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क्या आपकी कुंडली में है IAS बनने का योग? पंडित धनंजय पांडेय से जानिए

Kundali Mein IAS Banane Ke Yog प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में भारतीय प्रशासनिक सेवा में सफल होने का सपना देखना है.

क्या आपकी कुंडली में है IAS बनने का योग? पंडित धनंजय पांडेय से जानिए
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Kundali Mein IAS Banane Ke Yog प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में भारतीय प्रशासनिक सेवा में सफल होने का सपना देखना है. उनके इसी सपने को पूरा करने के लिए भारतीय सिविल आयोग प्रवेश परीक्षा लेती है जिसमे सफल होने पर उन्हें प्रशासनिक सेवा का अवसर दिया जाता है. इसकी परीक्षा कठिन होती है इसलिए गिने चुने लोग ही सफलता पाते हैं. भारतीय प्रशासनिक सेवा में सफलता पाने के लिए व्यक्ति की कुंडली में उच्च विद्या और तेज के कारक सूर्य, ज्ञान के कारक बृहस्पति एवं बुद्धि के कारक बुध ग्रह की विशेष भूमिका होती है। आइए जानते हैं कुंडली में इन ग्रहों का किस स्थान में होना आईएएस अधिकारी बनाने में सफलता दिलाएगा।

कुंडली में आईएएस बनने के योग (Kundali Mein IAS Banane Ke Yog)

ज्योतिष के जानकार पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि केंद्र या लग्न में सूर्य एवं बुध स्थित हों और उन पर गुरु की शुभ दृष्टि पड़ रही हो तो जातक का आईएएस बनने के योग होते हैं।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि कुंडली में लग्न लग्नेश को देखे और साथ ही भाग्येश, केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो तो जातक का आईएएस बनने के योग होते हैं।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि धनेश लाभ स्थान में बैठ कर १०वें भाव के स्वामी से दृष्ट हो या १०वें भाव के स्वामी के साथ हो तो जातक का आईएएस बनने के योग होते हैं।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि गुरु उच्च या स्वराशि हो और लग्नेश एवं दशमेश उच्च या स्वराशि के हो कर केंद्र या त्रिकोण में स्थित हों तो जातक का आईएएस बनने के योग होते हैं।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि सूर्य और बृहस्पति का योग हो और मंगल शुभ भाव में बली हो तो आईएएस में सफलता देता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि १०वें भाव का स्वामी केंद्र या त्रिकोण में शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि कुंडली में सूर्य उच्च का हो और भाग्य स्थान में उच्च का गुरु या शुक्र शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो उच्च राजकीय पद दिलाता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि मेष लग्न हो और सूर्य एवं बुध पंचम में व गुरु नवम भाव में हो तो वह जातक उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि वृषभ लग्न हो और बुध-सूर्य पंचम भाव में साथ हो एवं उन पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो वह जातक आईएएस में सफल होता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि कर्क लग्न में गुरु पंचम भाव में हो एवं सूर्य-बुध नवम भाव में हो तो ऐसा जातक प्रशासनिक व्यवस्था में सफल होता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि सिंह लग्न हो और गुरु पंचम में तथा सूर्य-बुध नवम भाव में हो तब वह आईएएस बनाता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि सिंह लग्न हो और सूर्य-बुध लग्न में हो व गुरु नवम भाव में हो तब वह आईएएस बनता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि वृश्चिक लग्न हो और गुरु पंचम भाव में व सूर्य दशम में, बुध एकादश भाव में हो तो यह योग आईएएस बनता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि धनु लग्न हो और गुरु लग्न में हो, सूर्य नवम में व मंगल पंचम में बुध दशम भाव में हो तो यह योग आईएएस बनता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि मीन लग्न हो और गुरु लग्न में हो या नवम भाव में सूर्य लग्न में बुध द्वितीय भाव में हो व मंगल नवम में हो तो यह योग आईएएस बनता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि कुंडली में बुधादित्य योग मेष,मिथुन, सिंह या कन्या राशि में शुभ स्थान में बने तो यह योग प्रशासनिक व्यवस्था में सफलता देता है।

पंडित धनंजय पांडेय के मुताबिक यदि कुंडली में सूर्य उच्च का हो और गुरु प्रबल हो तो विद्या में सफलता देता है और आईएएस बनाने में सहयोगी होता है।

आईएएस (IAS) बनने के लिए कुंडली में क्या-क्या होना है आवश्यक

आईएएस जैसे उच्च सरकारी पद पर बैठे जातक एक तरह से राजा की श्रेणी में ही आते हैं। ऐसे जातकों की जन्म कुंडली में राजयोग, लक्ष्मी योग, विशिष्ट वैभव योग शौर्य योग, गजकेसरी योग तथा उच्च पदाधिकारी योग अदि विद्यमान होते हैं। जातक की कुंडली में ग्रहों की शुभता, उच्चता तथा शुभ योग ही उसे उच्च पदों पर सुशोभित करते हैं। कीसी उच्च पदाधिकारी पद को प्राप्त करने के लिये ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लग्न, दशम, षष्ठ स्थानों का कुंडली में प्रबल होना एवं इन भावों के भावेशों का शक्तिशाली होना अत्यंत आवश्यक है। सफलता, पराक्रम व साहस के लिए तृतीय भाव, भावेश व उसका कुंडली में उत्तम स्थान पर प्रतिष्ठित होना अति महत्वपूर्ण है। इससे अतिरिक्त लग्न तथा दशम स्थान बलवान व सशक्त होने के साथ-साथ लग्नेश तथा दशमेश का उत्तम स्थान पर होना अति आवश्यक है।

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