1984 दंगा : पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को हत्या के मामले में मिली जमानत

1984 दंगा : पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को हत्या के मामले में मिली जमानत
1984 दंगा : पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को हत्या के मामले में मिली जमानत नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। यहां की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान कथित तौर पर उनके नेतृत्व में हिंसक भीड़ द्वारा एक पिता और पुत्र की हत्या के मामले में कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को जमानत दे दी है।

हालांकि, पूर्व सांसद अभी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि उन्हें 2018 में दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में दोषी ठहराया गया था। इस समय वह आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

29 पन्नों के आदेश में न्यायाधीश एम.के. नागपाल ने कहा कि सज्जन कुमार की जमानत अर्जी मंजूर की जाती है। आदेश के मुताबिक, इस मामले में उन्हें इस अदालत की संतुष्टि के लिए 1,00,000 रुपये की राशि के दो जमानतदारों के साथ एक व्यक्तिगत बांड पेश करना होगा।

इसी अदालत ने सात दिसंबर को कुमार के खिलाफ मामले में आरोपों की घोषणा की थी। उन पर दोहरे हत्याकांड के संबंध में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दंगा, हत्या और डकैती का आरोप लगाया गया था।

मामले के अनुसार, पश्चिमी दिल्ली के राज नगर के निवासी जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुण दीप सिंह एक अनियंत्रित भीड़ द्वारा मारे गए थे। कथित तौर पर इस भीड़ में सज्जन कुमार के नेतृत्व में कई हजार लोग शामिल थे। दिल्ली सहित देश के कुछ हिस्सों में सिख विरोधी दंगे 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे।

सुनवाई के दौरान सज्जन के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी की उम्र लगभग 76 वर्ष है और वह विभिन्न आयु संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं और अगस्त, 2021 में वह लगभग 21 दिनों तक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती रहे थे। वह संसद के पूर्व सदस्य हैं और बड़े अंतर से तीन बार चुने गए थे और वे दिल्ली के स्थायी निवासी भी हैं, जिनकी समाज में गहरी जड़ें हैं और उन्हें समाज का बहुत सम्मान, प्यार और स्नेह प्राप्त है।

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने कथित अपराधों की गंभीरता और उसके लिए निर्धारित सजा के आधार पर प्रकाश डाला। आरोपी द्वारा धमकी या गवाहों को प्रभावित करने और एक प्रभावशाली व्यक्ति होने के नाते सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई।

विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें पासपोर्ट समर्पित करने और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने सहित कुछ शर्तो पर जमानत की अनुमति दी। यह भी निर्देश दिया गया कि वह इस मामले के गवाहों को धमकी नहीं देंगे या प्रभावित नहीं करेंगे और इस मामले के सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और ऐसा करने का प्रयास भी नहीं करेंगे।

--आईएएनएस

एसजीके/एएनएम

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