कनेक्टिकट जनरल असेंबली द्वारा सिख स्वतंत्रता दिवस की घोषणा को अपनाना निंदनीय: भारतीय महावाणिज्य दूूतावास

कनेक्टिकट जनरल असेंबली द्वारा सिख स्वतंत्रता दिवस की घोषणा को अपनाना निंदनीय: भारतीय महावाणिज्य दूूतावास
कनेक्टिकट जनरल असेंबली द्वारा सिख स्वतंत्रता दिवस की घोषणा को अपनाना निंदनीय: भारतीय महावाणिज्य दूूतावास न्यूयॉर्क, 2 मई (आईएएनएस)। न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतवास ने कनेक्टिकट की जनरल असेंबली द्वारा सिख स्वतंत्रता दिवस की घोषणा को अपनाये जाने की कड़े शब्दों में निंदा करते हुये इसे नफरत और धर्माधता को बढ़ावा देने वाला कहा है।

भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने एक मई को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है, हम कनेक्टिकट जनरल असेंबली में एक अवैध अधिनियम से संबंधित की गई घोषणा की निंदा करते हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि कुछ उपद्रवी तत्व अपने नापाक इरादों का पूरा करने के लिये असेंबली के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका इरादा समाज में भेदभाव पैदा करना और धर्माधता तथा नफरत को बढ़ावा देना है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि अमेरिका और भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में इस तरह के हिंसा के एजेंडे की कोई जगह नहीं है।

महावाणिज्य दूतावास ने यह भी कहा है कि अमेरिका की राजधानी में स्थित भारतीय दूतावास और महावाणिज्य दूत इस मुद्दे को संबंधित अमेरिकी सांसदों के समक्ष समुचित तरीके से उठायेंगे।

ग्लोबल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पीपल ऑफ इंडिया ऑरिजिन के अध्यक्ष थॉमस अब्राहम ने आईएएनएस ने कहा कि उनके समूह की कनेक्टिकट इकाई इस वक्तव्य को जारी करने वाले असेंबली सदस्यों से मुलाकात करेगी और उन्हें स्थिति की जानकारी देगी।

उन्होंने कनेक्टिकट जनरल असेंबली के इस कदम पर खेद व्यक्त करते हुये इसे भयानक कहा है। उन्होंने कहा कि असेंबली सेशन खत्म होने वाला था, जिसे देखकर एक खास गुट ने इसे अपनाया और इसकी जानकारी अधिकतर सदस्यों को नहीं थी।

कनेक्टिकट जनरल असेंबली में डेमोक्रेट पार्टी बहुमत में है। सिख स्वतंत्रता दिवस की घोषणा से संबंधित वक्तव्य पर कथित रूप से सीनेट के प्रेसीडेंट प्रोटेम मार्क लूनी, स्पीकर मैथ्यू रिडर और कनेक्टिकट की विदेश मंत्री डेनिस मेरिल के हस्ताक्षर हैं।

वक्तव्य में कहा गया है कि कनेक्टिकट जनरल असबेंली वर्ल्ड सिख पार्लियामेंट को सिख स्वतंत्रता दिवस की 36वीं वर्षगांठ को मान्यता दिये जाने की बधाई देती है।

हम 29 अप्रैल 1986 को पारित ऐतिहासिक प्रस्ताव की वर्षगांठ मनाने में आपके, आपके मित्रों और आपके परिजनों के साथ हैं।

गौरतलब है कि वर्ल्ड सिख पार्लियामेंट एक खालिस्तानी संगठन है। न्यू लंदन के द डे समाचार पत्र के मुताबिक नॉर्विच में हुये समारोह में डेमोक्रेट सवर्णजीत सिंह भी शामिल हुये थे। इस अवसर पर वर्ल्ड सिख पार्लियामेंट के नेताओं ने सिटी हॉल के सामने पंजाब का झंडा फहराया।

रविवार की रात तक जनरल असेंबली का वक्तव्य न ही ऑनलाइन रिकॉर्ड में मिला और न ही सदस्यों की वेबसाइट पर मिला। इस वक्तव्य के बारे में किसी अमेरिकी मीडिया ने भी खबर नहीं दी है।

कनेक्टिकट में पहले भी सिखों से जुड़े मुद्दे सुर्खियां बटोरते रहे हैं। नॉर्विच की पब्लिक लाइब्रेरी में 1984 के सिख दंगों का मेमोरियल है, जिसमें जनरैल सिंह भिंडरावाला की बड़ी तस्वीर 2019 में लगायी गई थी। इसे सवर्णजीत सिंह ने दान में दिया था लेकिन महावाणिज्य दूत के विरोध जताने के कारण इसे कुछ सप्ताह में हटा दिया गया था।

गत माह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी सिखों का मुद्दा उठा था। गत 18 अप्रैल को मैसाचुसेट्स के डेमोक्रेट पार्टी के सदस्य रिचर्ड नील ने वर्ल्ड सिख पार्लियामेंट को वैशाखी की बधाई दी थी और कहा था कि अच्छा करने के अपनी मान्यताओं के बावजूद सिखों को हिंसा का शिकार होना पड़ा और उन्हें अपने धर्म की रक्षा के लिये लगातार लड़ना पड़ा, खासकर भारत में 1984 में हुये सिख विरोधी दंगों के दौरान।

रिचर्ड नील का यह बयान प्रतिनिधि सभा के रिकॉर्ड में दर्ज है । हालांकि, यह बताना मुश्किल है कि रिचर्ड ने यह बयान सदन में दिया था या इसे रिकॉर्ड में बाद में जोड़ा गया।

--आईएएनएस

एकेएस/एएनएम

Share this story