स्वाभिमान से समझौता कभी न करें पत्रकार : नरेश दीक्षित   

Naresh

Lucknow ( आर. एल. पाण्डेय )   लखनऊ. समाज के हर क्षेत्र में आई गिरावट का असर पत्रकारिता पर भी पड़ा है. शहर हो या गांव अब निष्पक्ष खबर लिखना किसी चुनौती से कम नहीं है. निहित स्वार्थों के लिए पत्रकार को कभी स्वाभिमान से समझौता नहीं करना चाहिए. यह बात रवींद्र पल्ली (फ़ैजाबाद रोड़) स्थित हनुमत कृपा पत्रिका के कार्यालय में पत्रकारिता दिवस पर आयोजित बैठक में पत्रिका के सम्पादक नरेश दीक्षित ने कही.

वरिष्ठ पत्रकार श्री दीक्षित ने कहा कि व्यावसायिक पत्रकारिता के दौर में पत्रकारों के लिए भी निष्पक्ष होकर खबर लिखना बहुत कठिन है. उसे अख़बार में खबर से ज्यादा विज्ञापन पर नजर रखनी पड़ती है. जनप्रतिनिधि हों या व्यवसायी सभी अपने पसंद की खबर छपने पर ही विज्ञापन के लिए तैयार होते हैं. सही खबर लिखने पर जैसे ही अख़बार के मालिक या सम्पादक को कोर्ट का नोटिस मिलता है. प्रबंधतंत्र के हाथ - पाँव फूलने लगते हैं और पत्रकार पर समझौता के लिए दबाव डाला जाने लगता है.

न्यूज पोर्टल ' आपकी खबर ' के सम्पादक राजीव ने कहा कि अब पत्रकारिता मिशन नहीं नौकरी हो गयी है. नौकरी बरकरार रहे. किसी को खबर से दिक्क़त न हो. सब संतुष्ट रहें और अखबारों को भरपूर सरकारी व निजी विज्ञापन मिलते रहें, यही पत्रकारिता का उद्देश्य हो गया है.युवा पत्रकार आचार्य रामू पाण्डेय ने पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के अख़बार व पत्रकार सब बदल गये हैं. अख़बारों का प्रबंधतंत्र खबरों पर कम विज्ञापन पर ज्यादा जोर देने की बात करता है.   उधर, विज्ञापनदाता खबर दिखा कर छापने तक की बात करने लगा है.

निष्पक्ष खबर लिखना और छापना बीते दिनों की बातें हो गयी हैं. पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि छोटे हों या बड़े, सभी अख़बारों की एक सूत्रीय नीति है कि कम से कम कर्मचारी व खर्च में ऐसे अख़बार छपें जिसमें ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन हों. मीडिया जगत में कर्मचारियों के प्रति प्रबंधतंत्र की संवेदनहीनता चिंताजनक है. पत्रकार की सारी ऊर्जा हमेशा इसी चिंता में लगी रहती है कि उससे खबर लिखने से लेकर अधिकारियों से व्यवहार में कभी कोई भूल न हो जाये जिससे नौकरी पर बन आये.

Share this story