस)। यहां की एक विशेष अदालत ने सोमवार को पात्रा चॉल भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत को तीन दिन के लिए गुरुवार तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया।

ईडी द्वारा सोमवार की सुबह यहां से गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटे बाद विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश एम. जी. देशपांडे के समक्ष राउत को पेश किया गया था, जिसके बाद देशपांडे ने यह आदेश सुनाया।

ईडी के विशेष वकील हितेन वेनेगांवकर ने जहां आठ दिन की हिरासत मांगी, वहीं राउत के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंदरगी ने अपने मुवक्किल की स्वास्थ्य समस्याओं सहित विभिन्न आधारों पर इसका विरोध किया, जो हृदय रोगी हैं।

वेनेगांवकर ने तर्क दिया कि राउत जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और इसलिए उनसे हिरासत में पूछताछ आवश्यक है और एजेंसी पात्रा चाल घोटाले और संबंधित मुद्दों के अन्य पहलुओं की जांच करना चाहती है।

उन्होंने तर्क दिया कि सह-आरोपी प्रवीण राउत केवल एक फ्रंट-मैन थे और पात्रा चॉल घोटाले से संबंधित सभी सौदे संजय राउत द्वारा किए गए थे।

ईडी की दलीलों का विरोध करते हुए मुंदरगी ने कहा कि राउत की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है और उन्होंने अपने मुवक्किल के लिए न्यूनतम हिरासत की गुहार लगाई।

उन्होंने कहा, वह एक मरीज हैं, दिल से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं और उनकी सर्जरी हुई है और इससे संबंधित सभी मेडिकल पेपर अदालत को सौंप दिए गए हैं।

वेनेगांवकर ने दावा किया कि प्रवीण राउत को एचडीआईएल से 112 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसमें से 1.6 करोड़ रुपये संजय राउत को हस्तांतरित (ट्रांसफर) किए गए थे, जिसकी जांच की जरूरत है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्रवीण राउत ने अलीबाग और रायगढ़ में जमीन की खरीद में भी संजय राउत के फ्रंट-मैन के रूप में काम किया और दोनों एक-दूसरे के करीब थे और कई विदेशी दौरों आदि पर गए थे।

ईडी ने आगे आरोप लगाया कि राउत ने एक गवाह (एक महिला) को धमकाया है और वह केवल एक बार जांच के लिए पेश हुए, जबकि उन्होंने दो अन्य समन को दरनिकार कर दिया। एजेंसी ने कहा कि इस प्रकार से वह जांचकर्ताओं के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं।

जवाब में, मुंदरगी ने कहा कि रिमांड आवेदन में सूचीबद्ध आरोप अस्पष्ट हैं और राजनीतिक प्रतिशोध से उपजे हैं, क्योंकि मामला 2018 का है, लेकिन अब बदले हुए राजनीतिक परि²श्य के कारण इसे उठाया जा रहा है।

ईडी की असहयोग की दलील पर मुंदरगी ने कहा कि राउत ने ईडी को पहले ही सूचित कर दिया था कि वह चुनाव में शामिल हैं, वह नई दिल्ली में हैं और जांच से भाग नहीं रहे हैं, क्योंकि वह संसद की कार्यवाही में भाग ले रहे हैं।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, विशेष न्यायाधीश देशपांडे ने ईडी की 8 दिनों की हिरासत की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि 4 अगस्त तक हिरासत पर्याप्त होगी।

उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि 8 दिनों की इतनी लंबी हिरासत जरूरी नहीं है.. मेरा मानना है कि आरोपी (राउत) को चार अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया जाए, जो जांच के लिए पर्याप्त होगा।

कोर्ट ने राउत के दिल की बीमारी और उनकी सर्जरी का संज्ञान लेते हुए कहा कि हिरासत के दौरान देर रात तक पूछताछ करने के बजाय उन्हें थोड़ा आराम दिया जा सकता है।

इसने राउत को सुबह अपनी कानूनी टीम से मिलने की भी अनुमति दी है और उनके स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए ईडी रात 10 बजे के बाद उनसे पूछताछ नहीं करेगी।

ईडी कथित मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है, जिसका पता एचडीआईएल की सहायक कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पात्रा चॉल के पुनर्विकास में लगाया गया था।

जबकि गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड में एक पूर्व निदेशक प्रवीण राउत को पहले गिरफ्तार किया गया था, ईडी ने अप्रैल में संजय राउत की पत्नी वर्षा की 11 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति भी कुर्क किया था।

ईडी ने 1 जुलाई को संजय राउत को तलब किया था और 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी और फिर उन्हें तीन बार फिर से बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने 7 अगस्त तक का समय मांगते हुए समन को दरकिनार कर दिया था।

ईडी ने 31 जुलाई को भोर में राउत के भांडुप बंगले पर छापा मारा और उनसे नौ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई।

बाद में, उन्हें एजेंसी के कार्यालयों में हिरासत में ले लिया गया, जिससे पहले 7 घंटे से अधिक समय तक फिर से उनसे पूछताछ की गई। इसके बाद एजेंसी के अधिकारियों ने अंत में सोमवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

--आईएएनएस

एकेके/एएनएम

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