संसद के ठीक से काम न करने की जिम्मेदारी तय करने को लेकर बंटे भारतीय : आईएएनएस सर्वे

संसद के ठीक से काम न करने की जिम्मेदारी तय करने को लेकर बंटे भारतीय : आईएएनएस सर्वे
संसद के ठीक से काम न करने की जिम्मेदारी तय करने को लेकर बंटे भारतीय : आईएएनएस सर्वे नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। 18 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। सत्र के दौरान संसद का कामकाज बेहद कम रहा है।

संसद के दोनों सदनों में मूल्य वृद्धि, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से पूछताछ, ईडी द्वारा शिवसेना नेता संजय राउत की गिरफ्तारी जैसे विभिन्न मुद्दों पर व्यवधान और कई बार स्थगन देखा गया है।

कथित कदाचार के कारण, विपक्षी सांसदों को 26 जुलाई को राज्यसभा से एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया था, इसके एक दिन बाद कांग्रेस के चार सांसदों को शेष मानसून सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया। मौजूदा सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों का कामकाज रिकॉर्ड कम रहा है।

संसद के कामकाज पर नजर रखने वाले पोर्टल पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा ने 1 अगस्त तक लगभग 23 घंटे काम किया है, राज्यसभा सिर्फ 13 घंटे ही काम कर पाई। संसद के ठीक से काम नहीं करने के लिए विपक्ष और सत्तारूढ़ दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

सीवोटर-इंडियाट्रैकर ने इस मुद्दे पर लोगों की राय जानने के लिए आईएएनएस की ओर से एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण में पाया गया कि संसद के ठीक से काम नहीं करने के लिए कौन जिम्मेदार है, इस पर लोगों की राय बंटी हुई नजर आई। सर्वेक्षण के दौरान, जहां 51 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने संसद के अपने कामकाज को प्रभावी ढंग से संचालित करने में सक्षम नहीं होने के लिए विपक्ष को दोषी ठहराया, वहीं 49 प्रतिशत ने सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया।

इस मामले पर एनडीए और विपक्षी मतदाताओं के विचारों में राजनीतिक और वैचारिक विभाजन स्पष्ट था। सर्वेक्षण के दौरान, एनडीए के 66 प्रतिशत मतदाताओं ने संसद के दोनों सदनों के कामकाज में बाधा डालने वाले व्यवधानों और कई स्थगनों के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, 60 फीसदी विपक्षी मतदाताओं ने लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग मुद्दों पर गतिरोध के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

सर्वेक्षण में इस मुद्दे पर विभिन्न सामाजिक समूहों की राय में अंतर का पता चला। सर्वेक्षण के दौरान, अधिकांश मुसलमानों- 74 प्रतिशत और अनुसूचित जाति (एससी)- 65 प्रतिशत ने संसद की कम उत्पादकता के लिए सरकार को दोषी ठहराया, अधिकांश उच्च जाति के हिंदुओं (यूसीएच)- 69 प्रतिशत और अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी)- 63 फीसदी ने विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया

--आईएएनएस

एसकेके/एसकेपी

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