ब्रिक्स : विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावकारी आवाज

ब्रिक्स : विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावकारी आवाज
ब्रिक्स : विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावकारी आवाज बीजिंग, 12 सितम्बर (आईएएनएस)। जब गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ नील ने 2001 में ब्रिक्स शब्द गढ़ा, जिसमें भविष्यवाणी की गई कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बाजार अर्थव्यवस्थाएँ - ब्राजील, रूस, भारत, और चीन - साल 2050 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हावी हो जाएंगी, वैश्विक जीडीपी में उनका लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा था।

वहीं, साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका को ब्रिक्स बनाने के लिए समूह में जोड़ा गया, और वैश्विक अर्थव्यवस्था में पांच देशों की संयुक्त हिस्सेदारी अब लगभग 24 प्रतिशत है।

यह वृद्धि मुख्य रूप से चीनी अर्थव्यवस्था की उल्लेखनीय वृद्धि के कारण है, जिसने उस अवधि के दौरान दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए फ्रांस, यूके, जर्मनी, और जापान को पीछे छोड़ दिया।

बहरहाल, 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद से एक समूह के रूप में उनका सहयोग और आदान-प्रदान लगातार तेज हुआ है।

ब्रिक्स ढांचे के तहत मंत्रिस्तरीय स्तर की बैठकों के सामान्यीकरण के साथ, पांच देशों के बीच सहयोग अब व्यापार संबंधों से परे होते हुए वित्त और नवाचार, हरित विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सुरक्षा तक पहुंच गये हैं।

ब्रिक्स देशों का प्रत्येक शिखर सम्मेलन एक मील का पत्थर है जो उनके सहयोग को व्यापक और गहरा करता है, न केवल अपने लोगों को बल्कि अन्य देशों में भी मूर्त लाभ प्रदान करता है। वीडियो लिंक के जरिए गुरुवार को आयोजित 13वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कोई अपवाद नहीं था।

13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमें यह सुनिश्चित करना है कि ब्रिक्स अगले 15 वर्षों में और परिणामदायी हो। भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए जो थीम चुनी है, वह यही प्राथमिकता दशार्ती है। हाल ही में, पहले ब्रिक्स डिजिटल हेल्थ सम्मेलन का आयोजन हुआ। तकनीक की मदद से स्वास्थ्य तक पहुंच बढ़ाने के लिए यह एक नया कदम है।

दरअसल, पिछले डेढ़ दशक में ब्रिक्स ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। आज ब्रिक्स समूह विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावकारी आवाज है। विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए भी यह मंच उपयोगी रहा है।

सहयोग पर जोर देने के साथ, शिखर सम्मेलन ने ब्रिक्स देशों को नये कोरोनवायरस के खिलाफ लड़ाई में अपने व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने का अवसर प्रदान किया।

इस समय दुनिया के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता महामारी को जल्द से जल्द रोकना है। उस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करने के लिए, ब्रिक्स देश न केवल सीमा-पार रोकथाम और नियंत्रण उपायों में अपने समन्वय को मजबूत करेंगे, बल्कि वैक्सीन सहयोग के लिए अधिक संसाधनों और प्रतिभाओं को भी एकत्रित करेंगे, जो वायरस को हराने के लिए सबसे शक्तिशाली हथियार है।

चीन ने इस मई में ब्रिक्स वैक्सीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर-चाइना सेंटर लॉन्च किया, जो पिछले साल के शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित किए गए कार्यों को लागू करने के लिए एक कदम है।

वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास केंद्र के निर्माण में तेजी लाना, उत्पादन सहयोग करना और वैश्विक वैक्सीन विभाजन को पाटना और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि विकासशील देश कोविड-19 टीके प्राप्त कर सकें, जिनकी उन्हें सख्त आवश्यकता है।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

--आईएएनएस

आरजेएस

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