नारद जयंती विशेष न्याय एवं धर्म के तत्वज्ञ थे देवर्षि नारद 

नारद जयंती

 अविरल भक्ति व आध्यात्मिक ज्ञान के प्रतीक हैं नारद जी : डॉ. द्विवेदी                                     आर. एल. पाण्डेय                      लखनऊ. देवर्षि नारद जी अविरल भक्ति एवं आध्यात्मिक ज्ञान के प्रतीक हैं. वह भगवान विष्णु जी के परम् भक्त और सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं. ब्रह्मा जी के आदि मानस पुत्र व ऋषि सनद, संनंदन, सनातन और सनत कुमार इनके बड़े भाई हैं. नारद जी को वाद्य यंत्र वीणा का अविष्कारक भी कहा जाता है.

इसी वीणा के साथ वह तीनों लोकों में विचरण करते हुए सदैव हरि नाम का संकीर्तन करते रहते हैं. यह बात आज नारद जयंती पर रवींद्र पल्ली कालोनी स्थित हनुमत कृपा पत्रिका के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिनेश चंद्र द्विवेदी ने कही.हनुमत कृपा पत्रिका के प्रधान सम्पादक डॉ. द्विवेदी ने बताया कि उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमान्त पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नारद जी की जयंती मनाई जाती है जबकि दक्षिण भारत में मान्य अमवस्यांत पंचांग के मुताबिक यह तिथि वैशाख कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को नारद जी की जयंती मनाई जाती है. पत्रिका के सम्पादक नरेश दीक्षित ने कहा कि नारद जी की भक्ति, निष्ठा और ज्ञान को प्रतिपादित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण जी कहते हैं ' देवर्षीनाम च नारद:' अर्थात देव ऋषियों में मैं नारद हूँ.

उन्होंने बताया कि वायु पुराण के अनुसार देवलोक में प्रतिष्ठा पाने वाले ऋषिगण देवर्षि कहलाते हैं. संकट मोचन फाउंडेशन के सचिव  अशोक द्विवेदी ने बताया कि नारद जी के अद्वितीय आध्यात्मिक ज्ञान के बारे में महाभारत के सभापर्व के पंचम अध्याय में कहा गया है कि देवर्षि नारद वेद और उपनिषदों के मर्मज्ञ, देवताओं के पूज्य इतिहास पुराणों के विशेषज्ञ, अनेक कल्पान्त की बातों को जानने वाले तथा न्याय एवं धर्म के तत्वज्ञ थे. उन्हें शिक्षा, व्याकरण, आयुर्वेद और ज्योतिष का प्रकाण्ड विद्वान, संगीत विशारद, प्रभावशाली वक्ता और मेधावी नीतिज्ञ माना जाता है.

फाउंडेशन के सचिव धर्मेंद्र सक्सेना ने कहा कि नारद जी विद्वानों की समस्याओं का समाधान करने वाले महापंडित, धर्म अर्थ काम मोक्ष के ज्ञाता, परम् तेजस्वी और सर्वत्र गति वाले हैं. नारद पुराण और नारद संहिता के रचनाकार स्वयं नारद जी ही हैं.सनातन धर्म परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य रामू पाण्डेय ने कहा कि नारद पुराण में वर्णित ज्योतिष आख्यान तथा ज्योतिष के लिए ही समर्पित नारद संहिता से स्पष्ट हो जाता है कि नारद जी न केवल भक्ति अपितु ज्योतिष के भी प्रधान आचार्य हैं.

उनसे प्रकाण्ड ज्योतिषी तीनों लोकों में दूसरा कोई नहीं है.  आपकी खबर न्यूज पोर्टल के चेयरमैन राजीव का कहा कि देवर्षि नारद जी आदि पत्रकार हैं. वह ही आदिकाल से देवलोक, मृत्युलोक व पाताल लोक में भ्रमण कर एक लोक की खबर दूसरे लोक में पहुंचाते रहे हैं. उनकी लोक कल्याण की भावना के सभी लोकवासी हमेशा कायल रहे हैं. हनुमान भक्त रमेश शर्मा का कहना था कि नारद जी अजर अमर हैं. इसलिए नारद जी की जयंती नहीं जन्मोत्सव मनाया जाना चाहिए. भगवान विष्णु जी के सभी अवतारों में नारद जी उनके अनन्य सहयोगी रहे हैं.

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