शनि के प्रकोप से बचना है तो इस तरह से करें  हनुमान जी की पूजा 

शनि के प्रकोप से बचना है तो इस तरह से करें हनुमान जी की पूजा
 शनि की मूर्ति की आंखों में कभी नही देखना चाहिए 
 हनुमान जी ही शनि के प्रकोप से बचाते हैं 

शनि का नाम सुनते ही लोगों के मन में आता है कि शनि देव का काम है लोगों को कष्ट देना और शनि भगवान की लोग पूजा करना शुरू कर देते हैं सबसे बड़ी बात यह है कि सबसे पहले जान लेना तो यह जरूरी है कि शनि कर्मों का देवता है आपके जैसे कर्म लेंगे वैसा ही फल शनि के द्वारा दिया जाता है अगर आपके कर्म बहुत ही अच्छे हैं कुछ शनि जो अच्छे प्रभाव देता है उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती कि कितना लोगों को फायदा इसका होता है।

उसी के साथ में अगर किसी के कर्म खराब है और उसकी शनि की साढ़ेसाती या शनि का कोई भी असर अगर उनके ग्रह पर दिख रहा है तो यह भी देखा जाता है कि सनी का जब भी प्रभाव होता है तो मुकदमे बाजी शुरू हो जाती है दुश्मनी शुरू हो जाती है पैसे बीमारी के इलाज में लग जाते हैं यानी कि वह सारी समस्याएं जिसको आप जिनके पास में नहीं जाना चाहते हैं उनके पास में मजबूरी में जाना पड़ता है और लगातार आपका कुछ ना कुछ नुकसान होता ही रहता है वह चाहे धन के मामले हो चाहे सम्मान के मामले में हो इसलिए व्यक्ति को केवल करना यह होता है किशन इनका जब भी समय चल रहा हो कुंडली में जब भी शनि की बुरी दशा चल रही हो ऐसे में बहुत ही सात्विक कार्य करने हैं और अपने कर्मों को बहुत सही रखना है ।

किसी शनि का जो प्रभाव होता है वह काफी कम हो जाता है और दंड नहीं मिलता है या दंड का जो भाग है वह काफी कम हो जाता है अब ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि शनि के प्रकोप से बचने के लिए आपको केवल हनुमान जी का ही सहारा है और शनि के प्रकोप से बचने के लिए सबसे पहले हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए हनुमान जी की आराधना करने के बाद में फिर शनि की पूजा की जानी चाहिए और अगर आपको पीपल का पेड़ दिखता है तो शनि के दिन पीपल के पेड़ के नीचे आपको तेल का दिया जलाना है और सरसों का तेल भी चढ़ा सकते हो ।

माना जाता है कि एक बार जब हनुमान जी अपने आराध्य भगवान राम की प्रार्थना कर रहे थे उसी बीच सनी को जिसको अपने ऊपर बहुत ही घमंड था उसने हनुमान जी को ललकारा उनसे युद्ध के लिए हनुमान जी ने शनि को इतनी चोटें पहुंचाई की सनी कर आने लगा और क्षमा मांग ली तब हनुमान जी ने कहा कि उसको माफ किया जाता है और उन्होंने शनि को एक तेल दिया उसको लगाने के बाद उसके दर्द में काफी कमी आ गई इसीलिए शनिवार के दिन शनि को तेल चढ़ाया जाता है लेकिन लोगों को फायदा तभी मिल सकता है जब पहले हनुमान जी की आराधना की जाए उसके बाद में शनि की आराधना की यात्रा थ ना की जाए की वाह अपने प्रकोप से अपने दंड से बचाएं और हनुमान जी की आराधना से ही सनी शांत हो सकते हैं और हनुमान जी ही शनि के प्रकोप से बचा सकते हैं.

शनि के प्रकोप से बचने के लिए क्या करें 
कभी भी शनि की मूर्ति के सामने जाएं तो कभी भी आंखों में न देखें शनि के चरणों मे ही प्रार्थना करें ।
पहले हनुमान जी की आराधना करें और उन्हें सिंदूर अर्पित करें उनको चोला चढ़ाएं चोला चढ़ाने के लिए चमेली के तेल और सिंदूर का लेप लगाएं और हनुमान जी की ऐसी मूर्ति पर लगाएं जो मिट्टी की बनी होती है जिसपर पेंटिंग हुई है उसपर मत लगाएं ।
चोला चढ़ाने के बाद बाएं पैर के अंगूठे से सिंदूर लेकर उसका टीका लगाएं ।
हर शनिवार मंदिर में सरसों के तेल का दीया जलाएं. ध्यान रखें कि यह दीया उनकी मूर्ति के आगे नहीं बल्कि मंदिर में रखी उनकी शिला के सामने जलाएं और रखें।
अगर आस-पास शनि मंदिर ना हो तो पीपल के पेड़ के आगे तेल का दीया जलाएं। अगर वो भी ना हो तो सरसों का तेल गरीब को दान करें।
: शनिदेव को तेल के साथ ही तिल, काली उदड़ या कोई काली वस्तु भी भेंट करें।
: भेंट के बाद शनि मंत्र या फिर शनि चालीसा का जाप कंरे।

: शनिदेव की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें- ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:।।

ध्यान रहे शनिवार के दिन भक्तों को हनुमान पूजन के उपरांत ही शनि पूजन करना चाहिए। शनिदेव के पूजन समय सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलायें। माना जाता है कि शनिवार के दिन हनुमान जी के पूजन के बाद शनि देव का पूजन करने से घर में खुशहाली आती है।
अगर शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ कर लिया जाए तो कष्ट काफी कम हो जाती है और प्रभु की कृपा होती है ।

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