51 दिन तक रोज "सुंदरकांड" के पाठ से खुद ही कट जाते हैं सारे "संकट" 

जै बजरंगबली
स्वामी रामानंद सरस्वती ने हनुमान जी के महात्म्य के सत्संग पर कही

 भक्त को हर संकट से उबारते हैं हनुमानजी : स्वामी रामानंद सरस्ववती                             

  आर. एल पाण्डेय                   

   लखनऊ. प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी को आराध्य मानकर जो श्रद्धालु दीन भाव से अपनी व्यथा सुनाता है, हनुमान जी पलभर में भक्त का संकट हर लेते हैं. देश - दुनिया में सबसे ज्यादा हनुमान मंदिर और हनुमानजी के भक्त हैं. उन्हें अपने भगवान पर पूरा भरोसा है. तभी तो वह कहते हैं ' कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होय तात तुन्ह पाहीं.' जिसे हनुमानजी की कृपा का सहारा मिल गया, उसका जीवन वास्तव में सार्थक हो गया

.यह बात संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष स्वामी रामानंद सरस्वती ने आध्यात्मिक मासिक पत्रिका ' हनुमत कृपा ' के सम्पादक नरेश दीक्षित से ' जीवन में हनुमानजी की कृपा का माहात्म्य ' विषय पर सत्संग में कही. स्वामीजी ने कहा कि हनुमानजी का सच्चा भक्त बनना आसान नहीं है. मन, वचन व कर्म तीनों में प्रभु भक्ति को समावेश करके ही इसे प्राप्त किया जा सकता है.

101 हनुमान चालीसा के पाठ से सारी परेशानी अपने आप खत्म होती है 

विश्वास व श्रद्धा भाव से राम नाम, हनुमान चालीसा, सुंदर कांड या श्रीरामचरितमानस का पाठ करने से हनुमानजी प्रसन्न हो जाते हैं. जीवन में कितनी भी विषम परिस्थितियां हों. यदि भक्त 51 दिन तक प्रतिदिन सुंदर कांड या 101 बार प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने का संकल्प पूरा कर लेता है, तो हनुमानजी की कृपा से उसकी सारी परेशानियां अपने आप समाप्त हो जाएंगी. यह उनका दृढ़ विश्वास है.

स्वामी रामानंद जी ने बताया कि संसार में हनुमानजी ही सबसे जल्दी खुश होने और मनवांछित वरदान देने वाले देवता हैं. लखनऊ में ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार को ' बड़े मंगल ' के रूप में मनाये जाने की पुरानी परम्परा है. कल (आठ जून) को ज्येष्ठ का दूसरा ' बड़ा मंगल ' है.

कोरोना महामारी के संक्रमण के मद्देनजर लगे लॉकडाउन की वजह से शहर का प्रतिष्ठित हनुमान सेतु मंदिर सहित सभी मंदिर  भक्तों के दर्शन - पूजन के लिए बंद हैं वरना बड़े मंगल की भोर से ही दशकों से हजारों भक्तों का ताँता मंदिरों के मुख्य द्वार पर लगता रहा है.स्वामी जी महाराज ने बताया कि हनुमान जी को प्रभु श्रीराम (बड़े सरकार) का गुणगान करना बहुत प्रिय है. जो श्रद्धालु रामभक्त है उसे हनुमानजी स्वयं अपना लेते हैं. जिस प्रकार हनुमानजी के ह्रदय में प्रभु श्रीराम व माता सीता विराजमान हैं. सभी भगवत प्रेमियों को हनुमानजी के इसी स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा करनी चाहिए.

ईश्वर में आस्था रखने वाला कभी निराश नही हो सकता 

उन्होंने बताया कि  मनुष्य के जीवन में सुख - दुःख धूप व छाँव की तरह आते - जाते है. इससे कभी घबड़ाना नहीं चाहिए. प्रभु को समर्पित कर सभी कार्य करते रहना ही सन्मार्ग पर चलना है. ईश्वर में आस्था रखने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं हो सकता है. विपरीत परिस्थिति में भी मुस्कुराते रहना सच्चे भक्त की पहचान है.

Share this story