हिमाचल प्रदेश के जुब्बल-कोटखाई के विधायक एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा का पीजीआई में निधन

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हिमाचल प्रदेश के जुब्बल-कोटखाई के विधायक एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा का पीजीआई में निधन

हिमाचल भवन चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की

*सत्यदेव शर्मा सहोड़*

शिमला। हिमाचल प्रदेश के विधानसभा क्षेत्र जुब्बल कोटखाई के विधायक एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा का आज सुबह करीब सवा चार बजे पीजीआई चंडीगढ़ में निधन हो गया। कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद पोस्ट कोविड अफेक्ट से जूझ रहे थे। करीब 20-25 दिनों से पीजीआई में भर्ती थे। उनकी दूसरी बीमारी डायग्नोज नहीं हो पा रही थी और उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। कल ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचकर उनकी कुशलक्षेम पूछा था। बरागटा हिमाचल प्रदेश सरकार में मुख्य सचेतक भी थे। 


करीब 10 बजे उनका पार्थिव शरीर हिमाचल भवन चंडीगढ़ पहुंचा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप सहित अन्य भाजपा नेताओं ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। करीब 10.20 मिनट पर उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए हिमाचल प्रदेश स्थित उनके पैतृक गांव कोटखाई के लिए एंबुलेंस के माध्यम से भेज दिया गया।


नरेंद्र बरागटा का जन्म 15 सितंबर 1952 को घर गांव टहटोली तहसील कोटखाई जिला शिमला में हुआ था। उनके दो पुत्र चेतन ब्रागटा व ध्रुव बरागटा हैं। बरागटा 1969 में डीएवी स्कूल शिमला में छात्र संसद के महासचिव बने तथा 1971 में एसडीबी कॉलेज शिमला के केंद्रीय छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुने गए। 


संगठन की दृष्टि से 1978 से लेकर 1982 तक वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे तो 1983 से लेकर 1988 तक जिला शिमला भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री बने। 1993 से लेकर 1998 तक भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इसके अतिरिक्त वह राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे । 1998 में वह शिमला विधानसभा चुनाव क्षेत्र से विधायक बने तथा तत्कालीन धूमल सरकार में उन्हें बागवानी मंत्री बनाया गया। उसके बाद जुब्बल कोटखाई चुनाव क्षेत्र से 2007 से लेकर 2012 तक विधायक बने तथा तत्कालीन धूमल सरकार में बागवानी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री रहे। वर्तमान में वह जुब्बल कोटखाई चुनाव क्षेत्र से विधायक व सरकार में मुख्य सचेतक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

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