मुश्किल लोगों से कैसे डील करें? मानसिक शांति बनाए रखने के 6 मनोवैज्ञानिक तरीके

हमारी ज़िंदगी में हर तरह के लोग होते हैं—कुछ सहयोगी और सकारात्मक, तो कुछ ऐसे जो हर बातचीत में तनाव, बहस और नकारात्मकता ले आते हैं। ऐसे लोगों से बार-बार सामना होना मानसिक रूप से थका देता है। मनोविज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि हर इंसान को बदलना संभव नहीं होता, लेकिन उनसे सही तरीके से डील करना सीखा जा सकता है।

भरोसेमंद लोगों से बात करें

जब कोई आपको परेशान करता है, तो गुस्सा मन में जमा होने लगता है। हर किसी के सामने भड़ास निकालने के बजाय अपनी बात उन लोगों से साझा करें जिन पर आपको भरोसा हो—जैसे अच्छे दोस्त या परिवार। जब कोई आपको समझता है, तो मन हल्का हो जाता है और तनाव कम होता है।

सामने वाले के स्वभाव को पहचानें

मुश्किल स्वभाव वाले लोगों का व्यवहार अक्सर एक-सा होता है—कोई ताना मारता है, कोई शिकायत करता है, कोई जल्दी गुस्सा हो जाता है। जब आप पहले से जानते हैं कि सामने वाला ऐसा ही है, तो आप मानसिक रूप से तैयार रहते हैं और भावनात्मक प्रतिक्रिया देने से बचते हैं।

प्रतिक्रिया नहीं, समझदारी से जवाब दें

कोई चिल्लाए या कटु टिप्पणी करे तो तुरंत पलटकर जवाब देना सबसे आसान लगता है, लेकिन यही सबसे बड़ा जाल है। पहले गहरी सांस लें, थोड़ा रुकें और शांत होकर बोलें। कई बार चुप रहना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी होती है।

अपनी सीमाएं स्पष्ट करें

अगर कोई बार-बार बदतमीजी करता है या आपको नीचा दिखाता है, तो शांत लेकिन साफ शब्दों में अपनी सीमा तय करें। जैसे—मुझे इस तरह से बात किया जाना पसंद नहीं है।” सीमाएं तय करने से सामने वाले को यह समझ आ जाता है कि वह आपके साथ क्या कर सकता है और क्या नहीं।

खुद को जिम्मेदार न समझें

आप किसी के गुस्से, दुख या फ्रस्ट्रेशन के जिम्मेदार नहीं हैं। आप किसी के थेरेपिस्ट नहीं हैं। हर व्यक्ति अपनी भावनाओं के लिए खुद जिम्मेदार होता है। अपनी शांति को प्राथमिकता दें और जरूरत हो तो दूरी बनाएं।

ज़रूरत पड़े तो दूरी बना लें

अगर माहौल बहुत ज़्यादा तनावपूर्ण हो जाए, तो विषय बदलें। अगर यह भी संभव न हो, तो वहां से हट जाना बिल्कुल सही फैसला है। यह कायरता नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान और आत्म-रक्षा है। हर लड़ाई लड़ना ज़रूरी नहीं होता।