स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन

स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन
स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन नई दिल्ली, 11 जनवरी (आईएएनएस)। युवाओं में स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं के सार को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से, भाजपा युवा विंग एक राष्ट्रव्यापी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है।

प्रतिभागियों के पास अंग्रेजी, बंगाली, हिंदी, मराठी, तमिल, कन्नड़, मलयालम, तेलुगु, असमिया, पंजाबी, उड़िया या गुजराती में निबंध लिखने का विकल्प है।

इस आयोजन में 35 वर्ष की आयु तक के लोग भाग ले सकते हैं। ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जनवरी है और परिणाम 23 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।

भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) के अनुसार, निबंध प्रतियोगिता देश की आजादी के 75 वर्ष को चिह्न्ति करने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव उत्सव का हिस्सा है।

भाजयुमो ने कहा, देश के सच्चे सपूतों को याद करने की अपनी गौरवशाली परंपरा को जारी रखते हुए, भाजयुमो द्वारा स्वामी विवेकानंद की जयंती पर एक राष्ट्रीय निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम स्वामी जी की स्मृति में और उनकी शिक्षाओं के सार को युवाओं में लोकप्रिय बनाने के लिए शुरू किया गया है।

प्रतिभागी 2000 शब्दों के निबंध के लिए सात विषयों में से चुन सकते हैं। प्रतिभागी सात विषयों में से किसी एक को चुन सकते हैं, जैसे- स्वामी विवेकानंद और युवाओं के लिए उनका संदेश, स्वामी विवेकानंद और शिक्षा, स्वामी विवेकानंद और सामाजिक न्याय, स्वामी विवेकानंद और हिंदू आधुनिकता, स्वामी विवेकानंद और महिला अधिकारिता, स्वामी विवेकानंद और अंतर्राष्ट्रीयता और स्वामी विवेकानंद और भारत के लिए उनका ²ष्टिकोण।

भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कहा, स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के अग्रणी साधु, विचारक, दार्शनिक, समाज सुधारक और युवा प्रतीक थे। भाजयुमो का मानना है कि आज के युवाओं को स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को आत्मसात करना चाहिए और उनके सत्य के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से, हम उम्मीद कर रहे हैं कि युवा स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लें और राष्ट्र की सेवा के लिए काम करें।

विजेता निबंध भाजयुमो राष्ट्रीय पत्रिका और इसकी वेबसाइट पर भी प्रकाशित किए जाएंगे।

--आईएएनएस

एसकेके/आरजेएस

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