श्रीमद्भागवत कथा  तारागाँव में बड़े धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव 

Bhagwat katha
 ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

हरदोई। ग्राम तारागाँव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की अमृतमयी कथा छोटी काशीधाम  के सुप्रसिद्ध कथावाचिका पूज्या रोली त्रिवेदी जी ने श्रीकृष्ण जन्म की मधुर बधाईयों से कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि  श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव बड़े धूमधाम से कई महीनों तक बृज में मनाया गया।

भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य बाल लीलाओं से बृज के गोपी,ग्वालों को आनंद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि माखन चोरी द्वारा हर गोपी के घर में जाकर भगवान उनका मनोरथ पूर्ण करते हैं। भगवान ने बृज में रहते हुए पांच व्रत लिए पहला बृज में कभी केश नहीं कटवाए, दूसरा बृज में कभी सिले वस्त्र नहीं पहने, तीसरा बृज में कभी अस्त्र नहीं उठाए, चौथा बृज में कभी पादुका धारण नहीं की और पांचवां बृज में जब तक रहे तब तक मोर मुकुट के अलावा कोई मुकुट धारण नहीं किया, भगवान की बाल लीलाओं, पूतना-मोक्ष, तृणावर्त उद्धार, नामकरण संस्कार, माखन चोरी लीला आदि की कथा विस्तार से सुनाई गोव‌र्धन भगवान की पूजा का प्रसंग सुनाते हुए वाजपेयी  महाराज जी ने कहा कि गोवर्धन पूजा परमात्मा में आस्था का प्रतीक है उन्होंने कहा कि भगवान ने कर्म की प्रधानता बताने के साथ ही देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए सर्वज्ञ होते हुए भी दीपावली के दूसरे दिन तमाम पकवान, मेवा-मिष्ठान्न बनते देख अबोध की तरह नंदबाबा से पूछा, पिताजी यह क्या हो रहा है! इसका क्या उद्देश्य है

! नंदबाबा द्वारा इंद्रयोग की तैयारी सुनकर भगवान ने कहा कर्म से ही शत्रु, मित्र, हानि-लाभ, जीवन-मरण आदि का निर्धारण होता है, अत: कर्म ही श्रेष्ठ है। फलदाता इंद्र नहीं कोई अन्य है, जो कर्मों के अनुसार फल देता है, जिससे आसानी से आजीविका चले, पूजा उसकी करनी चाहिए। भगवान की भक्त-वत्सलता पर प्रकाश डालते हुए रोली जी नें कहा कि इससे बड़ी बात भला क्या हो सकती है! जो सारे विश्व का भरण-पोषण करने वाला है वह स्वयं गिरिराज के अंदर बैठ कर प्रसाद प्राप्त कर रहा है।

कथावाचक पूज्य पियूष दीक्षित जी नें गोवर्धन पूजा के मधुर गीतों से श्रोता पंडाल में झूम उठें उसके बाद पियूष  जी ने भगवान की अमृतमयी कथा श्रवण कराई इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ खण्डकार्यवाह राजेश्वर सिंह जी एवं  कथा आयोजक दिनेश वाजपेयी,राजरानीं वाजपेयी,अमित वाजपेयी शौरभ मिश्रा समेत वैभव वाजपेयी,मोहित वाजपेयी,आयुष,सुरजीत,मोनू,अवनीश, योगेश विक्रम सिंह,निर्भय सिंह,श्याम सिंह,अजय सिंह, अतुल पाण्डेय,विनोद पाण्डेय, सत्यपाल सिंह यादव,बृजकिशोर,अजय,नीरज श्रीवास्तव, प्रदीप पाठक,रमेश पाठक,रामकिशोर पाठक,प्रदीप पाठक,छोटेलाल पाण्डेय,रामौतार मिश्रा,रामशरण ,मनोज शुक्ला,रूक्मंगल सिंह,हुकुम सिंह, अरूणे तिवारी,परशुराम शुक्ला,अरविन्द यादव,रोहित यादव,शिवम दीक्षित,अमर सिंह,आदि कई ग्राम एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

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