कोरोना काल में हमेशा रहें खुश, दोस्तों से करें बात

कोरोना काल में हमेशा रहें खुश, दोस्तों से करें बात
माहौल को खुशहाल और रचनात्मक बना मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत जरूरी


बलरामपुर। कोरोना को हराने के लिए मन की शक्ति का होना बहुत जरूरी है। यदि आपने मन में ठान लिया कि इस कोरोना रूपी दानव को हमें हराकर जंग जीतना ही है तो ये आपके आस पास भी नहीं भटकेगा। यदि हम हर समय अपने मन में हार और नकारात्मक विचारों को जगह देंगे तो परिणाम भी वैसा ही होगा। इस समय हमें सबसे ज्यादा जरूरत है इस बात की है कि हम अपने आस पास के वातावरण को चिंता रहित बनाकर मानसिक तौर पर खुश और स्वस्थ्य रहें। 

Positive सोच वाले लोगों से करें बात 

मानसिक स्वास्थ्य केन्द्र के क्लीनिकल साइकोलाॅजिस्ट डा. अशोक पटेल ने शनिवार को कोरोना मरीजों व उनके परिजनों को हौसला देते हुए बताया कि हमें इस कोरोना काल में हमेशा खुश रहने का प्रयास करना चाहिए। हमें ऐसे व्यक्ति से बात या मुलाकात करना चाहिए जिससे देखकर या जिसकी आवाज सुनकर हमें खुशी मिलती है।

ऐसा करने से शरीर में एक अलग तरीके के एंटीबाॅडी का निर्माण होता है। जिससे हम मानसिक तौर पर स्वस्थ्य रहेंगे और कोरोना को हराना आसान हो जाएगा। डा. अशोक का कहना है कि हम अपनी जिन्दगी की सभी घटनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकते, पर उनसे निपटने के लिये सकारात्मक सोच के साथ सही तरीका तो अपना ही सकते हैं।

कई लोग अपनी पहली असफलता से इतना परेशान हो जाते हैं कि अपने लक्ष्य को ही छोड़ देते हैं। कभी-कभी तो अवसाद में चले जाते हैं। यह स्थिति बहुत खतरानाक होती है।


डा. अशोक का कहना है कि हमारे भीतर सकारात्मक विचारों का होना बहुत ही जरूरी हैं, खासतौर पर कोरोना काल में। उन्होंने कहा कि काढ़ा, गिलोय, भाप, विटामिन-सी, जिंक आदि से हम अपने शरीर की प्रतिरोधक-क्षमता बढ़ाने के लिए क्या क्या नहीं कर रहे हैं, लेकिन क्या हम अपनी भावनात्मक या मानसिक प्रतिरोध-शक्ति बढ़ाने के लिए भी कुछ कर रहे हैं ? शारीरिक स्वास्थ्य अगर हवा की तरह है तो मानसिक स्वास्थ्य पानी की तरह है,

दोनों के बिना जीवित रहना नामुमकिन है। इतिहास गवाह है कि कितनी ही जंग शारीरिक शक्ति से नहीं बल्कि मानसिक बल से जीती गईं हैं। 


डा. अशोक कहते हैं कि मानसिक क्षमता बढ़ाने के लिए कोई तय फार्मूला नहीं है। अगर घड़ी आपकी है तो आपको ही पता होगा कि आपकी घड़ी में कितना बजा है। जैसे हर किसी के उंगलियों के निशान अलग होते हैं वैसे ही हर किसी का नजरिया भी अलग होता है। यह जरूरी नहीं कि एक ही बात जितना किसी दूसरे पर असर करती हो उतना ही आप पर भी असर करे। क्योंकि अपने बारे में सबसे अच्छी तरह आप जानते हैं, इसलिए अपना मूल्यांकन भी आप खुद ही करें। जो बातें आपको दुखी करती हैं या जिन लोगों से बात करके आपको नकारात्मकता महसूस होता है उनसे दूर रहें, वह करें जो आपको अच्छा लगता है। 

-मानसिक स्वास्थ्य( mental health )के लिए इन बातों का रखें ध्यान


एसीएमओ डा. बी.पी. सिंह ने कहा कि खुशी और दुख देने वाले बातों और विचारों व भावों में फर्क करना सीखें। अच्छा बोलें व अच्छा सोचें, हम वही आकर्षित करते हैं जो हम सोचते और बोलते हैं। सिर्फ वही नियंत्रित करने की कोशिश करें जो आपके हाथ में है। दिन में एक बार शांतिपूर्वक ध्यान अथवा प्रार्थना अवश्य करें। आपके पास जो है उसका मान करें।

जरूरत से ज्यादा सोचना राई को पहाड़ बना देता है, इसलिए किसी भी मुद्दे पर हद से ज्यादा सोचने से बचें। मन में कोई उलझन न रखें, बात करें। अगर लगता है कि आपकी समझ आपको सहायता नहीं कर पा रही तो तुरंत किसी दोस्त या सलाहकार से बात करें और उसकी सलाह भी सुनें।

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