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Mauni amavasya क्या होगा 6 ग्रहों का एक साथ होने का फल ? क्या करें दान

इस दिन काले तिल का दान करने से शनि, राहु-केतु समेत पाप ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

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Mauni amavasya

Mauni amavasya 2021 daan samriddhi upayपवित्र माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। शास्त्रीय मान्यता है की इस अमावस्या के दिन मौन रहकर व्रत और भगवान की भक्ति करने से अनेक प्रकार की सिद्धियां और कृपा प्राप्त होती हैं।

इस अमावस्या का गुरुवार और श्रवण नक्षत्र के योग में आना अशुभ फलों में कमी लाएगा।

मौनी अमावस्या के दिन तीर्थ प्रयागराज में त्रिवेणी संगम में स्नान-दान, हरिद्वार, नर्मदा, यमुना सरयू सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान करने का बड़ा महत्व है। इसमें पूरे दिन मौन रहना बहुत ही लाभप्रद होता है ।

आयें जाने अयोध्या के पं. गजानन्द शास्त्री जी से मौनी अमावस्या का महत्व

शास्त्रों मे लिखा गया है कि , मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने वाले व्यक्ति को श्रेष्ठ मुनि पद की प्राप्ति होती है।

इस मौनी अमावस्या का विशेष महत्व 6 ग्रह एक साथ

मौनी अमावस्या के दिन श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा सहित छह ग्रह सूर्य, शनि, बुध, गुरु और शुक्र मकर राशि में रहने से यह षटग्रही महायोग बना है।

इसे महोदय योग भी कहते हैं।

इस महा योग में पवित्र पावन नदियों में डुबकी लगाने और दान पुण्य कर पितरों का पूजन तर्पण करने से अनन्त पुण्य फल प्राप्त होता है।

इस दिन काले तिल का दान करने से शनि, राहु-केतु समेत पाप ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

इस दिन भगवान विष्णु को भी स्वेत तिल अर्पित करना चाहिए। इससे सहस्र गुना पुण्य फलों में वृद्धि होती है।

मौनी अमावस्या पर समृद्धि के लिए अदभुत उपाय


इस दिन भगवान विष्णु और शिव आराधना का विशेष ही महत्व है। भगवान विष्णु को तिल अर्पित करें और शिवजी का पंचामृत से अभिषेक करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

इस दिन पित्रो के तस्वीर पर धूप दीप पुष्पमाला भोग करने से पित्र प्रसन्न होते हैं।

जितना और गरीबों का मतलब यह है कि अगर कोई जरूरतमंद है तो उसको भी दान देना चाहिए उसकी सहायता करनी चाहिए और ऐसा करने से जो आपको लाभ मिलने वाला है वह काफी और अच्छा हो जाता है और मोनी अवश्य में दान का काफी महत्व है और इसलिए इस दिन मौन व्रत रहकर के लोग दान पुण्य करते हैं जिस का पौराणिक महत्व है.

मौनी अमावस्या को पूजा विधि

सुबह के समय पीपल के पेड़ में मीठा दूध अर्पित करने और शाम को पीपल के नीचे तिल के तेल का दीपक लगाने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

पीपल के पत्तों पर मिठाई रखकर पितरों को अर्पित करने से पितृदोष दूर होता है। पितृ प्रसन्न होते हैं।

मौनी अमावस्या के दिन चींटियों को शक्कर मिलाकर आटा खिलाना चाहिए। ऐसा करने से पाप-कर्म कम होते हैं और पुण्य-कर्म उदय होते हैं।

मौनी अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। आटे की गोलियों को मछलियों को खिलाना शुभ होता है। ऐसा करने से आपके जीवन की परेशानियों का अंत होता है।

कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय

मौनी अमावस्या के दिन कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए सुबह स्नान करने के बाद चांदी से बने नाग-नागिन की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद सफेद पुष्प के साथ बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

शाम के वक्त घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

मौनी अमावस्या के दिन दान का विशेष महत्व है इस दिन पितृदोष के निवारण के लिए लोटे मे जल ले इसके बाद लाल फूल और काला तिल डाले पितरो का ध्यान करते हुए उनकी शान्ति के लिए प्रार्थना करते हुए यह जल सूर्य देवता को अर्पित करें। ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति होती है

मौनी अमावस्या के दिन ही दो जनेऊ ले एक पितरों के नाम पर रखें, दूसरा भगवान बिष्णू को चढाये तब भी पित्रदोष से मुक्ति मिलती है

उपरोक्त सभी उपाय बहुत ही कारगर एवं जीवन में उपयोगी है,


पं. गजानन्द शास्त्री

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