शिव सत्संग मंडल के धर्मोत्सव में संतों ने बताया कैसे लोग पृथ्वी पर भार हैं 

शिव सत्संग मंडल

 राष्ट्र को संगठित व समाज को जाग्रत करने में संतों का विशेष योगदान: आचार्य अशोक


(आर एल पाण्डेय)
लखनऊ।शिव सत्संग मण्डल के ग्रीष्मकालीन धर्मोत्सव में मंडलाध्यक्ष आचार्य अशोक ने कहा कि आद्य शंकराचार्य, स्वामी श्रध्दानंद, बुध्द, महावीर, दयानंद सरस्वती, चाणक्य, समर्थ गुरु रामदास, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी रामतीर्थ, अरविंद घोष, गुरु गोविंद सिंह, स्वामी विवेकानंद, वंदा वैरागी,संत कबीर आदि अनेकों संत-महापुरुषों ने धर्म के साथ-साथ राष्ट्र को संगठित व समाज को जागृत करने में विशेष योगदान दिया।

शिव की उपासना से जीवन सुखमय हो जाता है 


टोडरपुर के निकटवर्ती शिव सत्संग मण्डल,आश्रम हुसेनापुर धौकल में आयोजित धर्मोत्सव में कहा कि
शिवोपासना, शिव के ध्यान और भजन से जीवन सुखमय हो जाता है। परिवारों में सुख शांति स्थापित होती है।मंडलाध्यक्ष ने कहा कि आत्मचिंतन से श्रेष्ठ मूल्यों को जीवन में उतारने का मार्ग प्रशस्त होता हैं।


महात्मा विनोद मिश्र दादाजी ने बताया कि जीवन अनमोल है।इस अनमोल जीवन के महत्व को समझते हुए एक एक क्षण का उपयोग करते हुए आत्मचिंतन करें।और समग्र जीवन को सफल बनाएं।


लखनऊ मंडल के अध्यक्ष राजेश पांडेय ने कहा कि विश्व के विभिन्न देशों में संतों की एक लम्बी श्रृंखला दिखायी पड़ती है। किन्तु भारतीय संत परम्परा को सर्वोपरि माना गया है।त्याग, तपस्या और लोक कल्याण के लिए ही संत धरती पर विचरण करते हैं।

आत्मविश्वास को जगाइए अंधविश्वास को भगाइये 

लखीमपुर के जिलाध्यक्ष जमुना प्रसाद ने कहा कि शिव सत्संग मण्डल के संस्थापक संत श्री कृष्ण कन्हैया एवं संत श्रीपाल जी महाराज ने समाज को जाग्रत कर सत्य की राह दिखाई।
जिला महामंत्री रविलाल ने आत्मविश्वास को जगाइये , अंधविश्वास को दूर भगाइए। भय मुक्त जीवन का आनन्द लीजिए।सत्य को जानने और समझने के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती कृत सत्यार्थ प्रकाश का स्वाध्याय अवश्य ही करना चाहिए।


ईश्वर से प्रार्थना है कि हमारी बुद्धियों को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
व्यवस्था प्रमुख यमुना प्रसाद ने शिव नाम की महिमा बताते हुए कहा कि परमात्मा शिव के तत्व ज्ञान से जीवन में श्रेष्ठता आती है और बुराइयों का विनाश होता है।


शाहजहांपुर के जिलाध्यक्ष डॉ कालिका प्रसाद ने बताया कि शिवोपासना, शिव के ध्यान और भजन से जीवन सुखमय हो जाता है। परिवारों में सुख शांति स्थापित होती है।आत्मचिंतन से श्रेष्ठ मूल्यों को जीवन में उतारने का मार्ग प्रशस्त होता हैं।


प्रचारक शिक्षक प्रेम कुमार ने बताया कि जिस मनुष्य के पास न विद्या है , न तप है न दान देने की प्रवृत्ति है । उसके पास न ज्ञान है न उत्तम आचरण है , न तो कोई गुण है और न धर्म के प्रति आस्था है , वे लोग इस मृत्यु लोक मे पृथ्वी पर भार बनकर मनुष्य के रूप मे पशु होकर विचरण करते है ।

दान देना तो प्रकृति से सीखना चाहिए


वरिष्ठ सत्संगी रामौतार ने कहा कि जब भी दान की बात है राजा हरिचंद्र, कर्ण का दान आदि का नाम सबसे पहले लिया जाता है। शास्त्रों में दान देने के बारे में विस्तार से बताया गया है। दान के बारे में कहा जाता है कि दान देने के लिए हमें प्रकृति से सीख लेनी चाहिए, जिस तरह वृक्ष परोपकार के लिए फल देते हैं, नदियां परोपकार के लिए फल देती हैं उसी तरह मनुष्य को भी दान करना चाहिए।


केंद्रीय संयोजक अम्बरीष कुमार सक्सेना एवं मोहित राजपूत के संयुक्त संचालन में इस धर्मोत्सव में महात्मा रवींद्र,अनुज कुमार,श्री कृष्ण,राम चन्द्र,भैया लाल एवं अंशुलता ने प्रेरणादाई भजन सुनाए। कार्यक्रम का शुभारंभ शिव सत्संग मण्डल के राष्ट्रीय महामंत्री त्रिपुरेश पांडेय ने दीप प्रज्वलित कर, योग प्रशिक्षक डॉ संदीप चौरसिया ने सामूहिक ईश प्रार्थना से किया।

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