देश में बाबरी और ज्ञानवापी जैसे कितने और हैं विवादित धार्मिक स्थल

देश में बाबरी और ज्ञानवापी जैसे कितने और हैं विवादित धार्मिक स्थल
भारत एक आध्यात्मिक देश है अध्यात्म हमारे देश की आत्मा है हमारा देश महान परम्पराओं वाला देश है जिसकी भूमि के हर कण का एक ऐतिहासिक पहलू है जो हर धर्म को अपने भीतर समेटे हुए है और हर धर्म की आस्था भारत से संबद्ध रखती है... भारत ने न केवल कई धर्मों को अपनाया बल्कि ये दुनिया के कई महान धर्मों जैसे हिंदू धर्म, सिख धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म का जन्मस्थान भी है... ये सभी धर्म इस देश की विविधता हैं, लेकिन एक हकीकत ये भी है कि कभी-कभी इन धर्मों का एक साथ होना भारतवासियों के बीच संघर्ष और असंतोष का कारण भी बनता है... 

ये मस्जिदें कभी मंदिर थीं... इन दावों में कितना दम ?

अभी हाल ही में अयोध्या में बने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का बेहद भव्य आयोजन हुआ जो भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था... एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार रामलला मंदिर में विराजमान हुए... इसके अलावा वाराणसी की एक कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर के तहखाने में हिंदुओं को पूजा का अधिकार दे दिया... आपको बता दें कि मुलायम सिंह यादव की सरकार में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाने में पूजा पर रोक लगा दी गई थी... लेकिन इसके लिए भी एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई और आज जब देश और प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन की सरकार है तो इसे लेकर खूब सारे तथ्य इकट्ठा किए गए और आखिरकार कोर्ट ने मान लिया कि हां यहां पर हिंदुओं को पूजा का अधिकार देना चाहिए...

खैर, देश में एक बार फिर 'ये मस्जिद, कभी मंदिर था' के मुद्दे पर बहस हो रही है... देश में हिंदू मुसलमान, मंदिर मस्जिद, 400, 500, 600 या हज़ार साल पहले किसने, कितने मंदिर तोड़े और क्यों, और अब उसका क्या हो - इस पर बहस ज़ोर पकड़ रही है... अचानक अदालतों में याचिकाओं की बाढ़-सी आ गई है... बात सिर्फ अयोध्या की बाबरी और वाराणसी की ज्ञानवापी की ही नहीं है... बल्कि हमारे देश में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जिनको लेकर बड़े विवाद हैं... और अपनी इस रिपोर्ट में हम आपको उन्हीं कुछ विवादित धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं...

मस्जिद कुव्वत-उल-इस्लाम (कुतुबमिनार) दिल्ली

दिल्ली के महरौली में स्थित कुतुब कॉम्पलेक्स दिल्ली सल्तनत की निशानी के तौर पर आज भी मौजूद है... इसे लेकर कहा जाता है कि दिल्ली सल्तनत ने यहां लाल कोट... यानी 27 हिंदू और जैन मंदिर के टूटे-फूटे हुए अवशेषों के ऊपर इस कुतुब कॉम्पलेक्स को बनाया था... कहते हैं कि 739 इसवी में तोमर वंश के अंगपाल और पृथ्वीराज चौहान ने यहां मंदिर बनवाए थे... इस कॉम्पलेक्स में स्थित कुतुब मिनार को कुतुबद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर कुतुब-उ-दीन ऐबक ने बनाया था... जो बाद में ममलुक राजवंश से दिल्ली का पहला सुल्तान भी बना... उसके उत्तराधिकारी इल्तुमिश और बाद में तुगलक राजवंश के सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने 1368 में बाद में यहां मिनार बनाई...

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित केशव देव मंदिर और शाह मस्जिद विवाद भी चोटी के विवादों में आता है... भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर स्थित इस मंदिर को केशव राय मंदिर भी कहा जाता है और करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं इससे जुड़ी हैं... यहां के अराध्य खुद श्रीकृष्ण हैं और माना जाता है करीब 5000 साल पहले उनके पड़पौत्र वज्रनाभ ने ही यहां मंदिर बनवाया था... चंद्रगुप्त द्वितीय के समय भी यहां बड़ा मंदिर बनाया गया था... चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के समय यहां दूसरा मंदिर बनाया गया, जिसे 1017 इसवी में महमूद गजनी ने तहस-नहस कर दिया... इसके बाद सन 1150 में विजय पाल देवा के शासन काल में जज्जा ने यहां तीसरी बार मंदिर बनाया... कहा जाता है कि चैतन्य महाप्रभु ने इसी मंदिर के दर्शन किए थे... चौथी बार ओर्छा के बीर सिंह देव बुंदेला ने मुगल बादशाह जहांगीर के समय यहां 33 लाख रुपये की लागत से एक मंदिर बनवाया... सन 1670 में मुगल बादशाह औरंगजेब ने इस मंदिर पर हमला किया और इसे क्षतिग्रस्त कर दिया... इसके बाद मंदिर के बचे हुए अवशेषों के ऊपर एक मस्जिद का निर्माण कर दिया गया, जिसका नाम शाह मस्जिद रखा गया... करोड़ों लोगों के अराध्य कृष्ण की जन्मभूमि पर आज भी मस्जिद विराजमान है... 

अटाला देव मंदिर, जौनपुर

जौनपुर में अटाला मस्जिद का भी विवादों से गहरा नाता है... इसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण अटाला देव मंदिर के भग्नावेशों पर किया गया है... इस मस्जिद का निर्माण शर्की राजवंश के इब्राहिम नायब बारबक ने करवाया था जो सुल्तान फिरोज शाह तुगलक तृतीय का भाई था... यहां स्थित प्राचीन मंदिर को इब्राहिम ने सन 1364 में तुड़वाया और सन 1377 में यहां मस्जिद का निर्माण शुरू हुआ और 1408 में यह मस्जिद बनकर तैयार हुई... मस्जिद निर्माण से पहले यहां अटाला देवी का मंदिर था और मंदिर तोड़े जाने के बाद देवी मां की पूजा-अर्चना लगभग बंद हो गई... इस मस्जिद की बाहरी दीवारें बदली गई हैं... लेकिन अंदर की दीवारों, पिलरों पर अब भी राजा विजय चंद्र द्वारा बनवाए गए हिंदू मंदिर की छाप साफ दिखायी देती है...

रुद्र महालय मंदिर, बटना (गुजरात)

रुद्र महालाय मंदिर या रुद्रमल मंदिर के भग्नावशेष गुजरात में पाटन जिले के सिद्धपुर में हैं... चौलुक्या राजवंश के मुलाराजा ने इस मंदिर का निर्माण सन 943 में शुरू करवाया था और 1140 में जयसिम्हा सिद्दराजा के कार्यकाल में यह निर्माण पूरा हुआ... पहले अलाउद्दीन खिलजी और बाद में अहमद शाह प्रथम ने 1410 से 1444 के बीच इस मंदिर को अपवित्र कर तुड़वा दिया... यही नहीं मंदिर के कुछ हिस्से को तोड़कर यहां जामा मस्जिद भी बनवा दी गई... मंदिर से जुड़े कई अवशेष आज भी यहां मौजूद मस्जिद में दिखायी देते हैं...

भद्रकाली मंदिर, अहमदाबाद (गुजरात)

अहमदाबाद स्थित जामा मस्जिद का निर्माण 1424 में अहमद शाह ने करवाया था... इस मस्जिद को लेकर भी बड़ा विवाद है... यह मस्जिद जिस स्थान पर बनायी गई है, वहां पहले हिंदू देवी भद्रकाली का मंदिर था... विभन्न काल में अहमदाबाद का पुराना नाम भद्रा, कर्णावती, राजनगर और असावल रहा है... बाद में मुस्लिम शासकों के काल में यह नाम बदलकर अहमदाबाद कर दिया गया... इस शहर का नाम भद्रा यहां की देवी भद्राकाली के नाम पर ही रखा गया था... भद्रकाली का मंदिर यहां पर मालवा के राजपूत परमार राजाओं ने करवाया था, जिन्होंने 9वीं से 14वीं सदी तक यहां राज किया था...

अदीना मस्जिद, पंडुवा (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित अदीना मस्जिद भी अब टूटी-फूटी हालत में है... बांग्लादेश बॉर्डर के करीब बनी यह मस्जिद एक समय भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद रही होगी... 14वीं सदी की यह मस्जिद बंगाल सल्तनत की खास मस्जिद थी... मस्जिद के यह खंडहर यहां के पुराने शहर पंडुआ में हैं... बंगाल सल्तनत में इलयास शाही राजवंश के दूसरे सुल्तान सिकंदर शाह के काल में इस मस्जिद का निर्माण हुआ था... माना जाता है कि यह मस्जिद हिंदू-बौद्ध मंदिर और मौनेस्ट्री के भग्नावशेषों पर खड़ी की गई थी...

विजय मंदिर, विदिशा (मध्यप्रदेश)

वीजामंडल मस्जिद कहें या विजय मंदिर यह विदिशा की पहचान है... विजय मंदिर की गणना देश के विशालतम मंदिर परिसरों में होती है... माना जाता है कि चालुक्यवंशी राजा कृष्ण के प्रधानमंत्री वाचस्पति ने विदिशा विजय को चिरस्थायी बनाने के लिए यहां सूर्य का विशाल मंदिर बनवाया था... परमार शासकों ने 10-11वीं सदी में इस मंदिर का पुनर्निमाण करवाया... 1233 से 1234 तक यह मंदिर तोड़फोड़ और लूटपाट का निशाना बन गया... 17वीं शताब्दी में औरंगजेब ने तो इस मंदिर को तोपों से उड़ाकर इसके पत्थरों से मिनारें बनायीं और मंदिर को मस्जिद में बदल दिया... गुलाम अल्तमश से लेकर अलाउद्दीन खिलजी, महमूद खिलजी, बहादुर शाह और औरंगजेब तक तमाम मुस्लिम शासकों ने विजय मंदिर पर हमला किया...


यह तो महज़ कुछ ही धार्मिक स्थलों का जिक्र हमने आपके सामने पेश किया है जो विवादित की श्रेणी में आते हैं... साल 1990 में इतिहासकार सीता राम गोयल ने Hindu Temples: What Happened To Them नाम की दो खंडों की किताब प्रकाशित की थीं... जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों के 1800 से ज्यादा धार्मिक स्थानों का उल्लेख देखने को मिलता है जिनके बारे में बताया गया है कि मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनवाई गईं |

अमीना

 

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