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Ram katha -भगवान शिव और पार्वती के विवाह में कहीं नही हुई दहेज की चर्चा

आज समाज की सबसे बड़ी विडंबना दहेज है दहेज रूपी दानव हिंदू समाज को खोखला कर रहा है

Ramcharit manas
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Ram katha 

Ram katha balrampur मानस परिवार सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के तृतीय दिवस में प्रेम मूर्ति युवा संत सर्वेश जी महाराज ने शिवजी के पावन विवाह का वर्णन किया कि बाबा शिव जी को पाने के लिए पार्वती जी ने घोर तप किया पार्वती तप किनह अपारा करहु तास अब अंगी कारा सब शिव बाबा ने स्वीकार किया और कहा सिर धर आयसु करब तुम्हारा परम धर्म यह नाथ हमारा और कथा प्रसंग को बढ़ाते हुए बताया कि शिव बाबा और पार्वती जी के बीच विवाह में कहीं भी दहेज की चर्चा नहीं आई .

संत सर्वेश जी महाराज ने कहा कि दुल्हन ही दहेज है आज समाज की सबसे बड़ी विडंबना दहेज है दहेज रूपी दानव हिंदू समाज को खोखला कर रहा है हर किसी को इस से सजग होना चाहिए हमारे समाज से दहेज रूपी दानव समाप्त होना चाहिए बाबा शिव जी ने पुनः विवाह किया और इसी बीच में बाबा तुलसी मानस में लिखते हैं पानी ग्रहण जब कीन्ही महेशा हिय हरशे तब सकल सुरेशा



हर किसी को आनंद हुआ यहां तक इंद्र आदि सब देवी देवता आकाश मार्ग से पुष्प वृष्टि किए और साथ ही विदाई बाबा शिव जी की पार्वती के साथ हुई मैना माता ने पार्वती जी को विदाई के समय समझाया और कहा करेहु सदा शंकर पद पूजा नारी धर्म पति देव न दूजा वचन कहत भरी लोचन बारी बहुरी लाइ कर लिनह चीनहारी बाबा तुलसी ने श्री रामचरितमानस में वर्णित किया है और कथा के विवाह शिव विवाह प्रसंग में के दौरान मौजूद रहे धीरेंद्र प्रताप सिंह धीरू भैया रवि मिश्रा जी संतोष मिश्रा जी शिवम पांडे जी डीपी सिंह जी आध्या सिंह ललिता तिवारी रेशम सिंह सुभरा शुक्ला सौरभ त्रिपाठी श्री रामनरेश त्रिपाठी शुभम मिश्रा पप्पू मिश्रा रवी शास्त्री केशव शास्त्री शुभम तिवारी राकेश दुबे अजय शुक्ला आदि लोग मौजूद रहे.

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