Sita navami 2021: सीता नवमी शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा-विधि, मंत्र और महत्व

Sita ram
Sita navami 2021: सीता नवमी 21 मई, शुक्रवार के दिन है। सीता नवमी के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक है।

Sita navami 2021 date puja vidhi importance: वैशाख शुक्ल नवमी को सीता नवमी के तौर पर मनाया जाता है। इस बार यह 21 मई, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सीता नवमी के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इस दिन मां सीता का प्राकट्य हुआ था। कहते हैं कि एक बार राजा जनक खेत में हल चला रहे थे उसी वक्त एक कन्या उनके हल के नीचे आईं। जिसके बाद उस कन्या का नाम सीता रखा गया। जिस दिन राजा जनक के साथ ऐसी घटना घटी वह तिथि वैशाख शुक्ल नवमी थी। 

सीता नवमी कब है? सीता नवमी शुभ मुहूर्त (when is sita navami 2021/sita navami shubh muhurat)

इस बार सीता नवमी 21 मई, शुक्रवार के दिन है। सीता नवमी के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक है। इसके अलावा नवमी तिथि की शुरुआत 20 मई को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से होगी। साथ ही नवमी तिथि 21 मई को सुबह 11 बजकर 10 मिनट तक है।

सीता नवमी का महत्व (sita navami importance)

सीता नवमी का महिलाओं के लिए खास महत्व है। उसमें भी विवाहित महिलाओं के लिए और भी महत्व का है। सीता नवमी के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। भगवती सीता का प्राकट्य मिथिला के सीतामढ़ी में हुआ था। इसलिए मैथिल संप्रदाय के लोग सीता नावमी को उत्सव के तौर पर मानते हैं।


सीता नवमी पूजा-विधि (sita navami 2021 puja vidhi)

सबसे पहले स्नान कर पवित्र हो जाएं। इसके बाद सीता माता की प्रतिमा या चित्र के सामने जौ, तिल, पुष्प, फल आदि अर्पित करें। फिर घी का एक मुखी दीपक जलाएं। इसके बाद विधि-विधान से सीता माता की पूजा करें। पूजा के बाद आरती करें। महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखें। व्रत के दौरान सात्विकता का पालन करें। "ॐ जानकी वल्लभाय" इस मंत्र से माता जानकी का स्मरण कर अपनी मनोकामना कहें।


सीता नवमी कथा (sita navami 2021 vrat katha)

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा जनक अपने खेत में हल चला रहे थे। हल चलाने के दौरान उसके नीचे कुछ टकराया, जिससे उनका ध्यान उस वस्तु पर गया। जब राजा जनक ने हल उठाकर देखा तो वे आश्चर्य में पड़ गए क्योंकि हल के नीचे एक बच्ची थी। उस कन्या को उन्होंने अपने घर लाकर पालन-पोषण किया। हल के नुकीले भाग को सीता कहते हैं इसलिए उक्त उक्त कन्या का नाम सीता रखा गया।

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