शंकराचार्य जयंती मनाई गई जानिए कैसे बने मठ 

शंकराचार्य जयंती मनाई गई जानिए कैसे बने मठ
 

शंकराचार्य जयंती मनाई गई

आर एल पाण्डेय
लखनऊ। सनातन धर्म परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ स्वामी भगवदाचार्य जी महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म उद्धारक, महान दार्शनिक  आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ईसा पूर्व वैशाख शुक्ल पंचमी केरल में कलाड़ी के नंबूदरी ब्राम्हण परिवार में हुआ था इस वर्ष वैशाख शुक्ल पंचमी 17 मई को शंकराचार्य जयंती मनाई गई।  जीवन पर्यंत सनातन धर्म के प्रचार तथा वार्ता में अथक परिश्रम करके सनातन धर्म, वेदों की मर्यादा को  उज्जीवित रखा। शंकराचार्य के गुरु का नाम आचार्य गोविंद भगवत्पाद था ।चार्वाक ,जैन तथा बातों का खंडन करके शास्त्रीय मतों को प्रतिपादित किया। भारत के चारों कोने में चार मठों की स्थापना किया ।ज्योतिष पीठ बद्रीनारायण,श्रृंगेरी,द्वारिका शारदा पीठ एवं पुरी  गोवर्धन पीठ इन चार पीठों पर चार शंकराचार्य को नियुक्त किया । दशनामी शंकराचार्य में निम्न प्रकार से है । सरस्वती, गिरि, पुरी, वन, पर्वत, अरण्य, सागर, तीर्थ, आश्रम और भारती उपनाम से उनके उत्तराधिकारी जाने जाते हैं। शंकराचार्य जी ने उपनिषद, ब्रह्म सूत्र एवं गीता पर भाष्य किया।उन्होंने करीब सैकड़ों पुस्तकों की रचना की।श्रृंगेरी मठ का महावाक्य "अहम् ब्रह्मास्मि " है । उक्त जानकारी राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी आचार्य आर एल पाण्डेय ने दी।

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