यही है एक पौधा जिससे शनि की टेढ़ी नजर का भी नहीं पड़ता असर!

यही है एक पौधा जिससे शनि की टेढ़ी नजर का भी नहीं पड़ता असर!
Shani mantra: Shani mantra: शमी का पौधा हर परिस्थिति में जीवित रह सकता है। परंतु, इसके देखभाल की खास आवश्यकता पड़ती है।

Shani mantra शनि को कर्म, न्याय और भाग्य का देवता माना गया है। कहते हैं कि शनि देव हमे हमारे कर्मो के अनुरूप फल देते हैं। अर्थात अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मों का फल बुरा मिलता है। परंतु कई बार जाने अनजाने में कोई गलती हो जाती है जिसका हमें पता नहीं चल पाता है। ऐसे में आंशिक रूप में ही शनि देव के कोप का भाजन बनना पड़ता है। शनि दोष और शनि की पीड़ा से मुक्ति के लिए हिंदू धर्म शास्त्रों में कुछ उपाय बताए गए हैं जिसमें से एक शमी के पौधे से जुड़ा उपाय भी है। शनि का शमी के पौधे से क्या संबंध है और ये किस प्रकार हमारे लिए लाभकारी है। आगे जानते हैं इस बारे में... 

क्या है शनि का शमी से कनेक्शन ?

शमी-पौधा के विषय में मान्यता है कि जब श्रीराम लंका पर विजय पाने के लिए जा रहे थे तो उससे पहले इस पौधे की पूजा की थी। शमी पौधे के बारे में एक अन्य मान्यता यह भी है कि जब पांडवों को एक वर्ष का अज्ञातवास मिला था तो उन्होंने अपने सारे अस्त्र-शस्त्र इसी में छुपाकर रखा था। 

शमी का पौधा हर परिस्थिति में जीवित रह सकता है। मसलन रेगिस्तान, पहाड़, खूब गर्मी, कड़ाके की  ठंढ़ी आदि में भी यह जिंदा रह सकता है। शांत स्वाभव और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष करने के कारण इसे शनि से जोड़कर देखा गया है।

कब और कहां लगाएं शमी का पौधा? (Place for shami plant)

शमी का पौधा दशहरे के दिन लगाना सबसे अच्छा माना गया है, वैसे किसी भी शनिवार के दिन लगाया जा सकता है। 

शमी का पौधा मुख्य दरवाजे के बाईं ओर यानि जब आप घर से निकल रहे हों तो ये आपके बाईं ओर हो। वहीं शमी के पौधे को गमले या जमीन में लगाया जा सकता है।

शमी पौधे से जुड़ी सावधानियां (precautions for shami plant)

शनि पौधे में सुबह स्नान के पश्चात जल डालें। साथ ही कोशिश ये करें कि यह सूखे नहीं। क्योंकि शमी का पौधा सूखना अशुभ माना गया है। 

शमी के पौधे के नीचे शनिवार की शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा करने से शनि से संबंधित समस्या का निदान धीरे-धीरे होगा। 


शनि बीज मंत्र (shani beej mantra)

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:”

शनि गायत्री मंत्र (shani gayatri mantra)

ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।

शनि वैदिक मंत्र (shani vedik mantra)

ऊँ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु न:”

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