इन्वेस्टमेंट में अव्वल नोएडा रेल कनेक्टिविटी के मामले में सबसे पीछे

इन्वेस्टमेंट में अव्वल नोएडा रेल कनेक्टिविटी के मामले में सबसे पीछे
गौतमबुद्ध नगर, 19 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश का शो विंडो, राजस्व में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला जिला है और दिल्ली एनसीआर का मुख्य पार्ट, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा - ग्रेटर नोएडा) है। नोएडा की बात आते ही आंखों के सामने ऊंची ऊंची गगनचुंबी इमारतें, तेज रफ्तार से दौड़ती मेट्रो सड़कों पर दौड़ते गाड़ियों का नजारा सामने आ जाता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में नोएडा में सबसे ज्यादा निवेश आया है जो अपने आप में रिकॉर्ड है।

लेकिन अगर गौतमबुद्ध नगर से रेलवे कनेक्टिविटी की बात की जाए तो यह उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और छोटे जिलों से भी काफी पीछे पायदान पर खड़ा नजर आता है। फिलहाल दादरी रेलवे स्टेशन जिले का एकमात्र ऐसा स्टेशन है जो दिल्ली और हावड़ा का मुख्य मार्ग है। लेकिन उस स्टेशन से कोई भी गाड़ी बन कर नहीं चलती और ना ही बहुत सारी गाड़ियों का वहां स्टॉपेज है।

बीते कई सालों में नोएडा में लगातार तरक्की होती रही। इंफ्रास्ट्रक्च र, मेट्रो और तमाम सुविधाएं नोएडा में आती रही लेकिन यहां पर रेलवे स्टेशन का विकास नहीं हो पाया। साथी ही कभी भी किसी सरकार ने इस रेलवे स्टेशन की दशा और दिशा सुधारने की भी कोशिश नहीं की जिसके कारण गौतमबुध नगर के रहने वालों के लिए रेलवे स्टेशन से जाकर ट्रेन पकड़ना काफी चुनौतीपूर्ण रहता है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रहने वाले लोगों के लिए गाजियाबाद और नई दिल्ली के साथ-साथ आनंद विहार रेलवे स्टेशन ही यातायात के मुख्य साधन हैं। अगर गौतम बुध नगर के लोगों को ट्रेन का सफर करना होता है तो वह घंटों पहले रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाते हैं, नहीं तो कई बार जाम में फस कर उन्हें अपनी ट्रेन भी छोड़नी पड़ती है।

ग्रेटर नोएडा नोएडा के रहने वाले सुनील सिंह का कहना है कि उनके आसपास काफी अच्छा इंफ्रास्ट्रक्च र मेट्रो कनेक्टिविटी है लेकिन रेलवे स्टेशन ना होने की वजह से उन्हें ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली या गाजियाबाद की तरफ जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें ट्रेन छोड़नी भी पड़ी है क्योंकि अगर ट्रेन पकड़नी है तो घर से काफी ज्यादा समय का मार्जिन लेकर निकलना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में नोएडा सबसे ऊपर पायदान पर रहा। नोएडा की तीनों अथॉरिटी का कुल मिलाकर इन्वेस्टमेंट भाग 27 प्रतिशत रहा है। जेवर एयरपोर्ट को लेकर यमुना अथॉरिटी के पास निवेशकों की झड़ी लगी हुई है। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और नोएडा अथॉरिटी ने भी अपनी जबरदस्त भूमिका के चलते इन्वेंटरों को खूब लुभाया है।

इसीलिए नोएडा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में इन्वेस्टरों की सबसे पहली पसंद बन गया है। ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट से यूपी सरकार को 32 लाख 92 हजार करोड़ रुपए का निवेश का प्रपोजल मिला है। इस बार भी इन्वेस्टमेंट के मामले में यूपी में पहले स्थान पर नोएडा रहा है। यूपी में होने वाले कुल निवेश का करीब 27 फीसदी निवेश अकेले नोएडा में आया है।

लेकिन रेलवे स्टेशन की कनेक्टिविटी एक बड़ा मुद्दा है। भविष्य में ग्रेटर नोएडा का बोड़ाकी स्टेशन देश व प्रदेश में गौतमबुद्वनगर (नोएडा) जिले की एक अलग पहचान के रूप में स्थापित होगा। ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन मेट्रो स्टेशन व बस अड्डे के मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब को दिल्ली के आनंद विहार से भी बेहतर और सुविधाजनक बनाने की तैयारी की जा रही है।

ग्रेटर नोएडा में बन रहे में बोड़ाकी रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और बस अड्डे को स्काई वॉक (ट्रैवलर) से जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को बहुत सुविधा हो जाएगी। यात्रियों को रेलवे स्टेशन से बस अड्डा या फिर मेट्रो स्टेशन के बीच सामान लेकर पैदल नहीं भागना पड़ेगा, बल्कि ट्रैवलर पर एक जगह खड़े हो जाएंगे और अपने गंतव्य तक पहुंच जाएंगे। इस पूरी परियोजना का कॉन्सेप्ट प्लान तैयार हो चुका है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने भारत सरकार के सहयोग से बोड़ाकी के आसपास 7 गांवों की 478 हेक्टेयर जमीन पर मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट व लॉजिस्टिक हब की योजना है।

इन दोनों परियोजनाओं पर भारत सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। अब तक करीब 80 फीसदी जमीन प्राप्त हो गई है। मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के तीन अहम परियोजनाएं, बोड़ाकी के पास रेलवे टर्मिनल, अंतर्राज्यीय व लोकल बस अड्डा और मेट्रो कनेक्टिविटी की सुविधा विकसित की जाएगी।

उम्मीद की जा रही है कि अगले पांच साल में इसके बन जाने के बाद पूरब की ओर जाने वाली अधिकतर ट्रेनें यहीं से चलेंगी। ग्रेटर नोएडा व उसके आसपास रहने वालों को पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि के लिए ट्रेनें यहीं से मिल सकेगी। उन्हें दिल्ली, नई दिल्ली व आनंद विहार रेलवे स्टेशन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

--आईएएनएस

पीकेटी/एसकेपी

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