सीयूईटी पर सुप्रीम कोर्ट जाएगा सेंट स्टीफंस कॉलेज, अन्य संस्थानों पर नहीं पड़ेगा प्रभाव: यूजीसी

सीयूईटी पर सुप्रीम कोर्ट जाएगा सेंट स्टीफंस कॉलेज, अन्य संस्थानों पर नहीं पड़ेगा प्रभाव: यूजीसी
सीयूईटी पर सुप्रीम कोर्ट जाएगा सेंट स्टीफंस कॉलेज, अन्य संस्थानों पर नहीं पड़ेगा प्रभाव: यूजीसी नई दिल्ली 21 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रसिद्ध सेंट स्टीफंस कॉलेज सीयूईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा। यूजीसी का कहना है कि सेंट स्टीफन कॉलेज के सुप्रीम कोर्ट जाने से अन्य शिक्षण संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। वहीं यदि अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की बात की जाए तो जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने सीयूईटी को अपनी स्वीकृति दी है।

जामिया ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से कई स्नातक पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) को लागू करने का फैसला किया है।

अंडर ग्रेजुएट एडमिशन में सीयूईटी यानी कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर जामिया विभिन्न पाठ्यक्रमों में सहमति दे चुका है। विश्वविद्यालय ने अपनी सहमति के बारे में यूजीसी और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को भी सूचना दी है।

बीते दिनों दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में स्टीफंस को सीयूईटी का पालन करने को कहा है। दरअसल सेंट स्टीफंस कॉलेज ने सीयूईटी को 85 प्रतिशत और इंटरव्यू को 15 प्रतिशत वेटेज देने का निर्णय लिया था लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद स्टीफंस कॉलेज की गवनिर्ंग बॉडी ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि इससे कॉलेज की दाखिला प्रक्रिया में कुछ विलंब हो सकता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के अनुसार सेंट स्टीफंस कॉलेज का यह विवाद सीयूईटी प्रवेश प्रक्रिया को व्यापक रूप से प्रभावित नहीं करेगा, क्योंकि डीयू के अन्य सभी कॉलेजों ने इस प्रक्रिया को अपनी पूर्ण मान्यता दी है। यूजीसी चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार के मुताबिक सीयूईटी को अपनाते समय सभी विश्वविद्यालयों की अपनी प्रवेश नीतियां रही हैं। इसलिए अन्य संस्थानों में एडमिशन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होना चाहिए।

सेंट स्टीफंस कॉलेज की गवनिर्ंग बॉडी में शामिल तीन शिक्षकों और विश्वविद्यालय के दो प्रतिनिधियों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर असहमति जताई है। हालांकि गवनिर्ंग बॉडी के शेष 12 सदस्य इस कदम पर सहमत है, जिसके आधार पर गवनिर्ंग बॉडी ने यह फैसला लिया है।

अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में एडमिशन को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय और सेंट स्टीफंस कॉलेज में भी मतभेद हैं। यह मतभेद साक्षात्कार आयोजित करने को लेकर हैं। विश्वविद्यालय चाहता है कि सेंट स्टीफंस कॉलेज भी शेष अन्य कॉलेजों की ही तरह सीयूईटी के रिजल्ट के आधार पर छात्रों को कॉलेज में दाखिला दे।

दिल्ली विश्वविद्यालय स्पष्ट कर चुका है कि सीयूईटी प्रक्रिया पालन न करने पर सेंट स्टीफंस कॉलेज द्वारा लिए गए दखिलों को दिल्ली विश्वविद्यालय मान्यता नहीं देगा। विश्वविद्यालय का कहना है कि एक ही विश्वविद्यालय के कॉलेज एडमिशन के लिए अलग-अलग नियम नहीं अपना सकते।

दरअसल सेंट स्टीफंस कॉलेज का स्टैंड रहा है कि वह संविधान द्वारा दिए गए विशेषाधिकारों से समझौता किए बिना वह सीयूईटी का पालन करेंगे। कॉलेज ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का भी हवाला दिया था कि एक अल्पसंख्यक संस्थान के रूप में सेंट स्टीफंस की अपनी प्रवेश प्रक्रियाएं हैं जो संविधान द्वारा गारंटीकृत है।

डीयू में इस बार दाखिले कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) स्कोर के माध्यम से हो रहे हैं। विश्वविद्यालय के अंतर्गत लगभग 80 विभाग हैं जहां स्नातकोत्तर डिग्री ,पीएचडी, सर्टिफिकेट कोर्स, डिग्री कोर्स आदि कराएं जाते हैं। इसी तरह से दिल्ली विश्वविद्यालय में तकरीबन 79 कॉलेज है जिनमे स्नातक, स्नातकोत्तर की पढ़ाई होती है। इन कॉलेजों व विभागों में हर साल स्नातक स्तर पर विज्ञान, वाणिज्य व मानविकी विषयों में 70 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के प्रवेश होते हैं। विश्वविद्यालय का कहना है कि सभी कॉलेजों में दाखिले केवल सीयूईटी के स्कोर के आधार पर होंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि अगर सेंट स्टीफंस कॉलेज सीयूईटी का पालन नहीं करेगा तो यहां किए जाने वाले एडमिशन अमान्य करार दिए जा सकते हैं। इंटरव्यू के आधार पर एडमिशन हासिल करने वाले छात्रों की डिग्री को भी दिल्ली विश्वविद्यालय मान्यता देने से इनकार कर सकता है।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएनएम

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