ब्रह्मांड के प्रथम पत्रकार थे देवर्षि नारद, जयंती 26 मई को

धर्म

लखनऊ।(आर एल पांडे)ब्रह्माजी के मानस पुत्रों में देवर्षि नारद छठे पुत्र थे। इनके पिता का नाम  ब्रह्मा तथा माता का नाम सरस्वती मंत्र नारायण मंत्र निवास ब्रह्म लोक था । नारद जी ब्रह्मा के शापवश गंधमादन पर्वत पर गंधर्व  योनि में जन्मे थे, उस समय उनका नाम  उपवर्हण था ।

प्रत्येक भक्तों की पुकार भगवान तक पहुंचाना उनका कार्य था । उन्हें समस्त दिशाओं में विचरण करने की अव्याहत गति प्राप्त थी। नारद का तात्पर्य जो प्राणी मात्र को ज्ञान प्रदान करें उसे नारद कहते हैं। देवर्षि नारद को देवता तथा असुरों में भी सम्मान प्राप्त था। अपनी इच्छा अनुसार वह कहीं भी प्रकट हो सकते हैं।

श्री सत्यनारायण कथा में भी नारद का उल्लेख मिलता है। नारद जी वेदांत के प्रकांड विद्वान, संगीत शास्त्री, व्याकरण, छंद ,ज्योतिष, खगोल, भूगोल और  औषधि शास्त्र के उद्भट विद्वान थे । नारद जी शास्त्रों के आचार्य और भक्ति रस के प्रमुख माने गए हैं। इनकी रचनाएं नारद पांचरात्र ,नारद भक्ति सूत्र ,नारद पुराण और नारद संहिता आदि हैं।

नारद जी त्रिकालदर्शी थे। इनका वाहन पवन, मेघ तथा पैदल मार्ग था। शास्त्रों में इन्हें भगवान का मन कहा गया है। नारद की महत्ता को स्वीकार करते हुए भगवान श्री कृष्ण ने गीता के दशम अध्याय के 26 वें श्लोक में देवर्षीणां च नारद: कहा है, अर्थात् देवर्षियों में मैं नारद हूं ।

महर्षि वाल्मीकि , महर्षि व्यास तथा योगी शुकदेव के गुरु के रूप में देवर्षि नारद प्रतिष्ठित हैं ।नारद जी ने महर्षि वाल्मीकि से राम कथा रामायण की रचना तथा महर्षि व्यास से कृष्ण कथा भागवत की रचना कराई । देवर्षि नारद प्रथम पत्रकार /  पत्रकार पुरोधा और पत्रकारों के आद्य आचार्य माने जाते हैं। नारद जी समस्त लोकों में भक्ति का प्रचार तथा लोक कल्याणार्थ तत्पर रहते हैं।

नारद जी ब्रह्मांड के समस्त संवाद इस लोक से उस लोक में संप्रेषित करते  हैं । इस वर्ष ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा 26 मई 2021 को नारद जयंती सनातन धर्म परिषद एवं विश्व साधु परिषद के संयुक्त तत्त्वावधान में मनाई जाएगी।
डॉ.स्वामी भगवदाचार्यअध्यक्ष,सनातन धर्म परिषद
एवं विश्व साधु परिषद की अध्यक्षता में श्री नारद जी की जयंती मनाई जाएगी।

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