पाकिस्तानी धार्मिक संगठन ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता देने की मांग की

पाकिस्तानी धार्मिक संगठन ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता देने की मांग की
पाकिस्तानी धार्मिक संगठन ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता देने की मांग की पेशावर, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद एक परिवर्तित और प्रबुद्ध चेहरा होने के उसके दावों को दुनिया में मान्यता प्राप्त करने में अभी भी समय लग रहा है। अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार की स्थापना को अभी तक दुनिया भर के किसी भी देश द्वारा मान्यता नहीं मिली है, क्योंकि तालिबान को अभी भी अपने वादों को पूरा करना है।

जैसा कि दुनिया को अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार को मान्यता देने में समय लग रहा है, पाकिस्तान ने भी वेट एंड वॉच की अपनी नीति को अपनाने का विकल्प चुना है। एक ऐसा रुख जिसकी अब देश के धार्मिक राजनीतिक दलों द्वारा आलोचना की जा रही है।

पाकिस्तान की सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी (जेआई) ने प्रधानमंत्री इमरान खान से अफगानिस्तान में तालिबान शासन को तुरंत मान्यता देने की मांग की है, जिसका उद्देश्य युद्धग्रस्त देश और क्षेत्र में शांति का मार्ग प्रशस्त करना है।

जेआई के प्रमुख सिराजुल हक ने कहा, इस्लामी देशों को तालिबान सरकार को मान्यता देने के लिए इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की एक बैठक बुलानी चाहिए।

हक ने अमेरिका पर भी निशाना साधा और अफगानिस्तान में उसके 20 साल के युद्ध में हजारों लोगों की हत्या के लिए वाशिंगटन से माफी मांगने की मांग की।

उन्होंने कहा, अमेरिका को काबुल में सरकार को मान्यता देनी चाहिए और हजारों लोगों की हत्या के लिए अफगानिस्तान से माफी मांगनी चाहिए।

हक ने तालिबान शासन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि अफगानिस्तान को शांति की एक नई उम्मीद दी गई है।

अफगानिस्तान में 20 साल के संघर्ष के बाद तालिबान ने उम्माह को एक नई उम्मीद दी है। देश पर अमेरिकी कब्जे के बाद अफगानिस्तान में हजारों निर्दोष लोग मारे गए।

जेआई प्रमुख ने मौजूदा सरकार के तहत पाकिस्तान की विदेश नीति की भी आलोचना की, उन्हें याद दिलाया कि अमेरिकी कांग्रेस में इस्लामाबाद के खिलाफ हालिया वोट देश की विदेश नीति की विफलता थी।

दशकों से तालिबान नेतृत्व और उसके लड़ाकों को समर्थन और आश्रय देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की जाती रही है, जिसके बारे में वैश्विक समुदाय द्वारा दावा किया जाता है कि इसी वजह से अफगानिस्तान पर तालिबान तेजी से कब्जा कर सका।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा यह माना जाता है कि अफगानिस्तान में तालिबान का शासन पाकिस्तान के लिए एक अप्रत्यक्ष जीत है, जो अशरफ गनी शासन के खिलाफ था।

हालांकि, वर्तमान परि²श्य में, पाकिस्तान की सरकार निश्चित रूप से प्रमुख धार्मिक समूहों और राजनीतिक दलों के दबाव का सामना कर रही है कि वह सबसे पहले अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार को मान्यता दे, और इस संबंध में पश्चिम के रुख से दूरी बनाए।

--आईएएनएस

आरएचए/आरजेएस

Share this story