कतर ने भारतीय नौसेना को क्यों छोड़ा | Duniya Me Bharat Ki Kya Pahchan Hai?

duniya me bharat ki kya pahchan hai

Bhartiya Sena Ka Videshon Me Kya Sambandh Hai

भारत की असली पहचान क्या है?

Bharat Ke Videsh Sambandh Kya Hai

हमारे देश की मौजूदा विदेश नीति क्या कमाल कर रही है इसका एक ताजा उदाहरण देखने को उस वक्त मिला, जब कतर ने भारतीय नौसेना के उन आठ पूर्व कर्मियों को रिहा कर दिया, जिन्हें जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी.

 वो तीन वजहें जिनकी बदौलत कतर से रिहा होकर भारत लौट आए, मौत की सजा पाए भारतीय नागरिक

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कतर के इस फैसले पर खुशी जाहिर की है. मौत की सजा पाने वाले नौसेना के सभी 8 पूर्व अधिकारियों को रिहा कर दिया गया है. जिनमें से 7 लोग भारत वापस भी आ चुके हैं. और भारत की धरती पर कदम रखते ही उन्होंने जान बचाने का पूरा श्रेय यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया. यकीनन देना भी चाहिए. क्योंकि सही मायने में ये नामुमकिन काम पीएम मोदी की कोशिशों के चलते ही मुमकिन हुआ है. अभी लगभग 2 महीना पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई में COP28 शिखर सम्मेलन के दौरान कतर के अमीर के साथ मुलाकात की थी, जिसके बाद इन भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए बातचीत शुरू हुई. वो बात और है कि न तो कतर के अमीर की तरफ से और न ही पीएम मोदी की तरफ से आधिकारिक तौर पर भारतीय नागरिकों की रिहाई को लेकर कुछ भी कहा गया. लेकिन इतना तो जरूर समझा गया कि इस मुलाकात में भारतीय नागरिकों को दी गई सज़ा पर ज़रूर बातचीत हुई होगी.

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विश्व में भारत की पहचान क्या है?

यूं तो भारत और कतर के संबंध काफी गहरे हैं क्योंकि 7 से 8 लाख भारतीय कतर में काम करते हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से दोनों देशों के रिश्ते में खटास आ गई थी. और इसकी सबसे बड़ी वजह थीं नूपुर शर्मा. नूपुर शर्मा उस वक्त सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता थीं जो न्यूज़ चैनलों में अपनी पार्टी का पक्ष पूरे बेबाक अंदाज में रखती थीं. लेकिन यही बेबाकी उनको ले डूबी जब उन्होंने पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ अभद्र बयान दे डाले. उनका अभद्र बयान पूरी दुनिया में वायरल हुआ जिसके बाद मुस्लिम देशों से भारत के संबंध बिगड़ना शुरू हो गए. और कतर वो सबसे पहला मुस्लिम देश था जिसने भारत को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने को कहा था. भारतीय जनता पार्टी ने नूपुर शर्मा को फौरन पार्टी से बर्खास्त कर दिया था. कतर के साथ भारत के रिश्ते उस वक्त और बिगड़ गए जब कतर की एक अदालत ने 26 अक्टूबर, 2023 को भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों को जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी जिसे लेकर भारत ने कहा था कि वह फैसले से “गहरा झटका” लगा है और वो सभी कानूनी विकल्प तलाश रहा है. भारत ने भारतीयों को मिली मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ दोहा में अपील भी दायर की थी. इसके बाद पिछले साल क़तर ने इन भारतीय नागरिकों की फांसी की सज़ा को कम कर दिया था.

क्या भारतीय सेना के अधिकारी विदेश जा सकते हैं?

अपने नागरिकों को छुड़ाना भारत की सबसे बड़ी चुनौती थी. भारत अच्छी तरह जानता था कि दुनिया भर की निगाहें इस ओर टिकी हुई हैं और अगर भारत के नागरिकों को फांसी दी जाती है तो ये भारत की सबसे बुरी डिप्लोमेटिक हार होगी. लिहाज़ा, फैसला लिया गया कतर के साथ सबसे बड़ी डील करने का. इसी महीने 7 फरवरी को भारत और क़तर के बीच एक अहम समझौता हुआ. यह समझौता अगले 20 सालों के लिए हुआ और इसकी कुल लागत 78 अरब डॉलर की है. अब भारत क़तर से साल 2048 तक लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस यानी एलएनजी ख़रीदेगा. इस समझौते के तहत क़तर हर साल भारत को 7.5 मिलियन टन गैस निर्यात करेगा जो दोनों देशों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा. इतनी बड़ी डील को भी भारतीय नागरिकों को रिहा करने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. वैसे भारतीय नागरिकों को रिहा करने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भी कूटनीतिक शैली का भी जिक्र सामने आ रहा है. बताया जा रहा है कि उन्होंने दोहा की कई चुपचाप बिना चर्चा में आए यात्राएं कीं. मकसद कतरी नेतृत्व को भारतीय दृष्टिकोण को अच्छी तरह से समझाना था. और इसमें अजीत डोभाल कामयाब भी रहे.

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बहरहाल, कतर से मौत की सजा पाए भारतीय नागरिकों का वापस भारत लौट आना भारत की एक बड़ी डिप्लोमेटिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है. और इसके लिए नरेंद्र मोदी की सरकार की जमकर तारीफ हो रही है. लोकसभा चुनाव सिर पर हैं. तो अब ऐसे में इस चुनाव में बीजेपी को इसका पूरा फायदा मिलना यकीनन तय है.

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