Barabanki Masjid issue कागज मांगा तो पत्थर चलाने लगे,कागज तो दिखाना पड़ेगा

 
Barabanki masjid issue 
सरकारी जमीन पर मस्जिद बनाकर शौचालय और उसके साथ ही कुछ लोग रहने लगे । जब तहसीलदार ने नोटिस दी लोग कोर्टगये और कोर्ट ने भी कह दिया कि आप अपना जवाब अधिकरियों को दें ।
लखनऊ से सटे जिला बाराबंकी के रामसनेहीघाट तहसील परिसर में हुए निर्माण इसको मस्जिद करो दिया जा रहा है इस पर प्रशासन द्वारा नोटिस दिए जाने पर उससे संबंधित रोग हाई कोर्ट में एडिट किया और कहा कि प्रशासन द्वारा मस्जिद को गिराने की कोशिश की जा रही है इसके लिए नोटिस दिया गया है जिस पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई और कोर्ट में सरकारी पक्ष ने बताया कि यह निर्माण तहसील प्रशासन की जमीन पर किया गया है और उसके बाद इससे जुड़े लोगों को नोटिस जारी की गई ।

और उनसे यह पूछा गया की निर्माण किस तरीके से किया गया है और उसके डॉक्यूमेंट दिखाने को कहे गए जिसके बाद में इन लोगों के द्वारा हाईकोर्ट में रिट की गई है हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह कहा कि इस बारे में जो कुछ भी जवाब देना है नोटिस दिए गए लोगों के द्वारा जवाब प्रशासन को देना चाहिए और यही नहीं कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित गाटा संख्या से जो भी संबंधित डॉक्यूमेंट है उसकी अगर यह लोग नकल चाहते तो उसकी नकल भी दी जाए और उसके बाद में प्रशासन फिर से fresh आर्डर पारित करें.

इस आदेश के होने के बाद भी हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के बजाए दूसरा पक्ष शांति व्यवस्था में खलल डालने लगा जिस पर जिला प्रशासन ने शांति व्यवस्था को बहाल करने के लिए कदम उठाए जिला अधिकारी बाराबंकी द्वारा दिए गए अपने बाइक में कहा गया कि कुछ अराजक तत्वों द्वारा शांति व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा था जिसको उनके द्वारा पुलिस अधीक्षक के साथ में जाकर पुलिस व्यवस्था के जरिए शांति व्यवस्था को कायम किया गया अब सवाल यह उठता है कि जिन लोगों के द्वारा अपने पक्ष में यह कहा जा रहा है कि उनको वर्क्स बोर्ड से उनके मैनेजमेंट को मान्यता दी गई है उनके द्वारा तहसील प्रशासन को उपलब्ध कराए गए जवाब में यह कहीं नहीं कहा गया कि जिस जमीन पर उनके द्वारा मस्जिद बनाया जाना बताया जा रहा है वह उनकी जमीन है उसके संबंधित कोई भी डॉक्यूमेंट नहीं हाई कोर्ट के निर्देश के बाद यह बात साफ हो जाती है कि कागज तो दिखाना ही पड़ेगा उसके बाद ही कोई निर्णय होगा क्योंकि प्रशासन ने अपने अभिलेखों के अनुसार यह बता दिया है कि जो निर्माण किया गया वह सरकारी अभिलेखों में सरकार की जमीन है।


 कोर्ट ने साफ कहा है कि इस पूरी रिट में कहीं भी ये नही कहा गया कि ये मस्जिद या जो भी है वो सरकारी जमीन पर नही है या मस्जिद वक़्फ़ द्वारा संचालित किसी प्रॉपर्टी में है , 
फिर भी हम इन्हें 15 दिन का समय देते है कि ये कागज़ तहसील प्रशासन  जॉइंट मजिस्ट्रेट को दिखाएं और नोटिस का जवाब दें , जिसके बाद सभी बिंदुओं पर विचार कर निर्णय प्रशासन लेगा ,


कोर्ट द्वारा रिट डिस्पोज़ ऑफ कर देने और नोटिस पर कोई रोक न लगाने बल्कि 15 दिन में कागज़ दिखाने की बात से कुछ लोग इतना नाराज़ हुए कि वो आम जनता को बहला फुसला कर पत्थरबाजी करवाने लगे ।


जिस तरीके से इस वर्ग के द्वारा उपद्रव किया गया उससे यह साफ है कि उनके पास में कोई भी सही जवाब नहीं है और अब जब कागज दिखाने की बात आ रही है तो उनके द्वारा जनता को गुमराह किया जा रहा है और अपने फायदे के लिए लोगों को गलत तथ्य बताए जा रहे हैं जबकि कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि जो नोटिस दी गई थी वह केवल डॉक्यूमेंट दिखाने के लिए कहा गया था ना ही मस्जिद पर कहीं कोई डिमोलिश करने की बात कही है।


कोर्ट ने 15 दिनों में कागज दिखाने की बात कही है जबकि प्रशासन द्वारा 3 दिन की नोटिस दी गई है ।
कोर्ट द्वारा इस मामले को डिस्पोज़ कर दिया है ।

बाराबंकी प्रशासन द्वारा दी गई byte

मुस्ताक अली द्वारा तहसीलदार को दिए गए जवाब में कहा गया है कि मस्जिद का निर्माण पूर्व तहसीलदार उसी तरह से किया गया है जिस तरह से 2 वर्ष पूर्व तहसीलदार द्वारा मंदिर का निर्माण किया गया ।
मुस्ताक अली फरमाते हैं अपने जवाब में की मस्जिद का निर्माण किस जगह हुआ है आख्या में नही बताया गया है ।जबकि मुस्ताक अली अपने को मस्जिद का करता धर्ता बताते हैं उन्हें खुद नही पता है कि उनके द्वारा देखरेख की जा रही मस्जिद कहा है ।
मुस्ताक अली के द्वारा अपने मैनेजमेंट से संबंधित सारे कागजात दिखाए जा रहे हैं लेकिन जमीन से जुड़ा कोई भी कागजात नही दिखाए जा रहे हैं ।
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि तहसील परिसर में एक मुस्लिम तहसीलदार ने पहले मस्जिद बनवाई और उसके बाद उसका संचालन एक सोसायटी करने लगी अपने आप मे यह भी बड़ा सवाल है क्योंकि खुद तो अपनी आस्था व्यक्त करना अलग है लेकिन सरकारी संपत्ति को किस तरह से बाहरी लोहों को कब्जे कर देना अपने आप मे बेहद गलत है जैसा कि कानून के जानकार बताते हैं ।

प्रदेश भाजपा नेता के सी जैन ने कहा कि राम सनेही  घाट तहसील परिसर मे मस्जिद होने पर जो नोटिस दी गई थी जिसका जवाब विधिक रूप से दिया जाना चाहिए था लेकिन यह तबका हमेशा से ही ताकत के बल पर कब्जा करना चाहता है उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ऐसे लोगों से CAA protest के नाम पर अराजकता फैलाने वालों से सख्ती से निबटा गया और उन्हें नोटिस दी गई सरकारी संपत्ति को नुकसान करने वालों से भरपाई भी की गई उनकी गिरफ्तारी भी की गई थी । 
प्रशासन द्वारा ऐसे लोगों से सख्ती से निबटा जा रहा है और विधिक रूप से कार्रवाई न करने वाले लोगों द्वारा अराजकता करने वालों से सख्ती से निबटा जाना चाहिए ।

Share this story