बिना आवाज की लाठी 

Indian politics

आज देश के अनेकों बड़े राजनेता जो अपनी पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्री तक रह चुके हैं ये सब आज अपनी पहचान बचाने के लिए जी तोड़ संघर्ष कर रहे हैं उसी तरह पेड  मीडिया के पेड पत्रकार अजीत अंजुम, पुण्य प्रसून बाजपेयी, बरखा दत्त, अभिसार शर्मा, आशुतोष कुमार, प्रभु चावला,रविश कुमार ये सब बड़े बड़े नाम जो 2014 से पहले तक भारतीय मीडिया और राजनीति की दिशा व दशा तय करते थे और अपने-अपने मीडिया हाउस के बॉस हुआ करते थे वे या तो गुमनाम हो गए या फिर यूट्युबर बन चुके हैं क्योंकि इनको सुनने वालों की संख्या 2014 के बाद तेजी से घट चुकी है ! 
          इसी तरह बालीवुड के शाहरुख और आमिर खान,करण जौहर,महेश भट्ट जैसे लोगों के पीछे आम आदमी लाठी लेकर पड़ा हुआ है कि इधर इनकी फिल्म आये, उधर फ्लाप कराया जा सके। सलमान बच गये क्योंकि सलीम खान ने सही समय पर मंदिरों में जाकर प्रार्थना कर ली और बेटे ने घर पर ही होली और गणेश भगवान की स्थापना पूजा कर ली ! इरफ़ान हबीब जैसे लोगों को खुद को जिन्दा दिखाने के लिए अब कलम छोड़कर वास्तव में देशविरोधी बनकर मंच पर राज्यपाल से धक्कामुक्की तक करना पड़ रहा है। वहीं हमेशा मुफ्त की रोटी तोड़ने वाली रोमिला थापर जैसों को नौकरी के लिए अपना सीवी जमा करना पड़ रहा है। नरेंद्र मोदी की मुखर आलोचक और प्रख्यात नृत्यांगना मल्लिका साराभाई जो कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर मोदी सरकार की बड़ी निंदा करती हैं अब उनके कार्यक्रम आयोजक खुद उन्हें मोदी विरोध के कारण अपने कार्यक्रमों में बुलाना तक पसंद नहीं करते हैं ! करोड़ों-अरबों की मालकिन प्रियंका जिनके पास रहने के लिए एक घर तक नहीं था उनको मोदी विरोध के कारण आज अपना मुफ्त का सरकारी बंगला छोड़कर दूसरा मुफ्त का घर ढूँढना पड़ रहा है !
                   अवार्ड वापसी गैंग के मुखिया तो क्या उनके तथाकथित आका भी अब गुमनामी के अंधेरों में खो चुके हैं ! कभी IRS रहे उदित राज़ मोदी विरोध में खुद चुटकुला बन गये तो चुटकुला सुनाने वाले रामदास अठावले मोदी का समर्थन कर आज मंत्री बने बैठे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा, अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा को बोलने का पूरा मौका दिया गया लेकिन पार्टी से न निकाल कर इन सबको सिर्फ अपनी खीज मिटाने के लिए छोड़ दिया गया ।
            तिरंगे को कन्धा न देने की धमकी देने वाली महबूबा से मोदी ने गठबंधन भी किया लेकिन अपने राष्ट्रवादी एजेंडे के तहत गुणा गणित समझ कर उन्हें साल भर के लिये नज़रबन्द करने के साथ ही पूरे जीवन के लिए राजनीति विहीन करके छोड़ दिया। ऐसे दर्जनों उदाहरण मिल जायेंगे जिनके पास अब सिर्फ सर पटकने के अलावा कुछ नहीं बचा है । प्रभु श्रीराम मंदिर का श्रेय मैं मोदी जी को नहीं देता और शायद वो खुद भी इसका श्रेय लेना नहीं चाहते क्योंकि वो तो प्रभु श्रीराम का ही काम था उसका श्रेय भला किसी को भी क्यों दिया जाये !
          मोदी की स्थिती यह है कि पिछले 06 साल में कम से कम 10 ऐसी बड़ी घटनायें घट चुकी हैं जब उनका पुतला दहन के प्रदर्शन के दौरान खुद पुतला जलाने वाले जल गये। सोंचिये जब मोदी का पुतला खुद इतना शक्तिशाली हैं तो असली मोदी की बात फिर क्या होगी ? केजरीवाल ने खूब मोदी का विरोध किया और उनका ग्राफ गिरता गया तब किसी भले मानुष ने सलाह दी कि आप मोदी को गाली देना बन्द कर दो सब ठीक हो जायेगा और ऐसा हुआ भी,आज विरोधी होने के नाते केजरीवाल मोदी जी की जगह केंद्र सरकार के नाम पर कोसते हैं लेकिन खुल कर मोदी जी का नाम लेकर उनकी बुराई नहीं करते !
           एक भले मानुष प्रशांत किशोर ने ममता को यही सलाह दी थी और ममता ने भी सलाह मान ली। यकीन मानिये ममता का यह अकेला निर्णय उनकी सत्ता बचा ले गया ! गाली मानों मोदी के लिए सुरसा का मुंह है आप जितना गाली देंगे मोदी का कद देश-दुनिया में उतना और बढ़ेगा। नवीन पटनायक का मोदी बाल भी बांका नहीं कर पा रहे क्योंकि वह मोदी के विरोध में नहीं हैं । जिनको लगता है की उद्धव ठाकरे और संजय राउत पर मोदी की लाठी नहीं पड़ेगी, वह अभी मोदी को समझ नहीं पाये हैं ! 
             अंत में आते हैं राहुल गाँधी,अंत में इसलिए क्योंकि जिसकी पार्टी का ही पूरे देश में अंत होने के साथ ही जिसका खुद का राजनीतिक जीवन भी अंत की ओर बढ़ चला हो उसका नाम तो अंत में आना स्वाभाविक ही है ! एसी बंगले में बैठकर या फिर नानी के घर छुट्टियाँ मनाते हुए जो सुबह की चाय से लेकर रात का खाना दोनों ही पूरी तरह मोदी विरोध में करता हो फिर चाहे मोदी जी देश व समाज के लिए अच्छा ही क्यों न कर रहे हों इस देश में उन्ही को हम सब राहुल गाँधी के नाम से जानते हैं और उनके मोदी विरोध का परिणाम ये है कि जिस अमेठी की सीट को गाँधी खानदान की सीट कहा जाता था वहाँ से मोदी विरोध के कारण मुँह छिपाकर उन्हें हजारों किलोमीटर दूर केरल भागना पड़ा ! सबसे ज्यादा दिक्कत बेचारे कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं को होती है जिनको राहुल गाँधी की मीटिंग के लिए गरीब और मजदूरों को बसों में ठूंसकर लाने का जिम्मा सौंपा जाता है वे बेचारे गरीब लोग कभी इस शहर कभी उस शहर राहुल गाँधी की रैली के बहाने ही सही देश भ्रमण तो कर लेते हैं वरना बेचारों को घूमना कहाँ नसीब ! अब भाई ये तो जगजाहिर है कि यदि “कांग्रेस में रहना है तो, गाँधी-गाँधी कहना है” का नारा तो आम है ऐसे कार्यकर्ताओं को जो कांग्रेस की रैली के लिए जबरदस्ती भीड़ जुटाने का जोखिम उठाते हैं उनकी पीड़ा का दुखड़ा भला उनसे अच्छा और कौन समझ सकता है !  
         लेकिन ध्यान रखने वाली बात ये है कि ऐसे सभी लोग मोदी विरोध करते-करते राष्ट्रविरोध करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं और यही कारण है कि हर उस व्यक्ति पर मोदी की लाठी पड़ेगी जो राष्ट्रवाद ,भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के विरोध में है । यहाँ विश्व हिन्दू परिषद् के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्रीराम मंदिर आन्दोलन के पुरोधा रहे स्वर्गीय अशोक सिंघल जी की एक बात महत्वपूर्ण है जिसमें वह कहते थे की मोदी अवतारी पुरुष हैं और देश में 1000 साल बाद कोई हिन्दू राजा सिंहासन पर बैठा है । और हाँ भूलियेगा मत 2014 से 2021 के बीच मात्र इन 6 वर्षों में इस मोदी सरकार ने क्या-क्या बदला है ! इन 6 वर्षों में  लगभग  70 सालों का कोढ़ जो भारतीय अस्मिता पर लगा था वो धारा 370 अब हट चुकी है,जम्मू-कश्मीर अब पूरी तरह से भारत का अभिन्न अंग बन चुका है,साथ ही जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम आतंकवादियों के द्वारा ध्वस्त किये गए हजारों मंदिरों का पुनर्निर्माण हो रहा है ! राष्ट्रपति महोदय के हस्ताक्षर के बाद अब नागरिकता संशोधन बिल कानून में बदल चुका है ! अदालत के निर्णय के बाद श्री राम मंदिर निर्माण का कार्य निर्विरोध चल रहा है ! NRC पूरे देश में कभी भी लागू हो सकता है और सबसे बड़ी बात ये है कि आज लगभग सभी हिन्दू अपने सनातन धर्म के प्रति जागरूक और निष्ठावान हो चुका है इसका पूरा श्रेय मैं आदरणीय मोदी जी को ही देना चाहूँगा ! बस आगे-आगे देखते रहिये धीरज न खोइये क्योंकि धर्मशास्त्र श्रीरामचरितमानस भी हमें यही सिखाती है कि धीरज धर्म मित्र अरु नारी । आपद काल परिखिअहिं चारी।। अर्थात विपत्ति काल में ही धैर्य,धर्म,मित्र और स्त्री की असली परीक्षा की जाती है !
      विश्वास कीजिये एक-एक देशद्रोही का नम्बर आयेगा,कोई भी गद्दार और भारत माता को गालियाँ बकने वाला नहीं छोड़ा जायेगा,अब सनातन धर्म पुनः अपने गौरव को वापस ले कर ही रहेगा फिर चाहे देशद्रोही गद्दार शाहीन बाग में बैठें या फिर यही लोग किसान का वेश धारण कर लें या मज़दूर का या फिर कोट के ऊपर जनेऊ डालकर मंदिर ही क्यों न चले जाएँ,नम्बर तो आयेगा ही आयेगा।

                                              लेखक- पं.अनुराग मिश्र “अनु”                   
                                              स्वतंत्र पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

नोट-ये लेखक की मौलिक रचना है,इस लेख के सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं !

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