कर्मों का प्रायश्चित क्या है ?

Chitragupta
 प्रश्न :-कर्मो का प्रायश्चित

*बहुत ही गूढ़ प्रश्न है*
आत्मा तो कोई कर्म करती ही नही, फिर प्रायश्चित कैसा।
*मन, बुद्धि,चित्त, अहंकार यह चारो मिलकर शरीर(कर्मेंद्रियों) से कर्म करवाते है, जो पुनः शरीर धारण करने पर, या जब भी भोक्ता के लिए नियति, नियमित करता है, वह भोगता ही है।
*अब कर्म फल भोगना ही पड़ेगा तो प्रायश्चित कैसा*
हां व्यवस्था है, पाप-पुण्य की ।यदि पाप-पुण्य समझने सही दिशा है तो, पाप हो जाने पर, पुण्य का कार्य बढ़ा दीजिए तो पाप भोगने की अवधि कम हो जाएगी ।पुण्य-ही पुण्य बढ़ जाय तो, पॉप की अवधि शून्य हो जाने से प्रभावहिंन हो जाएगी ।
*इसे ही प्रायश्चित कह सकते है।*
*पाप पुण्य का हिसाब व उसपर न्याय चूंकि भगवान चित्रगुप्त के पास है, तो चित्रगुप्त जी को पूजने,मानने पर कु-कर्म तो होंगे ही नही, होने ही नही पाएंगे*
जय चित्रगुप्त

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