संविधान में तय हैं सभी अंगों के अधिकार, किसी को भी नहीं करना चाहिए दूसरे के क्षेत्राधिकार का उल्लंघन- लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला

संविधान में तय हैं सभी अंगों के अधिकार, किसी को भी नहीं करना चाहिए दूसरे के क्षेत्राधिकार का उल्लंघन- लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला
संविधान में तय हैं सभी अंगों के अधिकार, किसी को भी नहीं करना चाहिए दूसरे के क्षेत्राधिकार का उल्लंघन- लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला नई दिल्ली , 25 नवंबर ( आईएएनएस )। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि भारतीय संविधान में सभी अंगों के अधिकार तय हैं और देश के किसी भी अंग को दूसरे के क्षेत्राधिकार का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। संसद के केन्द्रीय कक्ष में भारतीय संसदीय समूह के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय विधि छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक प्रावधान के बारे में बोलते हुए कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने परिकल्पना की थी कि राज्य के सभी अंग देशवासियों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होने जोर देते हुए कहा कि राज्य के प्रत्येक अंग को दूसरों के क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किए बिना संवैधानिक प्रावधानों के भीतर रहकर ही कार्य करना चाहिए।

लोक सभा अध्यक्ष ने एक राष्ट्र - एक मंच के प्रस्ताव के अंतर्गत देश भर में सभी विधायी प्रक्रियाओं को एक मंच पर लाने की बात कहते हुए कहा कि सभी देशवासियों को नवीनतम तकनीकों का उपयोग करते हुए सार्थक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होने कहा कि जैसे-जैसे भारत का विकास हो रहा है, वैसे-वैसे इसके साथ ही दुनिया का विकास भी हो रहा है ।

राष्ट्रीय विधि छात्र सम्मेलन को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि हमारा संविधान अधिकारों और कर्तव्यों का अनूठा मिश्रण है। आज जब हम स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का समारोह मना रहे हैं तो भारत के युवाओं को अपने मूल कर्तव्यों की पूर्ति के लिए राष्ट्र हित में अपने आपको पुन: समर्पित कर देना चाहिए।

राज्य सभा उपसभापति हरिवंश ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान सभा वाद-विवाद जानकारी का समृद्ध भंडार है। उन्होने भी राज्य के तीनों अंगों के बीच सूक्ष्म संतुलन की बात कहते हुए कहा कि प्रत्येक अंग को एक दूसरे की शक्तियों और कार्यों का सम्मान करना चाहिए। कानूनों को सही समय पर बनाने और लगातार समीक्षा करते रहने की वकालत करते हुए राज्य सभा के उपसभापति ने कहा कि कानूनों को उचित समय पर बनाया जाना चाहिए, नियमित रूप से इनकी समीक्षा की जानी चाहिए और अप्रचलित और बेमानी होने पर इन्हें समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजीजू ने भी शक्तियों के पृथक्करण से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के बारे में बोलते हुए कहा कि हमारी संवैधानिक व्यवस्था का संतुलन बहुत नाजुक है, इसलिए राज्य के सभी अंगों को संविधान द्वारा परिभाषित सीमाओं के भीतर रहकर कार्य करना चाहिए। किसी भी अंग को दूसरे की शक्तियों का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान सर्वोच्च है, लेकिन संप्रभुता लोगों के पास है और संविधान जनाभिव्यक्ति का प्रतीक है।

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्य सभा उपसभापति हरिवंश एवं केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजीजू के अलावा कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय समिति के सभापति सुशील कुमार मोदी, विदेश मामलों संबंधी स्थायी समिति के सभापति पी.पी. चौधरी, राज्य सभा सदस्य और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे भी इस सम्मेलन में शामिल हुए ।

--आईएएनएस

एसटीपी/एएनएम

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