आषाढ़ मास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं ?

Asadh mas me kya ksre

उत्तर प्रदेश डेस्क लखनऊ (आर एल पांडेय)। हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि आषाढ़ मास में भगवान विष्णु और भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व है। ज्योतिषायन के पंडित दीपक मालवीय ने बताया कि  इस मास में पूजा-पाठ और हवन का भी महत्व सर्वाधिक है।इस मास में व्यक्ति को हर दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर निरोगी रहता है।

पिंडदान, तर्पण, स्नान और दान का विशेष महत्व है। ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है और जीवन में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हैं। काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए हर दिन शिव मन्दिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि  इस मास में सूर्य देव, हनुमान जी और मां दुर्गा की उपासना करने से मंगल और सूर्य की दशा कुंडली में अच्छी होती है। इस मास में व्यक्ति को हर दिन सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और कम से कम 11 बार गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।

ऐसा करने से सूर्य देव की कृपा साधक पर बनी रहती है।पंडित दीपक मालवीय ने ये भी बताया कि इस मास  में मौसम में परिवर्तन होते रहते हैं, कभी तेज गर्मी तो कभी बहुत ज्यादा उमस तो कभी बारिश। इसलिए इस दौरान सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए और बासी खाना खाने से परहेज करना चाहिए। इस मास में गुप्त नवरात्र, जगन्नाथ रथयात्रा और देवशयनी एकादशी सहित विभिन्न तीज-त्योहार आएंगे। इस माह में जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। उनकी विशेष आराधना होती है। देवशयनी एकादशी पर भगवान चार माह के लिए शयन पर जाते है और मांगलिक कार्यों पर विराम लगता है। इस माह का समापन गुरु पूर्णिमा के साथ होगा ।

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