Astrological remedies for eye: आंख की बीमारियों का ज्योतिषीय उपाय

Eye
Astrological remedies for eye: ज्योतिष में सूर्य को प्राण तत्व के रूप में बताया गया है।

Astrological remedies for eye: आँख शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। जिसके बिना हमे रंग और रूप का सही आभास नहीं हो पाता है। आंखों की समस्या से अमूमन हर कोई परेशान है। इसकी समस्या कई कारणों से हो सकती है। परंतु, ज्योतिष के मुताबिक मुख्य रूप से  सूर्य और चंद्रमा इसके लिए खास महत्व रखते हैं। इसके अलावा शुक्र की गड़बड़ी से भी आँखों की समस्या होती है। आँखों का कुंडली से भी संबंध है। कुंडली का दूसरा और 12 वां भाव आँखों का होता है। कुंडली का दूसरा भाव दाहिनी आंख और बारहवां भाव बाईं आंख से संबंध रखता है। आगे जानते हैं आँखों की समस्या के लिए ज्योतिष में क्या उपाय बताए गए हैं। 
Astrological remedies for eye

सूर्य को जल (offering water to sun)

ज्योतिष में सूर्य को प्राण तत्व के रूप में बताया गया है। प्राण ऊर्जा आंखों की रौशनी के लिए भी सहायक होता है। ऐसे में सूर्य को पीतल के पात्र से नियमित तौर पर जल दें। अगर सूर्य के मंत्र "ॐ सूर्याय नमः' को बोलते हुए जल देंगे तो लाभकारी होगा। इसके अलावा किसी ज्योतिषी से सलाह लेकर माणिक्य धारण कर सकते हैं।

चाक्षुषी स्तोत्र का पाठ ( what is chakshushi stotra)

आंखों की रोशनी के लिए नियमित रूप से चाक्षुषी स्तोत्र का पाठ लाभकारी बताया गया है। चाक्षुषी स्तोत्र में आंखों के रोगों को दूर करने के लिए सूर्य देवता की स्तुति की गई है। यह स्तोत्र संस्कृत में है, ऐसे में यदि खुद स्पष्ट उच्चारण करने में समर्थ हैं तो सही है अगर नहीं तो किसी योग्य पंडित से कराएं।

चाक्षुषी स्तोत्र (chakshushi stotra)

ॐ चक्षुः चक्षुः चक्षुः तेजः स्थिरो भव। मां पाहि पाहि। त्वरितम् चक्षुरोगान शमय शमय। मम जातरूपम् तेजो दर्शय दर्शय। यथाहम अन्धो न स्यां कल्पय कल्पय। कल्याणम कुरु कुरु। यानि मम पूर्वजन्मोपार्जितानी चक्षुः प्रतिरोधकदुष्क्रतानि सर्वाणि निर्मूलय निर्मूलय। ॐ नमः चक्षुस्तेजोदात्रे दिव्याय भास्कराय। ॐ नमः करुणाकरायामृताय। ॐ नमः सूर्याय। ॐ नमो भगवते सूर्यायाक्षितेजसे नमः। खेचराय नमः। महते नमः। रजसे नमः। तमसे नमः। असतो मां सदगमय। तमसो मां ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। उष्णो भगवाञ्छुचिरूपः। हंसो भगवान शुचिरप्रतिरूपः। य इमां चक्षुष्मतिविद्यां ब्राह्मणो नित्यमधीते न तस्याक्षिरोगो भवति। न तस्य कुल अन्धो भवति। अष्टौ ब्राह्मणान ग्राहयित्वा विद्यासिद्धिर्भवति।

सरसों तेल का दीया

हर शनिवार की शाम पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 

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