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Valentine Day जैसा ही है Sharad Purnima 2020 लड़कियाँ करती हैं Propose

Valentine Day जैसा ही है Sharad Purnima 2020 लड़कियाँ करती हैं Propose
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Sharad Purnima 2020

Dharm Desk -आज शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2020) है। शरद पूर्णिमा की इस रात को साल की सबसे खूबसूरत रात माना जाता है। इसे प्रेमियों की रात कहा गया है। प्रेम को समर्पित भावनाओं का वह एकांत कोना जिसे प्राचीन काल में सामाजिक मान्यता प्राप्त थी। बसंत उत्सव या मदनोत्सव की तरह। प्राचीन संस्कृत काव्यों में उल्लेख है कि इस रात को प्रेमी किसी उपवन में या सरोवर-तट पर एकत्र होकर अपने प्रिय के आगे प्रणय-निवेदन करते थे।

आज के ही दिन पुराने समय में प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्रपोज करता था यानी कि पड़े निवेदन करता था और जिस तरीके से पश्चिमी सभ्यता ने वैलेंटाइन डे मैं जो भी नई नई चीजें लाइए जो भारतीय सभ्यता में अपना स्थान बनाती जा रही है अगर हम देखें तो हिंदू संस्कृति में पहले भी वैलेंटाइन डे हुआ करते थे जिसके नाम अलग अलग तरीके से हुआ करते थे शरद पूर्णिमा के दिन लोग अपनी प्रेमिका को प्रपोज करते थे लेकिन यह सारी सभ्यता बेहद ही मर्यादाओं में रहती थी और लोग निवेदन करते थे।

यह वही रात थी जब कृष्ण ने प्रेम में डूबी गोपियों के साथ मधुबन में महारास रचाया था। कदंब के पेड़ों से झरती चांदनी के नीचे कृष्ण की बांसुरी की मोहक तान और प्रेम की लय पर गोपियों के सामूहिक नृत्य का अनोखा आयोजन जिसे पुराणों ने आध्यात्मिक ऊंचाई दी।

आज की रात दूध और गुड़ में बनी खीर को शीतल चांदनी में भिंगोकर खाने की परंपरा है। कहते हैं कि आज की चांदनी के असर से खीर में औषधीय गुण आ जाते हैं। अपने बचपन में हममें से बहुत लोगों ने गांव में कदंब के वृक्ष के नीचे पत्तों से झरती चांदनी का आनंद लिया होगा। चांदनी में नहाई शीतल खीर भी खाई होगी। जवानी में जबतक इस रात के पीछे का रूमान समझ में आया तबतक बहुत कुछ बदल चुका था। कदंब के पेड़ लुप्त हो चुके थे। शहरों की चकाचौंध में आकाश का धवल चांद मद्धिम पड़ चुका था। कोलाहल ने इस रात का एकांत छीन लिया था। बचपन के बाद फिर कभी शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2020) की वह जादुई चमक देखने को नहीं मिली। जो लोग आज भी दूरदराज के गांवों में हैं वे इस रात का अर्थ और रोमांच ही भूल चुके हैं। उनके लिए यह प्रेमियों की नहीं, धन-संपत्ति की देवी लक्ष्मी का आह्वान करने वाले पुरोहितों और धार्मिक कर्मकांडों की रात है।

शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2020) 30 अक्टूबर 17:45 से 31 अक्टूम्बर 20:18 तक रहेगी

वर्ष के बारह महीनों में ये पूर्णिमा ऐसी है, जो तन, मन और धन तीनों के लिए सर्वश्रेष्ठ होती है। इस पूर्णिमा को चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है, तो धन की देवी महालक्ष्मी रात को ये देखने के लिए निकलती हैं कि कौन जाग रहा है और वह अपने कर्मनिष्ठ भक्तों को धन-धान्य से भरपूर करती हैं।

शरद पूर्णिमा का एक नाम #कोजागरी_पूर्णिमा भी है यानी लक्ष्मी जी पूछती हैं- कौन जाग रहा है? अश्विनी महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में होता है इसलिए इस महीने का नाम अश्विनी पड़ा है।

एक महीने में चंद्रमा जिन 27 नक्षत्रों में भ्रमण करता है, उनमें ये सबसे पहला है आश्विन नक्षत्र की पूर्णिमा आरोग्य देती है।

केवल शरद पूर्णिमा को ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से संपूर्ण होता है और पृथ्वी के सबसे ज्यादा निकट भी। चंद्रमा की किरणों से इस पूर्णिमा को अमृत बरसता है।

आयुर्वेदाचार्य वर्ष भर इस पूर्णिमा की प्रतीक्षा करते हैं। जीवनदायिनी रोगनाशक जड़ी-बूटियों को वह शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखते हैं। अमृत से नहाई इन जड़ी-बूटियों से जब दवा बनायी जाती है तो वह रोगी के ऊपर तुंरत असर करती है।

चंद्रमा को वेदं-पुराणों में मन के समान माना गया है- #चंद्रमा_मनसो_जात: वायु पुराण में चंद्रमा को जल का कारक बताया गया है। प्राचीन ग्रंथों में चंद्रमा को औषधीश यानी औषधियों का स्वामी कहा गया है।

ब्रह्मपुराण के अनुसार- सोम या चंद्रमा से जो सुधामय तेज पृथ्वी पर गिरता है उसी से औषधियों की उत्पत्ति हुई और जब औषधी 16 कला संपूर्ण हो तो अनुमान लगाइए उस दिन औषधियों को कितना बल मिलेगा।

शरद पूर्णिमा की शीतल चांदनी में रखी खीर खाने से शरीर के सभी रोग दूर होते हैं। ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन और भाद्रपद मास में शरीर में पित्त का जो संचय हो जाता है, शरद पूर्णिमा की शीतल धवल चांदनी में रखी खीर खाने से पित्त बाहर निकलता है।

खीर बनाने का भी तरीका अलग है

लेकिन इस खीर को एक विशेष विधि से बनाया जाता है। पूरी रात चांद की चांदनी में रखने के बाद सुबह खाली पेट यह खीर खाने से सभी रोग दूर होते हैं, शरीर निरोगी होता है।

शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहते हैं। स्वयं सोलह कला संपूर्ण भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ी है यह पूर्णिमा। इस रात को अपनी राधा रानी और अन्य सखियों के साथ श्रीकृष्ण महारास रचाते हैं।

कहते हैं जब वृन्दावन में भगवान कृष्ण महारास रचा रहे थे तो चंद्रमा आसमान से सब देख रहा था और वह इतना भाव-विभोर हुआ कि उसने अपनी शीतलता के साथ पृथ्वी पर अमृत की वर्षा आरंभ कर दी।

गुजरात में शरद पूर्णिमा को लोग रास रचाते हैं और गरबा खेलते हैं। मणिपुर में भी श्रीकृष्ण भक्त रास रचाते हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में शरद पूर्णिमा की रात को महालक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस पूर्णिमा को जो महालक्ष्मी का पूजन करते हैं और रात भर जागते हैं, उनकी सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।

ओडिशा में शरद पूर्णिमा को कुमार पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है। आदिदेव महादेव और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म इसी पूर्णिमा को हुआ था। गौर वर्ण, आकर्षक, सुंदर कार्तिकेय की पूजा कुंवारी लड़कियां उनके जैसा पति पाने के लिए करती हैं।

शरद पूर्णिमा(Sharad Purnima 2020) ऐसे महीने में आती है, जब वर्षा ऋतु अंतिम समय पर होती है। शरद ऋतु अपने बाल्यकाल में होती है और हेमंत ऋतु आरंभ हो चुकी होती है और इसी पूर्णिमा से कार्तिक स्नान प्रारंभ हो जाता है।

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