पति की लम्बी उम्र के लिए सुहागिनों ने रखा वट सावित्री व्रत

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 लखनऊ   (आर. एल. पाण्डेय)  वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए गोकुल ग्राम योजना प्रथम आवास विकास कॉलोनी की अधिकतर सुहागिनों ने घर के नजदीक बरगद के वृक्ष के पास जाकर ब्रह्ममुहूर्त में ही पूजा शुरू कर दी । प्रातः काल चार बजे से सुहागिनों ने वट वृक्षों की तरफ आना शुरू कर दिया। उषाकाल में सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा की तथा एक - दूसरे को सत्यवान- सावित्री की कथा सुनाई। बरगद के पेड़ का महत्व बताते हुए घी के दिए जलाए,वटवृक्ष के फेरे लेते हुए कच्चा धागा अर्पण किया।कन्याओं को खरबूजा एवं  प्रसाद की सामग्री दान की।


इंदिरा नगर बी ब्लॉक निवासी नीलम दीक्षित, सीमा दीक्षित,संतोष शुक्ला, अनुजा  व पूजा ने बताया कि बीते कई दशक से पास में ही स्थित सरकारी अस्पताल परिसर में लगे पुराने बरगद के पेड़ की पूजा वट सावित्री व्रत वाले दिन करती रही हैं. पूजा में महिलाओं की खूब भीड़ भी होती थी. महामारी कोरोना के मद्देनजर अस्पताल प्रशासन ने परिसर में लगे बरगद के पेड़ के चारों ओर से बंद करवा दिया। कोई सुहागिन यहाँ पूजा नहीं कर सकीं।ऐसे में अब पूजा के लिए बरगद का पेड़ ढूढ़ने कहां जाये।घर की छत पर गमले में लगे बरगद के पेड़ की ही पूजा करके  वट सावित्री व्रत पूरा कर लिया।आचार्य आर एल पाण्डेय ने कहा कि भारतीय आदर्श नारीत्व प्रतीक वट सावित्री व्रत  सुहागिन  महिलाएं अपने पति की अखंड लम्बी आयु एवं संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना से रखती हैं । पुरातन काल में सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किया था. तभी से यह व्रत वट सावित्री व्रत के रूप में मनाया जाता है . वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास होता है। इस तिथि को वट वृक्ष के नीचे वट सावित्री व्रत करने से मनोवांछित कामना की पूर्ति होती है।

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