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तुलसी विवाह: जानिए तुलसी विवाह की पूजा विधि व रस्में, पूजा मुहूर्त 25 नवंबर को है

तुलसी विवाह के बाद अपने आप गिरे हुए पत्ते प्रसाद रूप में ग्रहण करें

तुलसी विवाह: जानिए तुलसी विवाह की पूजा विधि व रस्में, पूजा मुहूर्त 25 नवंबर को है
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Tulsi vivah vidhi and muhurat image source google

Tulsi Vivah: तुलसी विवाह का एक बहुत बड़ी बात तो है और इसको करने की विधि और शुभ मुहूर्त में किया जाए तो इसका बहुत ही बड़े लाभ होते हैं और जो भी कार्य रुके होते हैं इस दिन विधिवत पूजन करने के बाद में कार्य शुरू हो जाते हैं और यहीं से मांगलिक कार्यों की भी शुरुआत होती है।

किस तरह से करें तुलसी विवाह(Tulsi vivah vidhi)

तुलसी विवाह के लिए तुलसी के पौधे के चारों ओर मंडप बनाना होगा। फिर तुलसी के पौधे को एक लाल चुनरी अर्पित करें। साथ ही सभी श्रृंगार की चीजें भी अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी और शालिग्राम भगवान की पूजा करें। शालिग्राम भगवान की मूर्ति का सिंहासन हाथ लें। फिर इनकी सात परिक्रमा तुलसी जी के साथ कराएं। आरती करें और विवाह के मंगलगीत अवश्य गाएं।

तुलसी विवाह और पूजा :

देवउठनी एकादशी के दिन ही तुलसी विवाह और पूजन किया जाता है। इस दिन तुलसी माता को पूरा श्रृंगार और पूजन सामग्री भेंट में दी जाती है।

देवउठनी एकादशी पूजा :

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को गन्नों से बनाए गए मंडप के नीचे बैठाकर उनकी पूजा की जाती है। इन्हें पूजा में मूली, शकरकंद, सिंघाड़ा, आंवला, बेर आदि फलों का चढ़ावा चढाया जाता है।

देवउठनी एकादशी व्रत :

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उनका व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है, साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूरी हो जाती हैं।

देवउठनी एकादशी में तुलसी विवाह का शुभमुहूर्त :

देवउठनी एकादशी व्रत 25 नवंबर 2020 को बुधवार के दिन पड़ रहा है, एकादशी तिथि 25 नवंबर को 02:42 बजे से आरंभ होगी और 26 नवंबर, 2020 को शाम 05:10 पर समाप्त होगी।

तुलसी विवाह पूजा विधि :

— तुलसी का गमला साफ सुथरा करके गेरू और चूने से रंगकर सजायें।

— साड़ी आदि से सुन्दर मंडप बनाकर गन्ने व फूलों से सजाना चाहिए ।

— परिवार के सभी सदस्य शाम के समय तुलसी विवाह में शामिल होने के लिए नए कपड़े आदि पहन कर तैयार हो जाये।

— तुलसी के साथ शादी के लिए शालिग्राम जी यानि विष्णु जी की काली मूर्ति चाहिए होती है। ये नहीं मिले तो आप अपनी श्रद्धानुसार सोने , पीतल या मिश्रित धातु की मूर्ति ले सकते है या फिर विष्णु जी की तस्वीर भी ले सकते है। यदि कोई व्यवस्था ना हो पाए तो पंडित जी से आग्रह करने पर वे मंदिर से शालिग्राम जी की मूर्ति अपने साथ ला सकते है।

सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें , फिर मंत्रो का उच्चारण करते हुए गाजे बाजे के साथ भगवान विष्णु की प्रतिमा को तुलसी जी के निकट लाकर रखे।

भगवान विष्णु का आवाहन इस मन्त्र के साथ करें

" आगच्छ भगवन देव अर्चयिष्यामि केशव। तुभ्यं दास्यामि तुलसीं सर्वकामप्रदो भव "

_यानि हे भगवान केशव , आइये देव मैं आपकी पूजा करूँगा , आपकी सेवा में तुलसी को समर्पित करूँगा। आप मेरे सभी मनोरथ पूर्ण करना*

तुलसा जी व भगवान विष्णु की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा करके स्तुति आदि के द्वारा भगवान को निद्रा से जगाये।

विष्णु जी को पीले वस्त्र धारण करवाये ,पीला रंग विष्णु जी का प्रिय है।

कांसे के पात्र में दही , घी , शहद रखकर भगवान् को अर्पित करें।

—फिर पुरुष सूक्त से व षोडशोपचार से पूजा करें।_

— तुलसी माता को लाल रंग की ओढ़नी ओढ़ानी चाहिए ।_

—शालीग्राम जी को चावल नहीं चढ़ाये जाते है इसीलिए उन्हें तिल चढ़ाये। दूध व हल्दी का लेप बनाकर शालिग्राम जी व तुलसी जी को चढ़ाये। गन्ने से बनाये गए मंडप की भी दूध हल्दी से पूजा करे।_

— विवाह के समय निभाये जाने वाली सभी रस्मे करें ।_

— तुलसाजी और शालिग्राम जी के फेरे भी करवाने चाहिए।_

— साथ ही "ओम तुलस्यै नमः " मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए।_

— तुलसी माता की शादी के लिए साड़ी , ब्लाउज , मेहंदी , काजल , बिंदी , सिंदूर , चूड़ा आदि सुहाग का सामान तथा बर्तन चढ़ाये।_

— जो भी भोजन बनाया हो वह एक थाली में दो जनो के लिए रखकर फेरो के समय भोग लगाने के लिए रखना चाहिए ।कन्यादान का संकल्प करें और भगवान से प्रार्थना करें– हे परमेश्वर ! इस तुलसी को आप विवाह की विधि से ग्रहण कीजिये। यह पार्वती के बीज से प्रकट हुई है , वृन्दावन की भस्म में स्थित रही है।

आपको तुलसी अत्यंत प्रिय है अतः इसे मैं आपकी सेवा में अर्पित करता हूँ। मैंने इसे पुत्री की तरह पाल पोस कर बड़ा किया है। और आपकी तुलसी आपको ही दे रहा हूँ। हे प्रभु इसे स्वीकार करने की कृपा करें।_

इसके पश्चात् तुलसी और विष्णु दोनों की पूजा करें।

तुलसी माता की कहानी सुने।

तुलसी माता की कहानी के लिए

कपूर से आरती करे तथा तुलसी माता की आरती ( नमो नमो तुलसी महारानी ….) गाएं।

भगवान को लगाए गए भोग का प्रसाद के रूप में वितरण करे।

— सुबह हवन करके पूर्णाहुती करें । इसके लिए खीर , घी , शहद और तिल के मिश्रण की 108 आहुति देनी चाहिए। महिलाये तुलसी माता के गीत गाती है। उसी समय व्रत करने वाली के पीहर वाले कपड़े पहनाते है।

इसी समय शालीग्राम व तुलसी माता को श्रद्धानुसार भोजन परोसकर भोग लगाना चाहिए , साथ में श्रद्धानुसार दक्षिणा अर्पित की जानी चाहिए ।

भगवान से प्रार्थना करें – प्रभु ! आपकी प्रसन्नता के लिए किये गए इस व्रत में कोई कमी रह गई हो तो क्षमा करें। अब आप तुलसी को साथ लेकर बैकुंठ धाम पधारें। आप मेरे द्वारा की गई पूजा से सदा संतुष्ट रहकर मुझे कृतार्थ करें।

इस प्रकार तुलसी विवाह का परायण करके भोजन करें। भोजन में आँवला , गन्ना व बैर आदि अवश्य शामिल करें। भोजन के बाद तुलसी के अपने आप गिरे हुए पत्ते खाएँ , यह बहुत शुभ होता है।

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