तीन साल की देरी से ब्लैक जेल मुआवजा अमेरिका के मानवाधिकार ऋण को ढक नहीं सकता

तीन साल की देरी से ब्लैक जेल मुआवजा अमेरिका के मानवाधिकार ऋण को ढक नहीं सकता
तीन साल की देरी से ब्लैक जेल मुआवजा अमेरिका के मानवाधिकार ऋण को ढक नहीं सकता बीजिंग, 12 जनवरी (आईएएनएस)। 2018 में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने फैसला सुनाया कि लिथुआनिया की सरकार ने अमेरिकी खुफिया विभाग सीआईए को फिलिस्तीनी अबू जुबैदाह को अपनी ब्लैक जेल में बंद करने की अनुमति देकर यातना के उपयोग पर रोक लगाने वाले यूरोपीय कानूनों का उल्लंघन किया था। यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने लिथुआनियाई सरकार से जुबैदाह को मुआवजे के रूप में एक लाख यूरो का भुगतान करने की मांग की। तीन साल की देरी के बाद, लिथुआनिया की सरकार ने हाल ही में मुआवजे के भुगतान की घोषणा की। इस मुआवजे का मतलब है कि लिथुआनियाई सरकार ने अमेरिका का समर्थन करते हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन को स्वीकार किया, और यह वास्तव में अमेरिका के विदेशों में ब्लैक जेल नेटवर्क का एक हिस्सा है।

कई विश्लेषकों का मानना है कि लिथुआनियाई सरकार ने इस बार वाशिंगटन के इशारे पर जुर्माना अदा किया। अंतरराष्ट्रीय जनमत के दबाव में अमेरिका स्पष्ट रूप से इस मामले को जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है। लेकिन वास्तव में एक लाख यूरो का मुआवजा अमेरिका के मानवाधिकार ऋण के एक दस-हजारवें हिस्से को ढक नहीं सकता।

ग्वांतानामो जेल में जुबैदाह के समान अनुभव करने वाले कई लोग हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2003 में ग्वांतानामो में 700 कैदी थे और आज भी 39 बंदी हैं। ग्वांतानामो जेल में अमेरिकी पूछताछकर्ता जो चाहते हैं, वो वैसा ही करते हैं। उन्होंने तथाकथित मानवाधिकार रक्षक के मुखौटे को पूरी तरह से हटाकर फेंक दिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ग्वांतानामो जेल को अमेरिका में मानवाधिकारों के हनन में एक बदसूरत अध्याय कहते हैं।

इससे भी अधिक भयानक बात यह है कि 20 वर्षों के दौरान जब जुबैदाह को कैद किया गया था, अमेरिका द्वारा छेड़े गए तथाकथित आतंकवाद-विरोधी युद्ध ने दुनिया के लिए बड़ी आपदाएं उत्पन्न कीं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि यातना से लेकर ड्रोन रिमोट कंट्रोल हत्या तक, युद्ध के दुरुपयोग और अत्यधिक दुर्व्यवहार ने अमेरिका को दुनिया भर में नैतिक अधिकार से वंचित कर दिया है।

इतने सारे मानवाधिकारों के कर्ज से त्रस्त वाशिंगटन के राजनीतिज्ञ खुद को मानवाधिकार रक्षक और स्वतंत्रता प्रकाशस्तंभ कहने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? और यहां तक कि दूसरे देशों के मानवाधिकार मुद्दों पर उंगलियां कैसे उठा सकते हैं? यह पता चलता है कि उनके शब्दकोश में मानवतावाद बिल्कुल नहीं है, केवल राजनीतिक स्वार्थ और बेईमानी है। अमेरिका को उन कुख्यात विदेशी ब्लैक जेलों को शीघ्र ही बंद करना चाहिए, कैदियों के साथ दुर्व्यवहार की जांच करनी चाहिए, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्टीकरण देना चाहिए!

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एएनएम

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