मेक्सिको ने मोदी के समक्ष यूक्रेन के लिए अंतर्राष्ट्रीय शांति समिति का प्रस्ताव रखा

मेक्सिको ने मोदी के समक्ष यूक्रेन के लिए अंतर्राष्ट्रीय शांति समिति का प्रस्ताव रखा
मेक्सिको ने मोदी के समक्ष यूक्रेन के लिए अंतर्राष्ट्रीय शांति समिति का प्रस्ताव रखा संयुक्त राष्ट्र, 22 सितंबर (आईएएनएस)। मेक्सिको ने गुरुवार को औपचारिक रूप से यूक्रेन पर रूस के हमले खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष शांति समिति के गठन का प्रस्ताव रखा।

मेक्सिको के विदेश मंत्री मासेर्लो एब्रार्ड ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मध्यस्थता प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए मोदी, पोप फ्रांसिस और अन्य नेताओं के साथ यूक्रेन में बातचीत और शांति के लिए एक पैनल बनाया जाना चाहिए।

एब्रार्ड ने यूक्रेन में सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग में कहा, उद्देश्य बहुत स्पष्ट होगा, बातचीत के लिए नए तंत्र का निर्माण और मध्यस्थता के लिए अतिरिक्त स्थान बनाना, जो विश्वास को बढ़ावा देता है, तनाव को कम करता है और स्थायी शांति की ओर रास्ता खोलता है।

उन्होंने शुक्रवार को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर द्वारा किए गए प्रस्ताव को परिषद के सामने प्रस्तुत किया।

उस भाषण में, ओब्रेडोर ने कहा कि मोदी और फ्रांसिस के साथ पैनल को यूक्रेन में शत्रुता को तुरंत समाप्त करने और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ सीधी बातचीत शुरू करने की मांग करनी चाहिए।

सुरक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय हमले खत्म करने का कोई रास्ता खोजने में अब तक असमर्थ रहे हैं, क्योंकि रूस के पास सुरक्षा परिषद में वीटो है।

भारत ने यूक्रेन पर रूस के हमलों पर एक तरह की तटस्थता बनाए रखी है, परिषद और महासभा में मास्को की निंदा करने वाले महत्वपूर्ण मतों से परहेज किया है।

लेकिन नई दिल्ली, जिसके मास्को के साथ घनिष्ठ ऐतिहासिक संबंध हैं, ने युद्ध खत्म करने का लगातार आह्वान किया है।

पिछले हफ्ते, मोदी ने हमलों के खिलाफ पुतिन को व्यक्तिगत रूप से एक कड़ा संदेश दिया था।

समरकंद में मुलाकात के दौरान मोदी ने उनसे कहा था, आज का युग युद्ध का युग नहीं है। हमने आपके साथ कई बार फोन पर चर्चा की है कि लोकतंत्र, कूटनीति और संवाद पूरी दुनिया को छूते हैं।

एब्रार्ड के बाद परिषद में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संघर्ष खत्म करने और बातचीत पर लौटने के लिए नई दिल्ली का आह्वान दोहराया था।

दूसरी ओर, पोप फ्रांसिस ने स्पष्ट रूप से रूस की निंदा की है।

--आईएएनएस

एसजीके/एएनएम

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