Samput mantra: बेहद प्रभावशाली होता है 'संपुट' अगल अलग कामना के लिए ऐसे करें प्रयोग

Samput mantra: क्या होता है संपुट मंत्र ? दुर्गा सप्तशती का कौन मंत्र है संपुट, जानिए
Samput mantra: बेहद प्रभावशाली होता है 'संपुट' अगल अलग कामना के लिए ऐसे करें प्रयोग
संपुट मंत्र (samput mantra in durga saptshati) को बेहद प्रभावशाली और कल्याणकारी माना गया है।

संपुट मंत्र (samput mantra in durga saptshati) को बेहद प्रभावशाली और कल्याणकारी माना गया है। संपुट का अर्थ किसी भी मंत्र को दोनों तरफ से बंधना बताया गया है। अर्थात ये कि जिस किसी भी कामना के लिए संपुट मंत्र का प्रयोग करते हैं, उसे मंत्र के पहले और बाद में लगाते हैं। दुर्गा सप्तशती में निहित मंत्र मार्कण्डेय पुराण से लिए गए हैं। जिसकी कुल संख्या सात सौ है। आगे जानते हैं अलग-अलग कामनाओं के लिए खास संपुट मंत्र (samput mantras in durga sapt shati)

खुशियां पाने के लिए (samput mantra for happiness)

प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्‍वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥

सभी बाधाओं से मुक्ति और धन-संतान के लिए

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥

शक्ति पाने के लिए ( samput mantra for power) 

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

दरिद्रता और दुख के नाश के लिए (for remove poverty and misery)

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥

अच्छा स्वास्थ्य और सौभाग्य पाने के लिए (for health and prosperous)

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

सुंदर और गुणवान पत्नी के लिए (for beautiful and talented wife)

पत्‍‌नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥

रोग नाश के लिए (for destroy diseases)

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

भय (मानसिक डर) दूर करने के लिए (For mental fear)

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥


पारिवारिक कल्याण के लिए (for family welfare)

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या। निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्त्या।।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां।
भक्त्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा नः॥


विविध प्रकार के उपद्रवों से बचने के लिए (for avoid disturbing)

रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्‍च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र।
दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्‍वम्॥

स्वर्ग और मोक्ष पाने के लिए

सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥

दुर्गा सप्तशती के पाठ में क्या बरतें सावधानियां? 

दुर्गा सप्तशती के पाठ के लिए सबसे उपयुक्त समय  सुबह या शाम का होता है। पाठ के लिए तन-मन से पवित्र होना चाहिए। ध्यान पूर्वक और अपनी कामनाओं को निश्छल भाव से मन में रखकर पाठ करेंगे तो निश्चित रूप से मनोकामना पूर्ण होगी। हालांकि पाठक को एक बात औऱ ध्यान में रखना चाहिए कि मंत्र का उच्चारण शुद्ध हो, अगर संस्कृत का उच्चारण में दिक्कत है तो हिंदी अनुवाद भी पढ़ सकते हैं, लाभ मिलेगा।

Share this story