कानूनों में खामियों का नतीजा है बिहार में जहरीली शराब से मौत के मामले बढ़ना

कानूनों में खामियों का नतीजा है बिहार में जहरीली शराब से मौत के मामले बढ़ना
कानूनों में खामियों का नतीजा है बिहार में जहरीली शराब से मौत के मामले बढ़ना पटना, 31 जुलाई (आईएएनएस)। ऐसे राज्य में, जहां किसी भी रूप में शराब का व्यापार पूरी तरह से प्रतिबंधित है, पटना शहर के दो युवकों की 21 जुलाई को अवैध शराब पीने से मौत हो गई।

युवकों की पहचान अखिलेश कुमार (28) और विवेक कुमार (26) के रूप में हुई, जबकि उनके दोस्त अभिषेक कुमार की आंखों की रोशनी चली गई। वे आलमगंज थाना क्षेत्र के बिस्कोमन कॉलोनी के रहने वाले थे और पटना के कुम्हरार मोहल्ले के विशाल कुमार व शशि भूषण यादव से शराब खरीदी थी।

28 जुलाई को सारण जिले के एकमा थाने के एक एएसआई को नशे की हालत में पकड़ा गया था। एएसआई की पहचान निरंजन मंडल के रूप में हुई है। वह कथित तौर पर शराब के नशे में थाने और आसपास के इलाकों में घूम रहा था।

एक प्रखंड प्रमुख के पति सहित तीन व्यक्ति 28 जुलाई को एक सरकारी कार्यक्रम में हंगामा करने के आरोप में हिरासत में लिए गए अपने एक समर्थक से मिलने गया जिले के मुफस्सिल थाने गए थे।

आरोपी मोहम्मद जफर, मानपुर प्रखंड प्रमुख खड़िया इस्लाम के पति, पंचायत समिति सदस्य मंडल कुमार और उसका भाई चंदन कुमार कथित तौर पर नशे की हालत में थाने पहुंचे। एसएचओ ने ब्रीद एनालाइजर टेस्ट करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

24 मई को, बिहार के औरंगाबाद जिले में एक जहरीली शराब त्रासदी ने 13 लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य लोगों की आंखों की रोशनी चली गई।

मृतकों की पहचान खिरियावा के पूर्व सरपंच विनोद पाल (55), सोनवा कुंवर (60), कामेश्वर कुमार (35), शिव साव, शंभू ठाकुर, अनिल शर्मा, विनय कुमार गुप्ता (30), मनोज यादव (65), रवींद्र सिंह और 4 अन्य के रूप में हुई है।

धनंजय चौधरी, मोहम्मद नेजाम और सुबोध सिंह की हालत गंभीर है और उन्हें गया जिले के शेरघाटी के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बिहार के गया में 23 मई को एक शादी समारोह के दौरान जहरीली शराब पीने से तीन लोगों की मौत हो गई और आठ को अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों की पहचान अमर पासवान (26), राहुल कुमार (27) और अर्जुन पासवान (43) के रूप में हुई है। पीड़ित जिले के आमस थाना क्षेत्र के पथरा गांव में एक शादी में शामिल होने गए थे, जहां उन्होंने देशी शराब पी थी।

शराबबंदी विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, राज्य के लोग आर्थिक रूप से गरीब हैं और उनमें से कुछ लोग पैसे कमाने के लिए इस अवैध व्यवसाय में शामिल हैं। वे शराब बनाने और उसे बाजार में बेचने के लिए गलत तरीके चुनते हैं। गरीब उपभोक्ता ऐसी शराब खरीदता है, क्योंकि यह कम पैसे में उपलब्ध है।

शराब विरोधी टास्क फोर्स के एक अधिकारी ने कहा, सस्ता के चक्कर में लोग नकली शराब के शिकार हो जाते हैं।

पटना के डॉक्टर विनोद कुमार ने कहा कि महुआ या चावल जहरीला हो गया और ग्रामीणों की जान ले ली। उन्होंने कहा, महुआ, चावल आदि का उपयोग करके देशी शराब का निर्माण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अक्सर होता है। उन्होंने शराब को और अधिक नशीली बनाने के लिए ज्यादा मात्रा में अमोनियम क्लोराइड (नौसादर) का उपयोग किया।

राघोपुर ब्लॉक के एक ग्रामीण राधे श्याम यादव ने कहा, वैशाली जिले के राघोपुर क्षेत्र में हमारे पास बड़ी संख्या में देशी शराब निर्माण इकाइयां हैं। स्थानीय पुलिस इसे अच्छी तरह से जानती है, लेकिन वे घातक घटनाओं के बाद ही कार्रवाई करती है। क्षेत्र में हर जगह व्यापार और खपत हो रही है और यह बात पुलिस भी जानती है, लेकिन इस तरह की घटनाओं के बाद चुनिंदा कार्रवाई करती हैं।

बिहार के मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, बेतिया, समस्तीपुर, वैशाली, नवादा, गया, औरंगाबाद, पटना, मधेपुरा और नालंदा समेत लगभग हर जिले में जहरीली शराब की त्रासदी हुई है. यह मुद्दा नीतीश कुमार सरकार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है, खासकर उसके गठबंधन सहयोगी भाजपा और हम के इसके बारे में बेहद मुखर होने के बाद।

ये कुछ उदाहरण हैं, जो दर्शाते हैं कि राज्य में शराबबंदी कैसे विफल रही है और जमीन पर इसके दोषपूर्ण कार्यान्वयन के कारण क्या हैं।

ऐसा लगता है कि शराब विरोधी कार्य बल, बिहार पुलिस और आबकारी विभाग सहित कानून प्रवर्तन एजेंसियां निषेध नीति को धरातल पर ठीक से लागू करने में विफल रही हैं। इसके अलावा, इसके अधिकारी शराब बेचने के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

20 जुलाई को 4 महिलाओं सहित 19 होमगार्ड कर्मियों ने आरोप लगाया कि मुजफ्फरपुर में आबकारी विभाग के अधीक्षक उन्हें शराब बेचने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से भी शिकायत की।

--आईएएनएस

एसजीके

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