नवगठित अफगान व्यवस्था को लेकर जवाब से कहीं अधिक उभर रहे सवाल

नवगठित अफगान व्यवस्था को लेकर जवाब से कहीं अधिक उभर रहे सवाल
नवगठित अफगान व्यवस्था को लेकर जवाब से कहीं अधिक उभर रहे सवाल इस्लामाबाद, 8 सितम्बर (आईएएनएस)। अफगान तालिबान ने मंगलवार को एक अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा की है और इसके नव-नियुक्त मंत्रिमंडल में 1990 के दशक के इसके पिछले कार्यकाल के अनुभवी नेता भी शामिल हैं।

तालिबान ने अपने शीर्ष नेतृत्व के लिए मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद को चुना है, जिसे अफगानिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। वहीं मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को अखुंद का डिप्टी यानी उप-प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि मंत्रियों की सूची में तालिबान का दिग्गज नेता सिराजुद्दीन हक्कानी भी शामिल है, जिसे महत्वपूर्ण आंतरिक मंत्रालय दिया गया है। सिराजुद्दीन हक्कानी एफबीआई की वांछित यानी मोस्ट वांटेड सूची में है, जिसके सिर पर 50 लाख डॉलर का इनाम है। सिराजुद्दीन हक्कानी नेटवर्क का नेतृत्व करता है और उस पर अतीत में कई घातक हमलों और अपहरण का आरोप लगाया गया है।

यहां यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि तालिबान द्वारा घोषित कैबिनेट और अंतरिम व्यवस्था में ज्यादातर पश्तून जातीय समूह शामिल हैं और यह तालिबान के खिलाफ एक और मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इसने देश के विभिन्न जातीय समूहों को दरकिनार कर दिया है, जो तालिबान के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करने में बाधा बन जाएगा।

अंतरिम व्यवस्था में ऐसे कई कारक हैं जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच अनिश्चितता और अविश्वास पैदा कर सकते हैं, जो तालिबान की ओर से बातचीत करने और अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने की ओर देख रहा है।

हालांकि, ऐसा लगता है कि तालिबान ने देश पर नियंत्रण करने के लिए अपने शीर्ष नेतृत्व और पुराने रक्षकों के साथ रहने का विकल्प चुना है, क्योंकि वे अफगानिस्तान को आर्थिक और मानवीय मंदी के मौसम में मदद करने के लिए सहायता और धन के तत्काल प्रवाह की ओर देख रहे हैं।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अफगानिस्तान के बजट का लगभग 80 प्रतिशत विदेशी सहायता से आता है। फिलहाल कतर से उड़ानें सहायता आपूर्ति के साथ दैनिक आधार पर काबुल में उतर रही हैं। हालांकि, तत्काल जरूरतें बहुत अधिक हैं और देश को वैश्विक समुदाय से तत्काल सहायता की जरूरत है।

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने कम से कम चार महीने के लिए अफगानिस्तान की सख्त जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल राहत सहायता के रूप में लगभग 66 करोड़ डॉलर का अनुमान लगाया है।

अफगानिस्तान में तालिबान के अधिग्रहण को चिंता के साथ देखा जा रहा है क्योंकि अफगानिस्तान में नव-निर्वाचित अंतरिम सरकार कहीं से भी समावेशी नजर नहीं आ रही है।

अमेरिका ने केवल तालिबान के कैबिनेट सदस्यों के चयन पर चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, दुनिया करीब से देख रही है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में महिला प्रतिनिधित्व नहीं होने पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है। इसके साथ ही इसने अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में सिराजुद्दीन हक्कानी जैसे लोगों के प्रतिनिधित्व पर भी सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि उनका ट्रैक रिकॉर्ड परेशान करने वाला है।

नवगठित सरकार को लेकर अमेरिकी विदेश विभाग के बयान में कहा गया है, प्रशासन को उसके कार्यों से आंका जाएगा।

जहां तक देश के शीर्ष पुलिस अधिकारी के रूप में हक्कानी की नियुक्ति का सवाल है, यह भी माना जाता है कि हक्कानी समूह अभी भी एक अमेरिकी नागरिक ठेकेदार मार्क फ्रेरिच को अपनी हिरासत में रखे हुए है। जनवरी 2020 में फ्रेरिच का अपहरण कर लिया गया था।

--आईएएनएस

एकेके/एएनएम

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